कर्म तेरे अच्छे तो तकदीर तेरी दासी है।
टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
भारतीय वैदिक सनातन हिन्दू धर्म शास्त्रों के कथनानुसार यदि”कर्म तेरे अच्छे है तो तकदीर तेरी दासी है” “और नियत तेरी अच्छी तो घर मे मथुरा कासी है”.सत्य में यह कहावत सिद्ध सफल और चरितार्थ हो रही है.यह एक प्रेरक और प्रेरणादायक अभिकथन और अभिवचन बिल्कुल सत्य और सही है जिसका अर्थ है कि यदि आपके कर्म अच्छे और सही हैं, तो आपकी नियति या भाग्य आपके वश में होगा, यानी आपके अच्छे कर्मों के परिणामस्वरूप आपको जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होते रहेगी। यह कहावत अच्छे कर्मों और अच्छी नीयत के महत्व पर जोर देती है।
दरअसल में इस कथन के मुख्य बिंदु अच्छे कर्म और सम्मानजनक कुशल व्यवहार है.अच्छे कर्म से अच्छी किस्मत की निर्माण होना प्रकृतिक सत्य है. शास्त्रों मे
यह बताया है कि बुरे कर्म करने से भाग्य खराब नहीं होता, बल्कि अच्छे कर्मों से भाग्य को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए अच्छे कर्मों के द्धारा अपने आप स्वयं को नियंत्रित करने का प्रयास करते रहना चाहिए. दरअसल में
आप अपनी नियति को स्वयं तय कर सकते हैं। यह आलस या भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय कर्म करने की प्रेरणा देता है। कर्म को ही प्रधान माना गया है.
यह वाक्यांश धार्मिक और दार्शनिक विचारों से जुड़ा हुआ है, जो बताता है कि व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है।
एक लोकप्रिय सूक्ति के अनुसार यह एक कहावत है जिसे अक्सर प्रेरक वचनों के रूप में प्रयोग किया जाता है।
पूर्ण रूप (जब यह कहावत पूरी कही जाती है):
अक्सर इस पंक्ति के साथ एक और पंक्ति जोड़ी जाती है” कि कर्म तेरे अच्छे तो तकदीरतेरी दासी है”” और नियत तेरी अच्छी है तो घर में ही मथुरा काशी है”। इसका अर्थ यह है कि यदि आपकी नीयत साफ़ है, तो आपका घर ही तीर्थस्थान के समान पवित्र और शांत हो जाता है, जहाँ आप हर समय आनंदित और संतुष्ट रहते हैं
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