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अवैध हथियार रखने के जुर्म में गिरफ्तार वीरेंद्र सिंह तोमर को जमानत मिली 

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अवैध हथियार रखने के जुर्म में गिरफ्तार वीरेंद्र सिंह तोमर को जमानत मिली

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

रायपुर। पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में अवैध हथियार रखने के आरोप में वीरेंद्र सिंह तोमर को जिला न्यायालय रायपुर से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज प्रकरण में वीरेंद्र सिंह तोमर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इस आदेश के बाद अभियुक्त को सशर्त जमानत पर रिहा किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रकरण के अनुसार, पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान वीरेंद्र सिंह तोमर के विरुद्ध अवैध हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। गिरफ्तारी के बाद से ही अभियुक्त न्यायिक हिरासत में था और उसकी ओर से जिला न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

 

न्यायालय से जो इन्साफ मिला उससे तोमर परिवार के लोग काफी खुश नज़र आ रहे है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी एवं अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्त को झूठे एवं मनगढ़ंत आरोपों में फंसाया गया है तथा उसके पास से किसी प्रकार का अवैध हथियार बरामद होने के संबंध में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य प्रथम दृष्टया कमजोर हैं। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध समाज की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

आंध्र-ओडिशा बॉर्डर में थे सक्रिय हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और प्रकरण के तथ्यों व परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने यह माना कि अभियुक्त को जमानत दिए जाने योग्य आधार मौजूद हैं। न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियुक्त को जमानत का लाभ कुछ शर्तों के अधीन दिया जा रहा है। इन शर्तों में नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराना, जांच में सहयोग करना तथा किसी भी प्रकार से साक्ष्यों को प्रभावित न करना शामिल है। जमानत मिलने के बाद अभियुक्त के परिजनों एवं समर्थकों में संतोष का माहौल देखा गया। इस प्रकरण में जिला न्यायालय के फैसले को कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि न्यायालय ने संतुलित तरीके से अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए निर्णय सुनाया

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