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बिना अनुमती के 5 जुलाई को ठाकरे की संयुक्त रैली : होगी पुलिस कार्रवाई

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बिना अनुमती के 5 जुलाई को ठाकरे की संयुक्त रैली : होगी पुलिस कार्रवाई

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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मुंबई। बिना अनुमती के पहले 5 जुलाई को यह कार्यक्रम हिंदी अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन के लिए रखा गया था लेकिन महायुति सरकार ने 29 जून को त्रि- भाषा नीति के संबंध में दिए आदेश को वापस ले लिया था.

महाराष्ट्र में हिंदी अनिवार्यता के मुद्दे पर महायुति सरकार को पीछे धकेलने के बाद अब सभी की नजरें राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की संयुक्त रैली पर टिक गई हैं. शिवसेना (यूबीटी) ने इसे विजय दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान कर दिया है. जिसकी तैयारी फिलहाल मुंबई में जोर-शोर से शुरू है.

मुंबई के वर्ली डोम सभागार में भव्य तैयारियां की जा रही हैं. पहले पांच जुलाई को यह कार्यक्रम हिंदी अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन के लिए रखा गया था लेकिन देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार ने मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले रविवार (29 जून) को स्कूलों में त्रि-भाषा नीति के संबंध में दिए गए आदेश को वापस ले लिया था. इसके बाद उद्धव ठाकरे ने इस कार्यक्रम को यथावत रखते हुए इसे विजय रैली का नाम दे दिया था.

5 जुलाई को मराठी विजय दिवस रैली होना तय है

इस विजय रैली के लिए दोनों ठाकरे भाइयों की तरफ से संयुक्त निमंत्रण भेजा गया है. मराठी विजय दिवस का कार्यक्रम एनएससीआई डोम में 5 जुलाई को सुबह 10 बजे शुरू होगा. इसमें कुछ विपक्षी दलों के नेता भी पहुंच सकते हैं, हालांकि पुलिस ने अभी तक इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है.

रैली को लेकर MNS और उद्धव गुट के नेताओं की बैठक

इस विजय रैली की तैयारी को लेकर हाल ही में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के नेता और ठाकरे गुट के नेताओं की बैठक हुई है. इस बैठक में विजय दिवस के कार्यक्रम को बड़े धूम धाम से मनाने की तैयारी की गई है. पूरे महाराष्ट्र से इस विजय दिवस के कार्यक्रम के लिए लोग आने वाले है. शरद पवार की एनसीपी (SP) के अलावा महाराष्ट्र में मराठी भाषा और वहां की संस्कृति के लिए काम करने वाली कई सामाजिक संस्था और संगठन इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे.

मनसे के वरिष्ठ नेताबाला नांदगावकर, संदीप देशपांडे, नितिन सरदेसाई और उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता विधायक अनिल परब इन सभी नेताओं ने वरली में जिस सभागृह में कार्यक्रम होनेवाला है वहां की तैयारियों का जायजा भी लिया है. बता दें कि लगभग बीस साल बाद दोनों ठाकरे भाई पहली बार एक ही मुद्दे को लेकर एक ही मंच पर दिखाई देंगे.

राज और उद्धव ठाकरे के भाषण पर टिकेंगी नजरें!

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के भाषण पर सबकी नजरे रहने वाली है क्योंकि हिंदी भाषा अनिवार्य किए जाने के मुद्दे को लेकर ये दोनों ठाकरे भाई एक साथ आए लेकिन क्या आनेवाले स्थानीय निगम चुनाव के लिये भी ये दोनों भाई साथ देखेंगे? खासकर मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में दोनों ठाकरे भाई एक साथ आयेंगे? जिस तरह से दोनों पार्टियों की हालत है उससे उबरने के लिये और ठाकरे ब्रांड बचाने के लिए क्या ये विजय समारोह का कार्यक्रम एक नींव का पत्थर साबित होगा? इन सवालों के जवाब कुछ ही दिनों में मिल जाएंगे

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