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विपक्षी दलों की बैठक से पहले सियासी हलचल तेज : पक्ष-विपक्ष में छिड़ा वाकयुद्ध

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पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 23 जून को पटना में विपक्षी नेताओं की एक बड़ी बैठक बुलाई है. जिसे लेकर पक्ष और विपक्ष के नेताओं में जोरदार बयानबाजी शुरू हो गई है.लोकसभा चुनाव-2024 में एक साल से भी कम समय बाकी है. जिसे देखते हुए सभी दल तैयारियों में जुटे हुए हैं. बीजेपी (BJP) नेता जहां जनसंपर्क अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं तो वहीं विपक्षी दलों ने भी पटना (Patna) में 23 जून को अहम बैठक बुलाई है. इसी बीच इस बैठक से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष में वार-पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया है।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार (19 जून) को कहा कि जो विपक्ष के नेता बिहार जा रहे हैं, उन्हें नीतीश कुमार से वहां चल रहे भ्रष्टाचार के बारे में पूछना चाहिए. बिहार में 1750 करोड़ रुपये का पुल एक बार नहीं कई बार ताश के पत्तों की तरह ढह गया. वहां एंबुलेंस का सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. गठबंधन का आधार भ्रष्टाचार करने वाली पार्टियों का इकट्ठा होना नहीं हो सकता. ये भ्रष्ट पार्टियों का गठबंधन नहीं होना चाहिए. उन्हें ये भी बताना चाहिए कि उनके गठबंधन का नेता कौन है
बीजेपी नेता और यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विपक्ष के पास कोई एजेंडा नहीं है और अगर वे एकजुट भी हो जाएं तो भी लोग उनका समर्थन नहीं करेंगे. जनता 2024 के चुनाव में पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को 350 से ज्यादा सीटें देने को तैयार है. उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं पीडीए का मतलब बता रहा हूं. पी का मतलब परिवारवाद, डी से दंगा और ए से अपराधियों का संग इसलिए उनका पीडीए वह नहीं जो वे (अखिलेश यादव) बता रहे हैं. पिछड़े वर्ग ने उनको नकार दिया है. दलित उनको देख नहीं सकता क्योंकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने काफी दमन किया है.
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले को खारिज करते हुए इसे तुकबंदी करार दिया. बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा की ओर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के जवाब में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का राग केवल तुकबन्दी के सिवाय और कुछ नहीं है. मायावती ने कहा कि इनके पीडीए का वास्तविक अर्थ है- परिवार, दल, अलायंस (गठबंधन) है और यहीं तक यह पार्टी सीमित है. इसीलिए अखिलेश ने जिन वर्गों के लोगों का जिक्र किया है वे जरूर सावधान रहें.
अखिलेश यादव ने शनिवार को लोकसभा चुनाव में बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की बड़ी हार का दावा करते हुए कहा था कि आने वाले लोकसभा चुनाव में पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों (पीडीए) की एकता बीजेपी नीत एनडीए पर भारी पड़ेगी. बीजेपी साल 2014 में सत्ता में जैसे आई थी, 2024 में उसकी वैसे ही उप्र से विदाई होगी. 2024 में पीडीए (पिछड़े, दलितों, अल्पसंख्यकों) की एकता भाजपा और एनडीए पर भारी पड़ेगी.
इससे पहले बीते दिन बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि उनका (विपक्ष) पीएम का चेहरा कौन होगा? ममता तो कह रही हैं कांग्रेस पार्टी सीपीएम से दोस्ती करेगी तो मैं नहीं आऊंगी, मैं विरोध करूंगी. ये आपस में ही खटपट हैं. ये कुर्सी के लिए स्वार्थी लोगों का एक गठबंधन है वे अकेले पीएम मोदी का मुकाबला नहीं कर सकते हैं, वे इसे एक साथ करने की कोशिश कर रहे हैं. देश स्थाई सरकार चाहता है आपस में लड़ने वाले लोगों का रगड़ा नहीं चाहता है.
बीजेपी के आरोपों पर विपक्षी नेताओं ने भी पलटवार किया है. कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि रविशंकर प्रसाद, आप चाहे जितनी कोशिश कर लें, लेकिन आप दोबारा कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे. जहां तक हमारे प्रधानमंत्री उम्मीदवार का संबंध है, हमारी बैठक जनता के समान मुद्दों और एजेंडे पर चर्चा पर केंद्रित होगी. हम आपको अपना पीएम का चेहरा भी बताएंगे और कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, ये भी बताएंगे. आप धैर्य रखें.
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि रविशंकर प्रसाद जो कहते हैं उसका कोई महत्व नहीं है. उनकी अपनी पार्टी ने उन्हें मंत्रालय से हटा दिया था. 23 को पटना में विपक्ष की बैठक मोदी का विकल्प प्रदान करने का तरीका खोजने के लिए है. मोदी की सरकार स्वार्थी, सांप्रदायिक, संकीर्ण और अडानी पर निर्भर रही है. शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि 23 जून को हम सब पटना में मिल रहे हैं. उद्धव ठाकरे यहां से जाएंगे, शरद पवार भी जाने वाले हैं. पूरे देश से लोग वहां आएंगे, हम वहां एक चर्चा करेंगे. हम सब एक साथ हैं और रहेंगे.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष की एकता बयानों से ज्यादा अहम है. बीजेपी के खिलाफ एक साझा उम्मीदवार जरूरी है. देश में 2 गठबंधन हैं, एक महात्मा गांधी को मानता है और दूसरा गोडसे को, इसलिए यह 2 अलग-अलग विचारधाराओं की लड़ाई है. आज हम यहां लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए हैं. अगर बीजेपी सत्ता में रहती है तो वे हर राज्य को मणिपुर जैसा बना देंगे और जाति और धर्म के आधार पर अशांति पैदा करेंगे. इसलिए बीजेपी के खिलाफ गठबंधन होना चाहिए. प्रधानमंत्री के चेहरे में क्या रखा है, विचारधारा एक जैसी है बस यही मायने रखता है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा किविपक्ष इस देश को एक विकल्प दे सकता है. इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि विपक्षी एकता विचारधाराओं और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए. ये दावा कि विपक्षी नेता एक साथ नहीं बैठ सकते हैं और उनके बीच मनमुटाव है, ये निराधार है. जब विपक्षी विचारधारा के आधार पर एकजुट होंगे, तो यूपीए 3 निश्चित रूप से बन सकता है
सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि 23 जून को बिहार में जो बैठक होने वाली है उसमें विपक्ष की सभी पार्टी खासतौर पर धर्मनिरपेक्ष पार्टियां एक होकर बीजेपी को इस देश से हटाने पर चर्चा करेंगी. सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा ने कहा कि हमने 6-7 लोकसभा सीटों की पहचान की है जहां हमें लगता है कि हमारी मजबूत उपस्थिति है और इसी तरह हमने 20-22 विधानसभा सीटों (झारखंड में) की पहचान की है, जो सभी बातचीत के अधीन हैं.
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार, जेडीयू और सारे विपक्ष के लिए 23 जून की बैठक एक चुनौती भरा काम है. हम बीजेपी के विरुद्ध एक रणनीति बनाने में लगे हुए हैं. जिसमें लगभग 450 सीटों पर बीजेपी के खिलाफ संयुक्त विपक्ष का एक ही उम्मीदवार हों, इस रणनीति पर हम कार्य कर रहे हैं. सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि यूपी में बीजेपी को सिर्फ सपा ही रोक सकती है और हम यह चाहते हैं कि सब लोग गठबंधन करके चुनाव लड़ें.
विपक्षी दलों में फूट का दावा करते हुए बिहार बीजेपी के नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि तमिलनाडु के सीएम स्टालिन बैठक में आने को तैयार नहीं है. उनको मनाने के लिए वह (नीतीश कुमार) फिर कल 20 जून को तमिलनाडु जाने वाले हैं. ये बिहार की अस्मिता को खराब कर रहे हैं. बता दें कि, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव 20 जून को तिरुवरुर में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि की स्मृति में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे. करुणानिधि के बेटे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ये जानकारी दी.
विपक्ष की बैठक पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में जो राजनीतिक घटनाक्रम बदला है उसको मैं राज्य की घटना मानता हूं. इससे देश की राजनीति में कोई फर्क पड़ेगा. ऐसा मेरी समझ से संभव नहीं है. न तो विपक्ष की गोलबंदी में और न ही पक्ष की गोलबंदी में मेरी भूमिका है. सीएम नीतीश की पहली प्राथमिकता बिहार के विकास के लिए होनी चाहिए चाहे विपक्ष की गोलबंदी हो या न हो. गौरतलब है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 23 जून को विपक्षी एकता को लेकर पटना में एक बड़ी बैठक बुलाई है

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