श्रीमद् भगवत गीता के अनुसार योग का मतलब है “अप्राप्त वस्तुओं की प्राप्ति” तो उस हिसाब से यदि आप कर्म से कुछ प्राप्त करते हो तो वो होता है कर्मयोग, यदि आप भक्ति से कुछ प्राप्त करते हो तो वो होता है भक्तियोग और यदि आप ज्ञान से कुछ प्राप्त करते हो तो वो होता है ज्ञानयोग
वैदिक सनातन धार्मिक ग्रंथों में गीता को जीवन का प्रबंधन की पुस्तक माना गया है। महाभारत युद्ध के प्रारंभ में कुरुक्षेत्र में पांडव और कौरव सेना के बीच खड़े होकर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता मोक्ष का मार्ग दिखाती है। अब तो मैनेजमेंट स्कूल्स में गीता के जरिए मैनेजमेंट सूत्र पढ़ाए जा रहे हैं। गीता जीवन के लिए तीन मार्ग खोलती है। कर्म, भक्ति और ज्ञान। कृष्ण ने अर्जुन को कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग की शिक्षा दी। ये तीन ही रास्ते हैं जो जन्म-मरण के चक्र से आत्मा को बाहर निकालकर परमात्मा तक ले जा सकते हैं। कर्म करें उसे परमात्मा से जोड़ दें, ये कर्म योग है। ज्ञान प्राप्त करें और उसका आधार परमात्मा हो, ये ज्ञान योग है। भक्ति में हमारा मन उसी परमात्मा की स्तुति करे, प्राणी मात्र में उसके दर्शन हो जाएं, ये भक्ति योग है। गीता कठिन सवालों का सरल जवाब है।
कृष्ण का जीवन और गीता का उपदेश इन्हीं तीन चीजों पर टिका है। कृष्ण ने गीता में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग कहे हैं। भगवान के तीन मित्र हैं पूरी महाभारत में। अर्जुन, उद्धव और सुदामा। अर्जुन कर्म का प्रतीक है, उद्धव ज्ञान के और सुदामा भक्ति के। ये तीन मित्र ही हैं जो हमें जीवन को सही रास्ते पर ले जाते हैं। वैसे ही तीन महिलाएं हैं, द्रौपदी, राधा और कुंती। द्रौपदी कर्म की प्रतीक हैं, राधा भक्ति की और कुंती ज्ञान की। कृष्ण का संपूर्ण जीवन और गीता का सार तत्व इन तीनों योगों पर ही टिका है। जब युद्ध के तुरंत पहले, सामने खड़ी सेना में अपने ही परिजनों को देखकर अर्जुन दुखी हुए। संन्यास का मन बना लिया, तब युद्ध रोकने का हर संभव प्रयास कर चुके कृष्ण ने उन्हें युद्ध के लिए प्रेरित किया। ये बड़ा भारी विरोधाभास है। जो कृष्ण शांति दूत बनकर गए, इंद्रप्रस्थ ना देने पर दुर्योधन से पांच गांव मांग कर भी युद्ध टालने को राजी थे, वो अर्जुन को समझा रहे हैं कि युद्ध कर और उन सबको मार जो अधर्म के शिविर में हैं। गीता सिर्फ पढ़ने वाला ग्रंथ नहीं है। संसार की श्रेष्ठ ज्ञान युद्ध की आशंकाओं और जबाव के बीच आया। संदेश यह है कि दबाव से परेशान हों
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