एक मई से हाथ में आएगी कम सैलरी?ओवरटाइम पर दोगुना पैसा
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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लखनऊ। यूपी सरकार मई से नए श्रम कानूनों को लागू करने जा रही है। इसके लिए नियमों के मसौदे पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इसमें काम के घंटे से लेकर पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस को लेकर नियमों में बड़े बदलाव शामिल हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों और जोमैटो-स्विगी जैसे होम डिलीवरी प्लेटफॉर्मों के लिए काम करने वाले लोगों के लिए मई का महीना बड़ी खुशखबरी लेकर आ रहा है। इसमें श्रमिकों के काम के घंटे तय होने और ओवरटाइम पर दोगुना पैसा दिए जाने, प्रॉविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी वगैरह सबमें बड़ा बदलाव होने वाला है। दरअसल, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार चार नए श्रम कानूनों को आगामी मई से लागू करने जा रही है। इसके लिए पूरी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा रही है। हाल ही में नोएडा में फैक्टरियों में काम करने वाले श्रमिकों के वेतन बढ़ोतरी को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद इसमें तेजी आई है।
15 मिनट अतिरिक्त काम पर मिलेंगे दोगुना पैसे
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, योगी सरकार श्रम कानूनों को और सरल बना रही है। इसमें कंपनियों में काम करने वालों के लिए काम के 8 घंटे ही तय किए गए हैं।
इससे ऊपर अतिरिक्त 15 मिनट से ज्यादा समय तक काम करने पर ओवरटाइम दोगुना मिलेगा। सैलरी में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसमें नियुक्ति पत्र के साथ-साथ सैलरी पर्ची दिए जाने का भी प्रावधान हो सकता है।
कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन यानी बेसिक माना जाएगा। यानी श्रमिक की सैलरी का ज्यादा हिस्सा पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी देनदारियों में चला जाएगा। इस पूरे प्रॉसेस में हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है। मगर, कुल मिलाकर इससे श्रमिकों का भविष्य सुरक्षित होगा।
मई में लागू किए जा रहे नए श्रम कानून के तहत वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी में बदलाव होगा। श्रमिकों को न्यूनतम सुरक्षा भी मिलेगी। राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा अधिसूचित कर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी गई हैं। इन सुझावों और आपत्तियों के के आधार पर अंतिम नियमों को मई में अधिसूचित किया जाएगा।
चार कानूनों के आधार पर श्रमिकों की सुरक्षा
29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त कर चार संहिताओं वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 में मिलाया गया है। इसके तहत सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है।
इसके अलावा अब प्रबंधकीय और सुपरवाइजरी कर्मचारी भी कानूनी सुरक्षा के दायरे में आएंगे, जबकि ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी भी प्रमुख नियोक्ता पर तय की गई है।
छंटनी या ताला लगने पर कड़े किए गए नियम
नई वेतन संहिता के तहत पहली बार सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे नीचे राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेंगे।
वेतन का भुगतान हर महीने सात तारीख तक अनिवार्य होगा। ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान करना होगा। समान कार्य के लिए समान वेतन (लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव) खत्म होगा।
छंटनी और हड़ताल के नए नियम भी शामिल किए गए हैं। छंटनी की स्थिति में ‘री-स्किलिंग फंड’ में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा। इसके तहत 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। पहले यह सीमा 100 थी।
होम डिलीवरी करने वालों को भी शामिल किया गया
नई सामाजिक श्रम सुरक्षा संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे डिलीवरी व एप आधारित कामगार) को शामिल किया गया है। कंपनियों को 1-2% वार्षिक कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। कार्यस्थल आने-जाने के दौरान दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी। इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर की होगी। छोटे उल्लंघनों पर पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में जुर्माना 20 लाख रुपये तक हो सकता है। नई संहिताओं से सबसे बड़ी राहत एमएसएमई सेक्टर को मिलेगी।
हड़ताल से पहले 14 दिन का पूर्व नोटिस जरूरी
300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में नोटिस और मुआवजा जरूरी कर दिया गया है। हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस जरूरी। 20 से अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति होना जरूरी है। महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम की अनुमति दी गई है
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