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अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस आज : जिस भूमि पर में यज्ञ अनुष्ठान होता है वह भूमि तीर्थ बन जाती है!

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कासी विश्वनाथ। आज अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस है। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा पिछले तीन-चार वर्षों से यज्ञ दिवस का आयोजन करती आ रही है। इस वर्ष भी यह हो रहा है। 50-100 घरों में नहीं, बल्कि धनबाद के 2500 से अधिक घरों में यज्ञ हुआ। पिछले कई दिनों से इसकी तैयारी की जा रही थी। लोगों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूक भी किया गया।
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से सुबह सात बजे एक साथ एक ही समय पर लोगों ने
अपने-अपने घरों, आर्य समाज मंदिर, गुरुकुल में यज्ञ किया। राजार्य सभा के प्रदेश अध्यक्ष हरहर आर्य ने बताया कि यज्ञ का आयोजन किसी पंडाल मैदान में न होकर घरों में किया गया। इसका उददेश्य यही थी कि यज्ञ के जरिए हर घर का माहौल सात्विक हो, लोगों शांति-सफलता की अनुभूति करें। मानव समाज की भलाई के लिए विश्व के लोग एक साथ, एक समय अपने अपने घर पर, कार्यस्थल पर यज्ञ किया। जड़ी बूटी से बनी हवन सामग्री और देसी गो घी से यज्ञ में आहुति डाली गई
इनके नेतृत्व में हुआ यज्ञ: धनबाद से राजेश वर्णवाल, गोविंदपुर से स्वर्णलता आर्या व ज्योति कुमारी, निरसा से यशवंत सिंह व अशोक घाटी, मुगमा से ललिता चौहान, चिरकुंडा से गांधारी शर्मा के नेतृत्व में यज्ञ का आयोजन हुआ। इन्होंने हर घर से यज्ञ के लिए लोगों को जोड़ने का काम किया। धनबाद जिले में 2500 परिवार के घरों में वैदिक यज्ञ किया गया। घर घर यज्ञ, हर घर यज्ञ का आयोजन आर्य समाज की सर्वोच्च संस्था सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की देखरेख में हुआ। इसमें वरिष्ठ प्रधान डाॅ. यशवंत सिंह, देवनाथ मिश्रा, संतोष सिंह, प्रह्लाद आर्य, कृष्णा कुमार, ज्योति कुमारी, गायत्री कुमारी, सरिता देवी ने विशेष सहयोग दिया।

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साधारण रोगों एवं महामारियों से बचने का यज्ञ एक सामूहिक उपाय: हरहर आर्या ने बताया कि यज्ञ के जरिए शक्तिशाली तत्त्व वायुमंडल में फैलते हैं। इससे हवा में तैर रहे असंख्य कीटाणु सहज ही नष्ट हो जाते हैं। यज्ञ दवाइयों से कहीं अधिक कारगर उपाय है। साधारण रोगों एवं महामारियों से बचने का यज्ञ एक सामूहिक उपाय है। यज्ञ की वायु सर्वत्र पहुंचती है। सभी प्राणियों की सुरक्षा करती है। जहां यज्ञ होते हैं, वह भूमि एवं प्रदेश सुसंस्कारों की छाप अपने अंदर धारण कर लेता है। प्राचीनकाल में तीर्थ वहीं बने हैं जहां बड़े-बड़े यज्ञ हुए थे। जिन घरों, स्थान में यज्ञ होते हैं, वह भी एक प्रकार का तीर्थ बन जाता है

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