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(भाग:266) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लव-कुश राजतिलक करके सौंपी दी कौशलपुुर की कमान

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भाग:266) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लव-कुश राजतिलक करके सौंपी दी कौशलपुुर की कमान

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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कालिदास के रघुवंश पुराण के अनुसार श्रीरामजी ने अपने पुत्र लव को शरावती तो कुश को कुशावती राज्य सौंपा. लव का राज्य उत्तर भारत में था तो कुश का राज्य दक्षिण कौशलपुर में. कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में थी. कोसल को श्रीराम की मां कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अयोध्या में लंबे समय तक राज करने के लिए वानप्रस्थ लेने का निर्णय क लिया तो उन्होंने छोटे भाई भरत का राज्याभिषेक करना चाहा. मगर भरतजी ने विनम्रता से मना कर दिया था। श्रीराम समेत चारों भाइयों के दो-दो बेटे थे. श्रीराम के जुड़वा बेटों का नाम था लव और कुश तो वहीं भरत के बेटों का नाम था तार्क्ष और पुष्कर. इसी तरह लक्ष्मण के पुत्र चित्रांगद और चन्द्रकेतु थे और शत्रुघ्न के पुत्र सुबाहु और शूरसेन थे. श्रीराम के समय में भी कोसल राज्य उत्तर कोसल और दक्षिण कोसल में बंटा था. कालिदास के रघुवंश अनुसार श्रीरामजी ने अपने पुत्र लव को शरावती तो कुश को कुशावती राज्य सौंपा. लव का राज्य उत्तर भारत में था तो कुश का राज्य दक्षिण कोसल में. कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में थी. कोसल को श्रीराम की मां कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है. रघुवंश अनुसार कुश को अयोध्या जाने के लिए विंध्याचल पर्वत पार करना पड़ता था, इससे भी सिद्ध होता है कि उनका राज्य दक्षिण कोसल में ही था.

लव के वंशज है राघव राजपूत

मान्यता है कि राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ है. इनमें बर्गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला. इसकी दूसरी शाखा सिसोदिया राजपूत वंश की थी, इनमें बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए. कुशजी से कुशवाह (कछवाह) राजपूतों का वंश बढ़ा. पौराणिक कथा अनुसार लवजी ने लवपुरी नगर की स्थापना की थी, जो वर्तमान में पाकिस्तान का लाहौर शहर है, यहां के एक किले में आज भी लवजी का मंदिर बना है. लवपुरी को बाद में लौहपुरी कहा जाने लगा. इतना ही नहीं, कालांतर में स्थापित लाओस, थाई नगर लोबपुरी का नाम भी लव पर ही रखा गया.

 

कुश का वंश ऐसे बढ़ा

राम के दोनों पुत्रों में कुश का वंश आगे बढ़ा तो कुश से अतिथि, निषधन से, नभ से, पुण्डरीक से, क्षेमन्धवा से, देवानीक से, अहीनक से, रुरु से, पारियात्र से, दल से, छल से, उक्थ से, वज्रनाभ से, गण से, व्युषिताश्व से, विश्वसह से, हिरण्यनाभ से, पुष्य से, ध्रुवसंधि से, सुदर्शन से, अग्रिवर्ण से, पद्मवर्ण से, शीघ्र से, मरु से, प्रयुश्रुत से, उदावसु से, नंदिवर्धन से, सकेतु से, देवरात से, बृहदुक्थ से, महावीर्य से, सुधृति से, धृष्टकेतु से, हर्यव से, मरु से, प्रतीन्धक से, कुतिरथ से, देवमीढ़ से, विबुध से, महाधृति से, कीर्तिरात से, महारोमा से, स्वर्णरोमा से और ह्रस्वरोमा से सीरध्वज का जन्म हुआ. कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना मानी जाती है.

 

महाभारत लड़े शल्य भी लव के वंशज रहे

 

एक शोध के अनुसार लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य पैदा हुए, जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे. यह इसकी गणना की जाए तो लव और कुश महाभारतकाल के 2500 वर्ष पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व हुए थे. शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए

 

भगवान राम के बाद उनका बड़ा बेटा कुश राजा बना। लव के बड़े बेटे होने की लोकप्रिय धारणा के विपरीत, यह कुश था जो सबसे पहले भगवान राम के लिए पैदा हुआ था और वाल्मीकि ने देवी सीता से अपनी बातचीत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि छोटे बच्चे होने के बावजूद लव का नाम जुड़वां बच्चों की खूबसूरती से तुकबंदी करने के लिए पहले लिया जाएगा।

 

भगवान राम ने अपने पुत्रों सहित किसी को भी अयोध्या का राज्य नहीं दिया। उसने अन्य राज्यों को उसके अधीन 8 राज्यों में विभाजित किया और रघुकुल के 8 राजकुमारों को दिया, जिनमें लव कुश और उनके भाई के छह संतान हूई

क्या आप जानते हैं कि भगवान राम के बाद रघुवंश का आख़िरी राजा कौन था?

हम बचपन से एक कहानी सुनते आ रहे हैं. ये कहानी त्रेतायुग की है. उस समय अयोध्या में एक राजा हुआ करते थे जिनका नाम था राजा दशरथ. राजा दशरथ की तीन रानियां थीं सुमित्रा, कौशल्या और कैकयी. इन तीन रानियों से उनको चार पुत्र हुए राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघन. लेकिन राजा दशरथ की सबसे छोटी रानी कैकयी चाहती थी कि उसका बेटा भरत अयोध्या की राजगद्दी पर बैठे, इसलिए उसके कहने पर दशरथ ने बड़े पुत्र राम को चौदह वर्ष के वनवास पर भेज दिया, राम जी को अकेला जाते देख लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास पर चल दिए. भगवान राम के साथ उनकी पत्नी सीता भी 14 वर्षों के लिए वनवास पर गयी थीं. जंगल में लंकाधीश रावण रानी सीता का हरण कर लेता है. फिर श्री राम रावण का वध करके पत्नी सीता को मुक्त कराते हैं. चौदह वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या वापस लौटते हैं. इसी दिन हिन्दू त्यौहार दीपावली भी मनाई जाती है. हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक़, भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार भी मना जाता है. राम एक आदर्श बेटे, प्रजा की रक्षा करने वाले राजा, पत्नी को प्यार करने वाले पति और अपने सिद्धांतों पर चलने वाले राजा थे. उनकी इन्हीं ख़ूबियों के कारण उनको मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम कहा जाता है.

ये कहानी तो सभी ने सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्या हुआ जब भगवान राम ने अपने मानव रूप को छोड़ दिया? उनकी मृत्यु के बाद उनके सिंहासन पर कौन बैठा?

1. भगवान राम और सीता के दो पुत्र थे लव-कुश.

बताया जाता है कि भगवान राम की मृत्यु के बाद बड़ा बेटा ‘कुश’ राजा बना. लेकिन कुश अपने पूर्वजों की तरह एक कुशल शासक नहीं बन पाया. वो इसलिए भी क्योंकि उन्होंने नागों को मारने की कोशिश की थी. जिन्होंने उनके पिता भगवान राम द्वारा दिए बेशक़ीमती पत्थर को चुरा लिया था. भगवान राम को ये बेशक़ीमती पत्थर अगस्त्य ऋषि ने भेंट में दिया था. कथाओं के मुताबिक़, कुश दुर्जय राक्षस से लड़ाई के दौरान मारा गया था, लेकिन उनके पूर्वज कभी, कोई भी लड़ाई नहीं हारे थे. पर जब दुर्जय राक्षस ने स्वर्ग पर आक्रमण किया, तो वो इसमें मारा गया था.

2. कुश की मृत्यु के बाद उसका बेटा ‘अतिथि’ राजा बना. कुश और नागकन्या कुमुदवती का बेटा अतिथि थे।

भरत के मामा का घर काकया में था, जिसके रास्ते का वर्णन वाल्मीकि की रामायण में वर्णित है। वह मार्ग सिंधु, बलूचिस्तान से जाता है। रावण का अंत करने के बाद माता सीता को राम अपने साथ ले आए, लेकिन वनवास के बाद दूसरी परीक्षा सीता की तैयारी के लिए खड़ी थी। राम ने एक धोबी के सवाल उठाने के बाद सीता को त्याग दिया और उन्हें वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में रहने के लिए जगह मिली। यहां उन्होंने अपने बेटों लव-कुश को जन्म दिया और उनका पालन-पोषण किया।

सीता के प्रति यह राम का प्रेम ही था कि उन्होंने सीता को त्यागने के बाद भी किसी दूसरी रानी से शादी नहीं की। वह सीता की अनुपस्थिति में उनकी कमी को पूरा करने के लिए यज्ञ में अपने साथ सोने की गुड़िया लेकर बैठते थे। सोना इसलिए क्योंकि इसे सबसे पवित्र माना जाता है। अब जानते हैं कि जब भगवान राम ने राज-पाट छोड़ा, तो रघुवंश का क्या हुआ और किसने किया शासन…

भरत के मामा का घर काकया में था और वहां जाने के लिए मार्ग वाल्मीकि की रामायण में वर्णित है। वह मार्ग सिंधु, बलूचिस्तान से होकर गुजरता है और बोलन पास को पार करते हुए कैस्पियन समुद्र के किनारे तक पहुंचता है। कह सकते हैं कि आज का कजाकिस्तान में कहीं, काकाया राज्य रहा था। उम्मीद कर सकते हैं कि कजाकिस्तान में कभी “आर्यों” के होने के पुरातात्विक सबूत मिल सकें, जो वास्तव में कैकेयी के गृह नगर थे। भारत के बेटों को तक्ष और पुष्कला दिया गया था। तक्ष अब तक्षशिला और पुष्काल अब पेशावर है।

अन्य राजकुमार

शत्रुघ्न के बेटों बाहू-सूत्रा को मथुरा का राजा बनाया गया। सुबाहू को विदिशा का राजा बन गया। लक्ष्मण के दो बेटे अंगद और चंद्रकेतु केरा-पथ साम्राज्य के शासक बने। राम के पुत्र कुश को विंध्य के कुशावती का राजा बनाया गया और लावा को शरावती का राजा बनाया गया था।

भगवान राम के राज-पाट छोड़ने के बाद कुश अपनी सेना के साथ अयोध्या आए वहां का शासन संभाला। उन्होंने कुमुदावती से विवाह किया और अथिथि के पिता बने। एक अन्य जानकारी के अनुसार, लव-कुश के 50वीं पीढ़ी में शल्य का जन्म हुआ, जो महाभारत काल में कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे।

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