लाखों कारसेकों में नाराजगी? नतीजा अयोध्या,चित्रकुट व नासिक मे BJP की हार
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
चित्रकूट।लाखों- करोडों श्रीराम शिला पूजक और कारसेवकों को मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे आमंत्रित नहीं किया गया? नतीजा प्रकृतिक परमात्मा की वक्रदृष्टी से अठारहवीं लोकसभा चुनाव में BJP को 400 पार करने की वजाय 300 सीटों पर ही सिमटकर रहना पडा?यह सब मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के लाखों-करोडों श्रीराम शिलापूजक और कारसेवकों को दरकिनार करने का नतीजा माना जा रहा है?
ज्ञातव्य है कि श्रीराम-भरत मिलाप पावन तीर्थ चित्रकूट, राम जन्म भूमि अयोध्या जिला फैजाबाद तथा श्रीराम वनगमन स्थल पंचवटी नासिक इत्यादि लोकसभा सीटों पर BJP की पराजय का मुख्य कारण यह है कि मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम मंदिर की शिलान्यास और प्राणप्रतिष्ठा समारोह में रामशिला पूजक और कारसेवकों दरकिनार किया जाना बताया जा रहा है?पहाडी थाना चित्रकूट निवासी श्रीराम के वंशज माने जाने वाले राजपूत रघुवंशी समुदाय का कहना है कि मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे जिन VIP- vvip मान्यवर को आमंत्रित किया गया था? ना वे राम भक्त थे और वे शुद्ध शाकाहारी और निरव्यसनी भी नहीं थे? इसके अलावा हजारों उपासक दण्डी सन्यासियों और संत महात्माओं को भी आमंत्रित नही किया गया? कारसेवक पुरुषोत्तम अग्रवाल, सतीश सिंह और गिरधर रघुवंशी ने कहा कि देश के लाखों कारसेवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था? परंतु उन्हें प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण नहीं दिया गया था।
जबकि श्रीराम शिला पूजकों और कारसेवकों को दरकिनार किया गया। इतना ही नहीं प्राण प्रतिष्ठा में राम मंदिर का विरोध करने वालों को भी निमंत्रण भेजा गया था. जबकि अपनी जान जोखिम में डालकर कर सेवा करने वाले लाखों कारसेवक बुलावे की प्रतीक्षा कर रहे थे?.
उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ,हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के लाखों कारसेवकों को मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा समारोह मे शामिल होने से वंचित रखा गया और उन्हें प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण भी नहीं दिया गया? अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को आयोजित रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुआ, रामलला अपने भव्य निर्माणाधीन राम मंदिर में विराजित हुए हैं.टेंट से लेकर भव्य निर्माणाधीन मंदिर तक पहुंचने में बहुत लोगों ने संघर्ष किया है .संघर्ष में सहारनपुर,वाराणसी,चित्रकूट, नासिक, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद, जबलपुर, के लोगों का सबसे बडा योगदान रहा है .समाजसेवी राजेंद्र अटल जिनकी अगुवाई में 650 कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे और वहां पर रामलला का पालन रखा था.राजेंद्र अटल ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 22 जनवरी को लाखों राजनेताओं ने अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए ? प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे उपस्थित अधिकांश राजनेतागण शुद्धशाकाहारी और निरव्यसनी नहीं थे? उनकी प्रमुखता में
.प्रभु श्री राम को मंदिर घर में विराजमान कर दिया गया.यह सभी देशवासियों के लिए बहुत बड़ी खुशी की बात थी और कार सेवकों के लिए इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है.राजेंद्र अटल ने उस दौर की याद को ताजा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने वहां रामलला की मूर्ति को टेंट में स्थापित किया था और इसके लिए उन्होंने अपने संघर्ष को भी याद किया है.
ज्ञातव्य है कि रामशिला पूजन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जहां राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टियों के नेताओं को बुलावा भेजा जा गया था। वही जान जोखिम में डाल कर कारसेवा करने वाले लाखों राम भक्त बुलावे की प्रतीक्षा कर रहे थे.
*कारसेवकों ने लिखा ट्रस्ट को पत्र*
राजेंद्र अटल को अभी तक अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले श्री राम लला मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण नहीं मिला.राजेंद्र अटल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को पत्र लिखा था.जिसमें लिखा है कि 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में होने वाली घटना का जिक्र है.उसे समय सहारनपुर, गोरखपुर, पटना नवादा और वाराणसी की टीम का क्या रोल था इसका भी जिक्र किया गया है.लास्ट में लिखा गया है कि कार्यक्रमों में मुख्य भूमिका निर्वाह करने वाले कार सेवकों को कभी भी आमंत्रित नहीं किया गया है.मंदिर के उद्घाटन समारोह में विशेष अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित करने की कृपा करना चाहिए, प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कारसेवकों में उत्साह
समाजसेवी टेकराम सनोडिया,राजेंद्र अटल, गुरुप्रसाद दुबे ,अमरचंद कुशवाहा और अमरीश गोस्वामी का कहना है, कि 6 दिसंबर 1992 की यह घटना इतिहास में दर्ज हुई और अब 22 जनवरी 2024 का दिन इतिहास में दर्ज होने वाला है।
राजेंद्र अटल ने कहा 9 दिसंबर 2019 का वह सुनहरे अक्षरों में दर्ज हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाकर हिंदुओं की आस्थाओं पर चंदन का टीका लगाया.श्री राम मंदिर बनने में 500 साल लग गए.काफी उत्साह है जब कार सेवा के लिए गए थे.अब मंदिर में पूजा अर्चना करने जाने वाले थे! परंतु उन्हे निमंत्रण आया ही नहीं? नतीजतन देश के लाखों करोडों नाराज कारसेवकों ने रामनगरी अयोध्या, चित्रकूट और नासिक लोकसभा चुनाव में कथित तामसी प्रवृति के भाजपा आलाकमान को बुरी तरह से पराजित करके खासा सबक सिखाया है?
रामभक्तों का मानना है कि राम मंदिर निर्माण ही भाजपा का एजेण्डा रहा है? जबकि श्रीराम आचरण- राम चरित्र और श्रीराम का अनुसरण और अनुकरण से भाजपा को कोई लेना देना नहीं है। नतीजतन देवभूमि बद्रीनाथ मे भी भाजपा को खासी सिकस्त झेलनी पड़ है?
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