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त्रिकालदर्शी श्वान भगवान भैरव का वाहन होने के कारण वह संभावित घटनाओं को जानता और पंहचानता है

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त्रिकालदर्शी श्वान भगवान भैरव का वाहन होने के कारण वह संभावित घटनाओं को जानता और पंहचानता है

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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श्वान-कुत्ता-कूकर को काल भैरव का वाहन मानाजाता है। वैसे भैरव को शमशान निवासी बताया गया है। तंत्र शास्त्र में भैरव माया और आत्म जगत के बीच की दीवार है, जिसे सशरीर पार नहीं कर सकते। शरीर से आत्मा का वियोग शमशान में होता है, इसलिए शमशान ही भैरव की कर्मस्थली है। भैरव शरीर का नाश कर आत्मा को मुक्त करता है, जैसे कोई माँस भक्षी हड्डियों से माँस अलग कर उसका भक्षण करता है। शमशान में केवल कुत्ते ही दिखाई देते है, अग्नि के डर से दुसरे शव भक्षक जीव जैसे गिद्ध आदि नज़र नहीं आते। ऐसे में कुत्ता भैरव का साथी बना। यहाँ वाहन का अर्थ शाब्दिक न होकर दार्शनिक है। जो भैरव की सत्ता को धारण कर शमशान में घूमता है वह श्वान है

त्रिकालदर्शी श्वान यानी कुत्ता सदैव अपनी बोली भाषा में भगवान भैरव के बीज मंत्र दोहराते हुए प्रत्येक अच्छी बुरी होनी अनहोनी घटाओं का संकेत देता रहता है?

उदाहरणार्थ : भौं:भौं: भ्रों:भ्रौं:भौ:भौ:भ्रं: भ्रं:भेंय:भोंय:भोंक्यांव औंभूंयूं: भौंखों: कुंई: कूंइं:भंक्यांओं इत्यादि के अलग अलग कोडवर्ड के माध्यम से भैरव बीज मंत्र का संकेत देते हुए बोलने के साथ-साथ हाथ-पैरों और पूंछ से इशारा करता है। जिसमें रूखी सूखी आबाज में नाराजगी दर्शाता है!

 

साथ रहते पालतु कुत्ते की भाषा उसके हाव भाव से जानी जाती है। हर कुत्ता अपने मालिक को अपनी विशेष भंगिमा से कुछ कहता है और उसका मालिक समझता है कि वह क्या चाहता है । हर कुत्ता अपने और मालिक के बीच अपनी बात कहने और मालिक की सुनने के लिए भाव भंगिमा गढ़ लेता है वहीं उसकी भाषा होती है

 

कुत्ते की भाषा कुत्ता ही समझा सकता है।क्या कुत्ते को हमारी भाषा समझ आती है?

काफी कुछ समझ आती है। हम रोज प्रातः 4:45 से 5:30 तक “हार्टफुलनेस” ध्यान करते हैं। हमारा डॉगी करैक्ट 5:35 पर घुमाने ले जाने के लिए भोंकने लगता है। अगर उसकी प्लेट मे पेडिग्री शेष हो, तो मै उससे कहता हूं (मराठी मे) पहले प्लेट का खाना खत्म करो, तभी घुमाने ले जाऊंगा, वह तुरंत चुप होकर पेडिग्री खाने लगता है, व पांच मिनट के इंतजार के बाद पुनः गुर्राना चालू।

 

इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।

 

क्या हम वास्तव में कुत्तों की भाषा को डिकोड कर चुके है। इंसानों की कोडिंग डिकोडिंग सीखने में तो व्यक्ति अवसादग्रस्त हो जाता है और आप कुत्तों की डिकोडिंग की सोच रहे है। कुत्ते अपराधियों की पहचान कैसे करते हैं?

संस्कृत भाषा कैसें सीखें? क्या कोई लोक-प्रिय पुस्तक है जिसके माध्यम से मैं संस्कृत बोलने और लिखने में सक्षम हो जाऊं? क्या जानवर इन्सान की भाषा समझ सकता है ? वह आपकी भाषा समझ सकता है आप क्यों नहीं समझ सकते? ।साथ रहते पालतु कुत्ते की भाषा उसके हाव भाव से जानी जाती है। हर कुत्ता अपने मालिक को अपनी विशेष भंगिमा से कुछ कहता है और उसका मालिक समझता है कि वह क्या चाहता है । हर कुत्ता अपने और मालिक के बीच अपनी बात कहने और मालिक की सुनने के लिए भाव भंगिमा गढ़ लेता है वहीं उसकी भाषा होती है ।

अगर कुत्ते की भाषा समझ और बोल पाते तो आप कुत्ते से क्या पूछते? अगर मैं कुत्तों की भाषा समझ और बोल पाता तो उनसे पूछता की, यार डॉगु एक बात तो बता “क्या वाकई धरम जी ने तेरी बिराद्री वालों का खून पिया है? क्या कुत्ता पालने वाला व्यक्ति कुत्तों की भाषा और मानसिकता को समझ सकता है?

हाँ ! बिलकुल समझ सकता है और ये दोनों तरफ से होता है यानि स्वान भी हमारी भाषा और मानसिकता को समझते हैं | अब जैसे मेरी पत्नी अगर बेटे को डांटती है तो मेरी डॉगी भी डर कर पलंग के अंदर दुबक जाती है| क्या हम वास्तव में कुत्तों की भाषा को डिकोड कर चुके हैं? यह जानना मुश्किल हो सकता है कि जब वह भौंक रही हो, तो आपका कुत्ता क्या संवाद करने की कोशिश कर रहा है। यह बहुत बुरा है कि बोलने वाला कुत्ता इस तरह से संवाद नहीं करता है जैसे कि मनुष्य समझ सकता है। लेकिन विभिन्न प्रकार के कुत्ते छाल के ज्ञान के साथ, मालिक बेहतर समझ सकते हैं कि उनका कुत्ता क्या संदेश देने की कोशिश कर रहा है, और आखिरकार वे अपने पालतू जानवरों के साथ साझा किए गए बंधन को मजबूत करते हैं।

 

पांच प्रकार के कुत्ते छाल

 

1. अलर्ट बार्किंग: कुत्ते के चारों ओर कुछ करने के लिए चेतावनी, “अरे! देखिए क्या हो रहा है! ”

 

2. डिमांड बार्किंग: कुत्तों को कुछ मिलना चाहिए, “अरे! वह मुझे दो!”

 

3. भयभीत

कुत्ते की मन की बात कैसे जानें?

निक्की जी, आपका प्रश्न बहुत से लोगों की नजर में बेमतलब का हो सकता है परन्तु जो लोग कुत्ते को पालना चाहते हैं या नए नए पालने लगे हैं उनके बहुत काम का है। जब चार साल पहले हमारा रेम्बो घर आया तो वह मात्र ४० दिन का था और वह भोंकता नहीं था। हमने पहली बार उसकी आवाज दो महीने बाद सुनी। उस समय उसके बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता होती थी कि वह क्या पसंद कर रहा है, कितना आराम दायक महसूस कर रहा है, उसके मन में क्या चलता है ?

 

धीरे धीरे उसके साथ रहते रहते उसकी हर बात समझ में आने लगी। कुत्ते के हाव भाव उसके मुँह से कम उसकी पूँछ से ज्यादा समझ आते हैं। वैसे आँखें तो हर जानवर की बोलती हैं और हर इन्सान को आँखों के भाव पढ़ने आते ही हैं। आँखें भर आना, खुशी से आँखों में चमक आना यह तो पता चल ही जाता है।

 

जब कुत्ते किसी के मिलने पर खुशी जाहिर करना चाहते हैं तो वे पूँछ को तेज तेज गोल घूमाते हैं। वह नृत्य मुंद्रा में पूँछ को तेज घुमाते ही जाते हैं जब वे किसी मन पसंद और प्यार करने वाले व्यक्ति से मिलते हैं।

 

जब कुत्ते की पूँछ साधारण तरह से दिखती है और उसमें किसी भी तरह की टेंशन नहीं होती है तो वह मस्त है उसके अंदर साधारण भाव हैं।

 

जब कुत्ते डर जाते हैं तो पूँछ को पीछे की टांगों के बीच ले आते हैं और छुपने की कोशिश करते हैं।

जब कुत्ते में जीत का भाव होता है तो पूँछ को सीधी ऊपर कर चलते हैं।

वैसे कुत्ते को कुछ चाहिये होता है तो वह अलग तरह से भोंकता है और अगर नाराजगी दिखता है तो ऊ ऊ ऊ ऊ जैसी आवाज निकालता है कि मुझे भी जाना है वगैरह। घर रहते कुत्ते के मन में क्या चल रहा है मालिक हमेशा समझ जाते हैं। अब अक्सर लोग पूछते हैं कुत्ते घर आए नए लोगों को क्यों भोंकते हैं ?यहाँ बताना चाहूँगीं वे अपनी सुरक्षा को लेकर अनजान लोगों के आगे भोंकते हैं, यह ब्रीड पर भी निर्भर करता है। अगर घर में रहने वाला छोटा कुत्ता होता है और अनजान आदमी बिना डरे आगे बढ़ता ही जाता है और कुत्ते से डरता नहीं है तो वे शरीर की भाषा को समझते हुए भोंकते हुए पीछे पीछे होने लगते हैं और डाइनिंग टेबल या किसी सुरक्षित जगह पर छुपने की कोशिश करते हैं परन्तु अगर अनजान आदमी डर कर भागने लगता है तो पीछे पड़ जाते हैं और उस आदमी के पीछे दौड़ने लगते हैं। काटने का तो ब्रीड को देखकर ही बताया जा सकता है परन्तु ज्यादातर पालतू कुत्ते काटते नहीं। कहते हैं कुत्ते का दिमाग तीन साल के बच्चे के समान होता है। उसे कुछ याद रहता है कुछ भूल जाता है। बाकि यह सोचना कि उसके दिमाग में इन्सान के समान हर समय कुछ चलता है गलत है आखिर तो वह जानवर है।

 

उम्मीद है यह उत्तर उन लोगों को जरूर पसंद आएगा जिन के पास पालतू कुत्ते हैं। अगर आप भी कुत्ता पालते हैं तो आप कमेंट में बताएं आप का कुत्ता भी क्या ऐसे अपनी नाराजगी, डर और ख़ुशी व्यक्त करता है।

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

उपरोक्त लेख पशु वैधकीय विज्ञान विशेषज्ञों और धर्मशास्त्रों से संकलित कर सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से प्रस्तुत है।अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञों से परामर्श कर सकते हैं।

अगर काट ले कुत्‍ता तो सबसे पहले करें ये काम

अगर किसी भी पालतू या आवारा कुत्‍ते ने काट लिया है तो तुरंत उस जगह को धो देना चाहिए. इसके बाद घर में रखे डिटर्जेंट साबुन जैसे कि रिन या सर्फ एक्सेल साबुन को घाव पर रगड़कर इस जगह को अच्‍छी तरह गर्म पानी से साफ कर लेना चाहिए. अगर जख्म बहुत गहरा है तो इस जगह पर पहले साबुन से धोएं और उसके बाद बीटाडिन मलहम लगा लें.

 

ध्यान रखें कि कुत्ता काटने के बाद घाव पर पट्टी नहीं बांधना चाहिए. घाव पर तेल, हल्दी या किसी घरेलू चीज को लगाने से बचें. घाव को धोने के बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

 

खाने में न दें ये चीजें

चूंकि रेबीज का वायरस फैलता है ऐसे में उसकी रोकथाम के लिए वैक्‍सीनेशन के अलावा खानपान भी ठीक रखना जरूरी है. मरीज को इम्‍यूनिटी बढ़ाने वाला खाना जैसे ताजा फल, सब्जियां, जूस, सुपाच्‍य खाना दें. तला-भुना भोजन, चिप्‍स आदि ज्‍यादा मसालेदार चीजें, आलू, टमाटर, धनिया आदि सब्जियां और मीट कुछ दिन खाने के लिए न दें.

 

रेबीज के इन लक्षणों पर करते रहें गौर

फेलिक्‍स अस्‍पताल के एमडी डॉ. डीके गुप्‍ता कहते हैं कि रेबीज बीमारी के लक्षण संक्रमित पशुओं के काटने के बाद या कुछ दिनों में प्रकट होने लगते हैं. अधिकतर मामलों में रोग के लक्षण प्रकट होने में कई दिनों से लेकर कई वर्षों तक लग जाते हैं. ऐसे जिसको भी कुत्‍ते ने काटा है उसके लक्षणों पर गौर करते रहें.

 

रेबीज बीमारी का खास लक्षण यह है कि जहां पर पशु ने काटा है वहां मासपेशियों में सनसनाहट होगी. इसके अलाव ये लक्षण अगर होते हैं तो तत्‍काल अस्‍पताल जाना जरूरी है..

 

. थकावट महसूस करना. सिरदर्द होना. बुखार आना. मांसपेशियों में जकड़न होना. घूमना-फिरना ज्यादा हो जाता है. चिड़चिड़ा होना या उग्र स्वाभाव होना. व्याकुल होना. अजोबो-गरीब विचार आना. कमजोरी होना या लकवा होना. लार व आंसुओं का बनना ज्यादा हो जाता है. तेज रौशनी, आवाज से चिड़न होने लगती है. बोलने में बड़ी तकलीफ होती है. अचानक आक्रमण का धावा बोलना.

 

वहीं जब संक्रमण बहुत अधिक हो जाता है और नसों तक पहुंच जाता है तो सभी चीजें या वस्तुएं दो दिखाई देने लगती हैं. मुंह घुमाने में परेशानी होती है. सीना या पेट का घुमाव विचित्र तरीके से होता है. लार ज्यादा बनने लगती है और मुंह में झाग बनने लगते हैं. मुंह से मरीज आवाज करने लगता है.

 

रेबीज का नहीं कोई इलाज

डॉ. गुप्‍ता कहते हैं कि कुत्‍ते के काटने या खरोंचने के बाद एक बार संक्रमण होने पर रेबीज का कोई इलाज नहीं है. हालांकि कुछ लोग जिंदा रहने में कामयाब रहे हैं लेकिन यह बीमारी जान ले लेती है. ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी को घातक होने से पहले ही रोक दिया जाए और कुत्‍ते के काटने या खरोंचने पर तुरंत वैक्‍सीनेशन कराया जाए.

पालतू कुत्‍तों के लिए बरतें ये सावधानी

जिन लोगों के घर में पालतू जानवर या कुत्ते है, वे डॉग के खानपान और उसको दिया जाने वाले माहौल का खास ध्‍यान रखें. ज्‍यादा खूंखार बनाने या छेड़ते रहने से वह किसी को भी अपना शिकार बना सकता है. इसके साथ ही कुत्‍ते को पालने से पहले वैक्‍सीनेशन जरूर करवाएं.

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