लव जेहादियों का लिंग काटने या फांसी सजा दिलाने की मांग
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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नई दिल्ली। भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में ‘लव जिहाद’ के मामलों बढ रहे हैं.लव जेहाद के दोषियों के लिए सख्त सजा की मांग समय-समय पर विभिन्न संगठनों और नेताओं द्वारा की जाती रही है। वर्तमान कानूनी स्थिति और हालिया मांगों का विवरण नीचे दिया गया है:
सजा को लेकर हालिया मांगें और सिर्फ घोषणाएं की जाती रही है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है.दरअसल मे रिपोर्ट के अधार पर जेहादियों को पुलिस गिरफ्तार करती और कोर्ट के माध्यम से उसे जेल हिरासत में भेज दिया जाता है.बाद मे वह गवाह और सबूत के अभाव मे अपराधी बाईज्जत बरी हो जाता है? हालकि मध्यप्रदेश की राज्य सरकार ने जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ के मामलों में फांसी (मृत्युदंड) का प्रावधान लाने की योजना बना रही है। उनका कहना है कि जिस तरह नाबालिगों से दुष्कर्म के लिए फांसी की सजा है, उसी तर्ज पर बेटियों के साथ धोखाधड़ी और धर्मांतरण करने वालों को भी मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।दरअसल मे लव जेहादी हिन्दू लडकियों को विभिन्न तरीके से लालच प्रलोभन देकर मोहजाल में ध्यानाकर्षित करते है.य अच्छी खासी नौकरी दिलाने के नाम पर दिल्ली मुंबई सूरत पटना रांची लखनऊ घुमाने ले जाते हैं और भोली भारी खूबसूरत लडकियों को कामातुर बनाते हैं.और बाद में उसके साथ अनैतिक शारीरिक संबंध बनाते है.और धर्म बदलने के लिए दबाव बनाते हैं.एसे लव जेहाद मे लिप्त लोगों पर कठोर दंड की मांग की जा रही है. बजरंग दल और अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद जैसे कई संगठन ‘लव जिहाद’ के मामलों में दोषियों के लिए मृत्युदंड और उम्रकैद जैसे कड़े कानूनों की मांग कर चुके हैं। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी समय-समय पर अंग-भंग या फांसी जैसे कठोर दंड की मांग उठती रही है।
वर्तमान कानूनी प्रावधान
भारत के कई राज्यों में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं, जिन्हें बोलचाल में ‘लव जिहाद’ कानून कहा जाता है:
यहां उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के तहत नाम और धर्म छिपाकर शादी करने या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत वर्तमान में अधिकतम 10 साल तक की जेल और जुर्माने की व्यवस्था है।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी तरह के कानून मौजूद हैं, जिनमें जबरन धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध माना गया है।
कानूनी और सामाजिक स्थिति
बरेली की एक अदालत ने हाल ही में ‘लव जिहाद’ को एक बड़ी साजिश बताते हुए अपराधी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कई कानूनी जानकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन सख्त कानूनों की संवैधानिकता पर सवाल उठाए हैं, उनका तर्क है कि ये व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन कर सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार, इन कानूनों के तहत दर्ज कई मामलों में सबूतों की कमी या गवाहों के पलटने के कारण आरोपी बरी भी हुए हैं।
लव जिहाद करने वालो को फाँसी की सजा मिलना ही चाहिए.
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