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कैंसर मरीजों को आर्थिक सेवा ही तुकडोजी महाराज की आत्मतृप्ति

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कैंसर मरीजों को आर्थिक सेवा ही तुकडोजी महाराज की आत्मतृप्ति

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

अमरावती। गुरुकुंज मोझरी मे स्थापित राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज का स्मारक और आश्रम से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कैंसर मरीजों को आर्थिक सहयोग करना राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की विचारधारा के अनुरूप है और इसे मानवता की सच्ची सेवा माना जा सकता है। तुकडोजी महाराज का जीवन निःस्वार्थ सेवा और ग्रामोन्नति के लिए समर्पित था। राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज का मानना था कि मानवता सेवा ही सच्चा धर्म है. तुकडोजी महाराज का मानना था कि ईश्वर की सेवा का अर्थ मानव समाज की सेवा करना है। दुखी और बीमार लोगों की मदद करना उनकी शिक्षाओं का मूल है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज रीजनल कैंसर हॉस्पिटल (नागपुर) का संचालन कैंसर रिलीफ सोसाइटी द्वारा किया जाता है, जो उनके विचारों से प्रेरित होकर मरीजों को चिकित्सा और आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

सेवा की विरासत: उन्होंने 1945 के बंगाल अकाल और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य किए थे, जो पीड़ितों की मदद के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ग्रामगीता के माध्यम से उन्होंने सामाजिक समानता, व्यसन मुक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है।

अतः, कैंसर पीड़ितों की सहायता करना न केवल सामाजिक जिम्मेदारी है, बल्कि यह राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की सेवा-भाव की विरासत को आगे बढ़ाने जैसा है. व्याप्त चर्चाओं के मुताबिक नागपुर जिला ग्रामीण क्षेत्रों मे अनेकानेक लोग राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के कार्यक्रम के नाम पर भरण-पोषण के लिए चंदा उगाही कर रहे हैं.

कुरुकुंज मोझरी मे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का स्मारक मौजूद है. राष्ट्र संत तुकडोजी जिन्होंने ‘ग्रामगीता’ के माध्यम से समाज सेवा, ग्राम विकास और आडंबर -मुक्त जीवन का संदेश दिया था. वर्तमान परिवेश मे अनेकानेक लोग उनके नाम का दुरुपयोग कर चंदा वसूली करने की खबरें चिंताजनक हैं। हालांकि हमारे पास उपलब्ध गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक किसी विशिष्ट व्यक्तियों के खिलाफ चंदा उगाही कर अपना स्वार्थ साधने के संबंध में हालिया खबरें मिल रही हैं.

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने हमेशा निःस्वार्थ सेवा और श्रम की प्रतिष्ठा का पाठ पढ़ाया।

आडंबर का विरोध किया और उन्होंने ग्रामगीता में अंधश्रद्धा और दिखावे का विरोध किया है। तुकडो जी महाराज ने ‘इस झोपड़ी में मेरे राजा’ भजन के माध्यम से सादगी का संदेश दिया था, न कि भौतिक सुखों के अपना पेट भरण -पोषण किया था? जनता-जनार्दन और नागरिकों ने राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज के कार्यक्रम के नाम पर

चंदा देने से पहले संस्था के पंजीकरण और ट्रस्टियों की जानकारी लेना चाहिए.

आधिकारिक गुरुकुंज मोझरी से तुकडोजी महाराज द्वारा स्थापित मुख्य आश्रम ‘गुरुकुंज मोझरी’ से संबंधित जानकारी के माध्यम से ही सहयोग करना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से उनके नाम का दुुरुपयोग कर रहा है, तो इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस अपराध शाखा में जानी देना चाहिए।

संतों के नाम पर चंदा उगाही कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना उनकी शिक्षाओं और समाज के विश्वास का उल्लंघन माना जा रहा है

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