ग्रामीणों का पहरा और फिर निकाह! प्रेमिका से मिलने आए युवक
टेकचंद्र शास्त्री:
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उत्तर प्रदेश । एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से कम नहीं है.यहां परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में आधी रात को अपनी प्रेमिका से मिलने आए युवक को ग्रामीणों ने दबोच लिया.पकड़े जाने पर मारपीट या पुलिस बुलाने की बजाय, ग्रामीणों और परिजनों ने मौके पर ही काजी को बुलाकर दोनों का निकाह करा दिया.
इतना ही नहीं, लड़की के पिता ने 50 हजार रुपए नकद देकर अपनी बेटी और दामाद को हंसी-खुशी विदा भी कर दिया.यह अनोखा मामला परीक्षितगढ़ के गांव इकला रसूलपुर का है.
3 साल से चल रहा था अफेयर
जानकारी के मुताबिक, मवाना के मोहल्ला गाढ़ा चौक निवासी अलफाज और इकला रसूलपुर गांव की मुंतहा परवीन के बीच पिछले 3 साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था.दोनों के गांवों के बीच करीब 20 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन प्यार में दूरी कोई मायने नहीं रखती.गिफ्ट बास्केट
लड़की के परिजन आंखों के इलाज के लिए मेरठ शहर गए हुए थे। घर पर मुंतहा अकेली थी.मौका पाकर अलफाज अपने तीन दोस्तों के साथ रात के अंधेरे में प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुंच गया.
ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ा तो दोस्त फरार हो रहा था.
प्रेमी अलफाज जब घर में घुस रहा था, तभी कुछ ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ गई. गांव वालों ने घेराबंदी कर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर अलफाज के साथी मौके से भागने में कामयाब रहे.
ग्रामीणों ने जब अलफाज से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने कबूल किया कि वह मुंतहा से बेपनाह मोहब्बत करता है और पिछले 3 साल से वे एक-दूसरे को जानते हैं.उसने बताया कि घर पर किसी के न होने के कारण वह मिलने आया था.आधी रात को सजी पंचायत, काजी ने निकाह पढाया था
मामला खुलने के बाद पड़ोसियों ने फोन कर लड़की के परिजनों को वापस बुलाया.उधर, लड़के के घर वालों को भी मवाना से बुला लिया गया। रात में ही गांव में पंचायत बैठी.
शुरुआत में लड़के वाले शादी के लिए आनाकानी करने लगे और मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की. लेकिन, बदनामी का डर और ग्रामीणों के दबाव के आगे उन्हें झुकना पड़ा.लड़की पक्ष ने साफ कह दिया कि या तो अभी निकाह होगा, या फिर पुलिस कार्रवाई होगी.
इसके बाद दोनों पक्षों में रजामंदी बनी और एक राजीनामा (Panchnama) तैयार किया गया, जिस पर गांव के 11 मौजीज लोगों ने बतौर गवाह हस्ताक्षर किए.
हाथों में मेहंदी, 50 हजार नकद और विदाई
फैसला होते ही आधी रात को गांव का माहौल उत्सव में बदल गया.आनन-फानन में दुल्हन के हाथों में मेहंदी लगाई गई और शादी का लाल जोड़ा मंगवाया गया. काजी ने इस्लामिक रीति-रिवाज के साथ अलफाज और मुंतहा का निकाह पढ़ाया.
लड़की के पिता ने अपनी रजामंदी जाहिर करते हुए दूल्हे को शगुन के तौर पर 50 हजार रुपए नकद दिए और बेटी को विदा किया। सुबह जब नई नवेली दुल्हन मवाना स्थित अपनी ससुराल पहुंची, तो वहां ढोल-नगाड़ों के साथ उसका जोरदार स्वागत किया गया। ससुराल वालों ने भी इस रिश्ते को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया.
ग्राम प्रधान पति शरीफ ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी गहमागहमी जरूर हुई थी.लड़के पक्ष ने निकाह के लिए कुछ समय मांगा था, लेकिन लड़की पक्ष तुरंत फैसले पर अड़ा था.अंततः पुलिस केस से बचने और बच्चों की खुशी के लिए दोनों परिवार मान गए.अब दोनों हंसी-खुशी अपनी जिंदगी बिता रहे हैं.
यह शादी इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी सामाजिक दबाव भी सुखद अंत का कारण बन सकता है.जो कहानी एक विवाद या पुलिस केस बन सकती थी, वह ग्रामीणों की सूझबूझ से एक सफल लव स्टोरी में बदल गई. प्रेमी-प्रेमिका का मिलन हो गया और परिवार भी एक हो गए
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