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इंदौर मे पानी की राजनीति? शुद्ध पेयजल के लिए हाहाकार 

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इंदौर मे पानी की राजनीति? शुद्ध पेयजल के लिए हाहाकार

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर मे पानी की गंदी राजनीति के चलते तमाम नागरिक जनता-जनार्दन पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है.

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सरकार पर मायावती का हमला, बोलीं-यह सब सरकारी गैर-जिम्मेदारी का नतीजा है.

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से अबतक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 149 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस घटना को सरकारी गैर-जिम्मेदारी और उदासीनता का परिणाम बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से अबतक कई लोग काल के गाल में समा गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, अबतक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 149 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर है। उनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। इस मामले पर राजनीतिक दलों ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों ले लिया है। अब इसपर बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ने जो प्रतिक्रिया दी है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में प्रदूषित पानी पीने से कई निर्दोष नागरिकों की मौत और अनेक लोगों के बीमार होने की खबर को अत्यंत दुखद और चौंकाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकारी गैर-जिम्मेदारी और उदासीनता को लेकर लोगों में स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में व्यापक आक्रोश भी स्वाभाविक है। मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वैसे तो लोगों को खासकर साफ हवा और पानी मुहैया कराना हर सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है। लेकिन यहां अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था की तरह ही बुनियादी जनसुविधा के संबंध में भी सरकारी लापरवाही व भ्रष्टाचार काफी घातक साबित हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार उजड़ रहे हैं, यह अति-दुखद और अति-चिन्तनीय है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि इस प्रकार की नागरिकों के जान से खिलवाड़ करने की शर्मनाक घटना की रोकथाम के लिये राज्य सरकार को सख्त से सख्त कदम उठाते रहने की जरूरत है। साथ ही केन्द्र की सरकार को भी इसका उचित संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई जरूर करनी चाहिए। ताकि देश के किसी अन्य राज्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं ना होने पाए।

बता दें, इंदौर में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 149 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और कई अन्य लोग बीमार पड़ गए हैं।

इंदौर के पानी में गंदगी का क्या है राज? टॉयलेट के साथ-साथ अब इन एंगल पर भी जांच कर रहे इंजीनियर

भागीरथपुरा की कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने कहा, “हम हर सुबह पीने का पानी खरीदते हैं। टैंकर हर दिन आता है, लेकिन हमें नहीं पता कि पानी कैसा है। पिछले कुछ दिनों से मैंने जो कुछ खाया है, उसके बारे में मुझे अभी भी ठीक से पता नहीं है भागीरथपुरा की संकरी, भीड़भाड़ वाली गलियों में इंजीनियरों की टीमें समय के साथ-साथ इस चिंताजनक संभावना से भी जूझ रही हैं कि वे अभी भी पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि इंदौर शहर की जल आपूर्ति में यह प्रदूषण कैसे पहुंचा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ हुई हाई लेवल मीटिंग के बाद विपक्ष के हमलों और भारतीय जनता पार्टी की ओर से हो रही अंदरूनी आलोचना के बढ़ते दबाव के चलते, मध्य प्रदेश भर के नगर निगम अधिकारियों को वाटर सप्लाई सिस्टम का सही रखरखाव, वाटर क्वालिटी की लगातार निगरानी और पाइपलाइन रिसाव का समय पर पता लगाने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

इंदौर में इस निर्देश के बाद शहर भर में इसके सोर्स का पता लगाने का अभियान चलाया गया है। इसमें सब-इंजीनियरों से लेकर एरिया इंजीनियर तक, स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर कई सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ऑफिस के कर्मचारियों तक 200 कर्मी शामिल है। यह पूरे शहर में फैल गए हैं। शुरुआती जांच सीधी-सादी लग रही थी। बाथरूम में उचित सेप्टिक टैंक नहीं था, इसलिए दूषित अपशिष्ट एक गड्ढे में जमा हो गया, जिसके कारण टूटे हुए पानी के पाइप से संक्रमण फैल गया।

इस जांच की देखरेख कर रहे एक एरिया इंजीनियर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पहले हमें लगा था कि संक्रमण स्थानीय पुलिस चौकी में बने टॉयलेट से फैला है। हालांकि, यह भी एक कारण हो सकता है, लेकिन हम इस मामले के अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रहे हैं।” इंजीनियर ने बताया, “शहर में कुल 105 पानी के टैंकर हैं जो लोगों को पानी की आपूर्ति करते हैं। अगर प्रदूषण व्यापक होता, तो पूरे शहर के पानी के टैंकरों में इसका पता चल जाता, लेकिन यह केवल भागीरथपुरा में ही देखा गया है। इसलिए गहन जांच की जरूरत है।” नगरपालिका अधिकारी आगे की जांच के लिए इस पाइपलाइन पर हेवी मेटल टेस्ट कर रहे हैं

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