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छिन्दवाडा का आदिवासी किसान कमा रहा एक एकड़ में 4 लाख शुध्द मुनाफा

छिन्दवाडा का आदिवासी किसान कमा रहा एक एकड़ में 4 लाख शुध्द मुनाफा

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

 

छिन्दवाडा। आदिवासी कृषक पूरनलाल इनवाती एक एकड़ में केले की प्राकृतिक खेती से कमा रहे हैं 4 लाख का शुध्द मुनाफा छिन्दवाड़ा केले के नाम से जबलपुर मंडी में हाथों – हाथ बिक रहे हैं प्राकृतिक केले

छिन्दवाड़ा जिले के हर्रई विकासखंड के ग्राम भुमका के आदिवासी कृषक पूरनलाल इनवाती प्राकृतिक खेती से एक ओर जहां रसायन मुक्त फल, सब्जी मार्केट में पहुंचा रहे हैं, तो वहीं लाखों रुपए का शुध्द मुनाफा भी कमा रहे हैं। कृषक पूरनलाल इनवाती ने इस वर्ष एक एकड़ में प्राकृतिक पद्धति से केले की खेती कर 4 लाख रूपये का शुध्द मुनाफा कमाया है। प्राकृतिक पद्धति से उनके द्वारा उगाए गए केले “छिंदवाड़ा केले” के नाम से जबलपुर मंडी में हाथों – हाथ बिक रहे हैं। केले के अलावा उनके द्वारा प्राकृतिक पद्धति से बैगन, टमाटर, मक्का की फसल भी लगाई गई है और आम, कटहल, आंवला, सेब, एप्पल बेर, ड्रैगन फ्रूट, नींबू, संतरा, काजू के पौधों का रोपण भी किया गयाहै।

 

किसान पूरनलाल इनवाती द्वारा ड्रिप पद्धति एवं फसल अवषेश का प्रबंधन कर पूर्णतः प्राकृतिक रूप से केले की टिशु कल्चर के द्वारा तैयार किस्म जी-9 लगाई गई हैं। साथ ही फसल अवषेश प्रबंधन करके मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारा जा रहा है। पिछले वर्ष आधा एकड में केले की प्राकृतिक खेती कर दो लाख सात हजार रूपये का शुध्द मुनाफा प्राप्त किया गया था। इस वर्ष एक एकड से चार से पांच लाख रूपये का शुध्द मुनाफा प्राप्त होना बताया है। एक एकड मे 800 पौधे लगाये हैं, प्रत्येक पौधे से औसतन 45 किग्रा. फल प्राप्त हो रहे हैं, जिसे किसान द्वारा जबलपुर मंडी में औसतन 25 रूपये प्रति किलो के भाव से विक्रय किया जा रहा है। किसान द्वारा बताया गया कि हमारा प्राकृतिक केला जबलपुर मंडी में छिंदवाडा के केले के नाम से प्रसिद्ध है एवं व्यापारियों द्वारा हाथों – हाथ उचित दाम देकर खरीद लिया जाता है। सामान्यतः जहां सामान्य केले की 15 से 18 रूपये प्रति किलो की दर से मंडी में खरीदी होती है, वहीं हमारा प्राकृतिक केला 25 रूपये प्रति किलो की दर से हाथों – हाथ बिक रहा है।

 

किसान द्वारा प्राकृतिक विधि से बैगन, टमाटर एवं मक्का की फसल भी लगाई गई हैं, साथ ही आम, कटहल, आंवला, सेब, एप्पल बेर, ड्रेगन फ्रूट, नींबू, संतरा, काजू के पौधो का भी रोपण किया गया है। किसान द्वारा कड़कनाथ मुर्गी पालन, बकरी पालन एवं मछली पालन इकाई भी स्थापित कर समन्वित खेती की जा रही है। इस प्रकार कुल लगभग 6 एकड जमीन से किसान द्वारा वर्ष में लगभग 10 लाख रूपये का शुध्द लाभ प्राप्त किया जा रहा है। इससे प्रेरणा लेकर जिले के अन्य किसान भाई भी प्राकृतिक खेती को अपनाकर एवं समन्वित खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

 

कृषक द्वारा की जा रही समन्वित खेती के इस उत्कृष्ट उदाहरण का अवलोकन आज जिले के अधिकारियों द्वारा भी किया गया। कलेक्टर छिंदवाडा शीलेन्द्र सिंह के निर्देशानुसार आज उप संचालक कृषि जितेन्द्र कुमार सिंह ने उद्यानिकी महाविद्यालय के डीन एवं सह संचालक आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र चंदनगांव डॉ.आर.सी.शर्मा के साथ कृषक पूरनलाल इनवाती के खेत मे पहुंच कर प्राकृतिक पद्धति से एक एकड में की जा रही केले की खेती का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान सचिन जैन अनुविभागीय कृषि अधिकारी अमरवाडा एवं स्थानीय कृषक भी उपस्थित थे।

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