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मनचाही सफलता के लिए निर्जला एकादशी पूजन मुहूर्त, विधि-महत्व

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मनचाही सफलता के लिए निर्जला एकादशी पूजन मुहूर्त, विधि-महत्व

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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वाराणासी। भगवान श्रीमद्ध लक्ष्मीनारायण विष्णु को समर्पित निर्जला एकादशी व्रत का वैदिक सनातन हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी व्रत का महत्व, पूजन मुहूर्त, व्रत विधि व व्रत पारण का समय- का पालनकर्ता चाहिए.

 

निर्जला एकादशी हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आती है। इस साल निर्जला एकादशी व्रत 06 जून 2025, शुक्रवार को है। एकादशी व्रत जगत के पालन हार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा का विधान है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है. मनचाही सफलता के लिए जैसे मनचाही सुंदर सुडौल वर की प्राप्ति तथा मन पसंद सुशील कन्या की प्राप्ति, मनचाही संतान सुख और शिक्षा नौकरी पेशा, व्यापार, कृषि उत्पादन मे सफलता और स्वास्थ्य लाभ इत्यादि के लिए निर्जला एकादशी व्रत पारायण का बडा ही विशेष महत्व है.

 

 

निर्जला एकादशी व्रत बिना अन्न व जल के किया जाता है। निर्जला एकादशी व्रत कठिन व्रतों में से एक है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी व्रत करने से सभी 24 एकादशी व्रतों का फल मिलता है। इस साल निर्जला एकादशी पर रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है।

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निर्जला एकादशी पूजन मुहूर्त- निर्जला एकादशी पर पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:02 बजे से सुबह 04:42 बजे तक रहेगा। रवि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

निर्जला एकादशी व्रत विधि: निर्जला एकादशी पर सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें। व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। श्री हरि को पुष्प, फल, तुलसी दल व अक्षत आदि अर्पित करें। भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।

निर्जला एकादशी व्रत का फल: निर्जला एकादशी व्रत से सभी एकादशी का फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय: निर्जला एकादशी व्रत का पारण 07 जून 2025 को किया जाएगा। व्रत पारण का मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 44 मिनट से शाम 04 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 11 बजकर 25 मिनट है।

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

 

इस आलेख में दी गई जानकारियां सनातन धर्म शास्त्रों मे वर्णित सामान्य ज्ञान के लिए है .इस पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। क्योंकि यह सब अपनी आस्था, विश्वास और निष्ठा पर निर्भर करता है.इसे अपनाने के लिए संबंधित क्षेत्र के विद्धान विशेषज्ञ की सलाह और परामर्श जरूरी है?

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