भारतवर्ष से सऊदी अरब देशों को निर्यात होता है लाखों टन गौमांस
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
नई दिल्ली।वैदिक सनातन धर्म कालीन देवी देवताओं और महान पुरुषों का यह देश भारतवर्ष से सऊदी अरब देशों को लाखों गाय-भैंसों का ट्रांसपोर्ट, विशेष रूप से मांस के लिए, एक बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। गोमांस का निर्यात भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री पं जवाहरलाल नेहरु और श्री मती इंदिरा गांधी के कार्यकाल से बखूबी शुरु है. भारतवर्ष से भैंस का मांस (बीफ) सऊदी अरब में एक महत्वपूर्ण निर्यात वस्तु है. भारत से सऊदी अरब को मांस का निर्यात, जिसमें भैंस का मांस (जिसे बीफ भी कहा जाता है)सबसे अधिक शामिल है,भारत का सऊदी अरब से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक गतिविधि संबंध है. सऊदी अरब में भैंस के मांस की काफी मांग बढ रही है, और भारतवर्ष इन मांगों को पूरा करने में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है. यह मांस आमतौर पर प्रसंस्कृत और पैक करके सऊदी अरब भेजा जाता है.
भारत से सऊदी अरब को मांस के निर्यात में, भैंस का मांस (बीफ) सबसे आगे है. सऊदी अरब में बीफ की मांग को पूरा करने के लिए भारत से बड़ी मात्रा में भैंस का मांस निर्यात किया जाता है. इसके अलावा, भारत से अन्य मांस उत्पादों जैसे कि बकरी और भेड़ का मांस भी निर्यात किया जाता है, लेकिन भैंस का मांस सबसे महत्वपूर्ण है. भारत से सऊदी अरब को मांस का निर्यात मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से होता है:
मांग: सऊदी अरब में बीफ की मांग अधिक है.भारत से बीफ का निर्यात अपेक्षाकृत सस्ती दर पर किया जाता है.
गुणवत्ता: भारत में भैंस के मांस की गुणवत्ता को लेकर भी सऊदी अरब में अच्छी राय है. सरकारी नीतियां: भारत सरकार भी मांस निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीतियां लागू करती है.सऊदी अरब में भारतीय मांस की आपूर्ति के लिए, विभिन्न परिवहन विधियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें हवाई जहाज और समुद्री जहाज शामिल हैं. हवाई जहाज के माध्यम से मांस को तेजी से पहुंचाया जाता है, जबकि समुद्री जहाज के माध्यम से बड़ी मात्रा में मांस का परिवहन किया जाता है.
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत से सऊदी अरब को मांस का निर्यात एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई चरणों और नियमों का पालन करना होता है.
भारतीय मुल्क के एक युवक ने सउदी अरब से वीडियो साझा कर वहां की लाइफ स्टाइल के बारे में बताया है। उसने यूपी से भेजे गए मांस की बिक्री से जुड़े कुछ तथ्य बताए।और पढ़ें
लखनऊ: उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में युवक रोजी रोटी के वास्ते सउदी अरब का रुख करते हैं। लेकिन, वहां जिंदगी भारत से कितनी अलग है, यह तो रह रहे लोग ही बता पाएंगे। इसी तरह एक शख्स सोशल मीडिया पर अपनी सऊदी अरब की अनोखी जिंदगी के अनुभवों को साझा कर रहा है। वो अपने फॉलोवर्स के लिए वीडियो संदेश जारी कर विदेश में बिताए गए अपने जीवन के दौरान उसे एक बेहद अजीब और दिलचस्प बताया।
लाखों की संख्या में विदेश जाते हैं भारतीय
दरअसल, हर साल भारत से लाखों लोग विदेश जाते हैं। इनमें से कुछ लोग घूमने के लिए जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग हमेशा वहीं के होकर रह जाते हैं। भारतीय लोगों का मानना है कि विदेशों में जीवन भारत की तुलना में बेहतर है। हालांकि, सच्चाई केवल वही जानते हैं जो अपने देश को छोड़कर अन्य देशों में बस गए हैं।
यूपी का एक युवक सऊदी अरब में बस गया है। उसने अपनी लाइफस्टाइल को साझा करते हुए बताया कि सुपरमार्केट में भारतीय मीट की बिक्री कैसे होती है। सऊदी में यूपी से भेजा गया भैंसे का मांस बिकते हुए दिखाया। यह फ्रोजेन भैंस का मीट था, जिसे भारत से पैक कर सऊदी भेजा गया। भैंस के मीट के पैकेट्स को बर्फ में रखा जाता है, ताकि ये खराब न हों। गाय का मांस भारत में प्रतिबंधित है, लेकिन विदेश भेजा जाता है। सऊदी अरब में भैंस के मीट की काफी मांग है। जिसके बारे में युवक ने भारतीयों को वीडियो के जरिए बताया है
भारत के भैंस मांस निर्यात में दिखेगी तेजी, ये हैं टॉप 10 खरीदार देशों में किसान तक के भैंस मांस निर्यात में दिखेगी तेजी, ये हैं टॉप 10 खरीदार देशों में इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, फिलीपींस, जॉर्डन और ओमान इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारतीय भैंस के मांस के टॉप दस खरीदारों में शामिल थे. वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में वियतनाम सबसे बड़ा खरीदार था, जिसकी मात्रा 1.06 टन से अधिक थी, जिसकी कीमत है.
भारत का भैंस मांस (कैरेबीफ) निर्यात 4 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख टन से अधिक हो सकता है. इसके बारे में यूएसडीए पोस्ट दिल्ली ने बताया है कि भैंस के मांस की मांग मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों से बढ़ रही है. लिहाजा, 2025 के दौरान भारत का कैरेबीफ निर्यात 4 फीसद बढ़कर 1.65 मिलियन टन (10.6 लाख टन) हो सकता है. 2024 में कैरेबीफ निर्यात तकरीबन 10.58 लाख टन रहने का अनुमान है.
नई दिल्ली में यूएसडीए की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र में भारत के भैंस मांस की मांग कम हो सकती है. हालांकि यहां इसकी मांग हमेशा से अच्छी देखी गई है. मिस्र में इस साल कैरेबीफ की खेप कम जाने की संभावना है. हालांकि, मलेशिया, वियतनाम, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे बाजारों में भारतीय कैरेबीफ निर्यात में लगातार वृद्धि होने की उम्मीद है.
कहां कितना निर्यात
इसके अलावा, ओमान, सेनेगल, रूस और उज्बेकिस्तान सहित कुछ अन्य देशों में भारतीय कैरेबीफ की निर्यात बढ़ सकती है. रिपोर्ट बताती है कि कुछ देश ऐसे भी हैं जहां भारत के मैंस मांस की मांग कम देखी गई है, लेकिन आने वाले समय में इसमें तेजी दर्ज की जा सकती है.
एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले छह महीनों में भारत का भैंस के मांस का निर्यात 5.53 टन से अधिक था, जिसकी कीमत 1,806 मिलियन डॉलर थी. एक साल पहले इसी अवधि में भैंस के मांस का निर्यात 6.1 टन से अधिक था, जिसकी कीमत 1,734.40 मिलियन डॉलर थी. वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में वियतनाम सबसे बड़ा खरीदार था, जिसकी मात्रा 1.06 टन से अधिक थी, जिसकी कीमत 364.70 मिलियन डॉलर थी. इसके बाद मिस्र का स्थान रहा, जिसकी मात्रा 96,152 टन थी, जिसकी कीमत 307.45 मिलियन डॉलर थी.
मलेशिया भारतीय भैंस के मांस के निर्यात का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसकी मात्रा 76,282 टन थी. इसकी कीमत 248.70 मिलियन डॉलर थी. इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, फिलीपींस, जॉर्डन और ओमान इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारतीय भैंस के मांस के टॉप दस खरीदारों में शामिल थे.
इसके अलावा, यूएसडीए पोस्ट का अनुमान है कि भारत का 2025 बीफ़ उत्पादन (ज़्यादातर कैरेबीफ़) स्थिर घरेलू और निर्यात मांग के कारण 4.57 मीट्रिक टन से बढ़कर 4.64 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है. इसने कहा कि खाद्य महंगाई की मौजूदा चिंताओं के कारण 2025 में घरेलू खपत 2024 की तरह ही 2.99 मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है.
मिल्किंग कम्पटीशन में गाय-भैंस का होगा डोप टेस्ट, जानें कहां है व्यवस्था
भारत में मवेशियों की संख्या पिछले साल की तरह इस साल भी लगभग 3070 लाख रहने का अनुमान है. अगले साल बछड़ों की तादाद बढ़कर 710 लाख तक जाने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार डेयरी विकास, पशुओं के स्वास्थ्य और ब्रीडिंग पर फोकस कर रही है जिससे बछड़ों की संख्या में तेजी देखी जा रही है.अब सवाल उठता है कि राम मंदिर और कृष्ण जन्म भूमि का बखान करने वाला कट्टर हिन्दुत्व वादी संगठन इस विषय पर क्यों मौन दिखाई दे रहा है. क्या इस संबंध में केंद्र की सत्तारूढ सरकार के मंत्रीमंडल के मुंह मे लकवा मार गया है?
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