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साहिर लुधियानवी के वे 5 फिल्मी गीत, जिन्हें सुना नहीं तो जिंदगी अधूरी है

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साहिर लुधियानवी के वे 5 फिल्मी गीत, जिन्हें सुना नहीं तो जिंदगी अधूरी है

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1.

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मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

 

हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

 

बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था

 

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया

 

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया

 

जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया

 

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ

 

मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

 

2.

 

भूले से मोहब्बत कर बैठा, नादाँ था बेचारा, दिल ही तो है

 

हर दिल से ख़ता हो जाती है, बिगड़ो न ख़ुदारा, दिल ही तो है

 

इस तरह निगाहें मत फेरो, ऐसा न हो धड़कन रुक जाए

 

सीने में कोई पत्थर तो नहीं एहसास का मारा, दिल ही तो है

 

जज़्बात भी हिन्दू होते हैं चाहत भी मुसलमाँ होती है

 

दुनिया का इशारा था लेकिन समझा न इशारा, दिल ही तो है

 

बेदाद-गरों की ठोकर से सब ख़्वाब सुहाने चूर हुए

 

अब दिल का सहारा ग़म ही तो है अब ग़म का सहारा दिल ही तो है

 

3.

 

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है

 

जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है

 

तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं

 

महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है

 

हम पास से तुम को क्या देखें तुम जब भी मुक़ाबिल होते हो

 

बेताब निगाहों के आगे पर्दा सा ज़रूर आ जाता है

 

जब तुम से मोहब्बत की हम ने तब जा के कहीं ये राज़ खुला

 

मरने का सलीक़ा आते ही जीने का शुऊ’र आ जाता है

 

4.

 

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से

 

चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से

 

ऐ रूह-ए-अस्र जाग कहाँ सो रही है तू

 

आवाज़ दे रहे हैं पयम्बर सलीब से

 

इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार

 

बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से

 

हर गाम पर है मजमा-ए-उश्शाक़ मुंतज़िर

 

मक़्तल की राह मिलती है कू-ए-हबीब से

 

इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ

 

जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से

 

5.

 

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी

 

होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी

 

शर्मा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर

 

लाती है ऐसे मोड़ पे क़िस्मत कभी कभी

 

खुलते नहीं हैं रोज़ दरीचे बहार के

 

आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी कभी

 

तन्हा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते

 

पेश आएगी किसी की ज़रूरत कभी कभी

 

फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में

 

मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी

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