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ट्रेंड बदलेगा या इस बार भी 81 सीटों पर रहेगा BJP-कांग्रेस का कब्जा : EVM में कैद हो गई किस्मत

ट्रेंड बदलेगा या इस बार भी 81 सीटों पर रहेगा BJP-कांग्रेस का कब्जा, आज EVM में कैद हो गई किस्मत

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

जयपुर । राजस्थान की 60 सीटों पर भाजपा और 21 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। ये 81 सीटें इन दोनों पार्टियों का गढ़ मानी जाती हैं। क्या इस बार मतदाता परंपरा बदलेंगे या रिवाज कायम रहेगा। जानिए, इस रिपोर्ट में..
राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए आज 199 सीटों पर मतदान हो रहा है। प्रदेश के 5 करोड़ 29 लाख 31 हजार 152 मतदाता नई सरकार चुनने के लिए वोट कर रहे हैं। वोटिंग प्रदेश की 199 सीटों पर विधायक चुनने के लिए हो रही है, लेकिन आंकड़ों के पर गौर करें तो 81 सीटों की तस्वीर पहले से ही साफ दिख रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रदेश की 60 सीटों पर भाजपा और 21 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा माना जा रहा है। ये 81 सीटें भाजपा और कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। ऐसे में मुकाबला बाकी बचीं 119 सीटों पर हो रहा है।

कांग्रेस का 21 सीटों पर कब्जा
सत्ताधारी दल कांग्रेस की बात करें तो लगातार पांच बार जोधपुर की सरदारपुरा सीट कांग्रेस के खाते में गई है। बाड़ी में पिछले चार चुनाव में कांग्रेस का कब्जा है। बागीदौरा, सपोटरा, फतेहपुर, बाड़मेर और गुढ़ामालानी सीट पर कांग्रेस पिछले तीन चुनाव से जीत दर्ज कर रही है। चित्तौड़गढ़, कोटपूतली, डीग-कुमेर, सांचौर, बड़ी सादड़ी और सरदारशहर समेत 21 सीटों ऐसी हैं जहां कांग्रेस को पिछले दो चुनाव से लगातार जीत मिली है।

ये सीटें रही हैं भाजपा का गढ़

भाजपा की जीत का आंकड़ा देखें तो बाली में छह और पाली में पिछले पांच चुनाव से लगातार कमल खिल रहा है। उदयपुर, झालरापाटन, लाडपुरा, राजगंजमंडी, भीलवाड़ा, सोजत, खानपुर, सांगानेर, ब्यावर, फुलेरा, नागौर, रेवदर और राजसमंद में लगातार चार बार जीत दर्ज की है। बूंदी, कोटा साउथ, अजमेर नार्थ, अजमेर साउथ, सूरसागर, भीनमाल, विद्याधर नगर, मालवीय नगर, रतनगढ़, सिवाना, बीकानेर ईस्ट, अलवर सिटी और आसींद में भाजपा ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है। इन्हें जोड़कर 60 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा लगातार चुनाव जीत रही है।

इस सीटों पर भी भाजपा और कांग्रेस को जीत का बेसब्री से इंतजार है
उदयपुर विधानसभा सीट पर 25 साल से कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। 1985 और 1998 में पार्टी के हर उम्मीदवार को यहां हार का सामना करना पड़ा है।
बस्सी विधानसभा सीट से 1985 में आखिरी बार कांग्रेस प्रत्याशी को जीत मिली थी। 38 साल में कांग्रेस का यहां खाता नहीं खुला है। भाजपा भी पिछले तीन चुनाव से यहां कमल नहीं खिला पाई है। निर्दलीय उम्मीदवार यहां से चुनाव जीतकर विधायक बन रहा है। इस बार भाजपा ने पूर्व आईएएस चंद्रमोहन मीणा और कांग्रेस के पूर्व आईपीएस लक्ष्मण मीणा को चुनावी मैदान में उतारा है।
सांगानेर सीट से 1998 के चुनाव में कांग्रेस की इंदिरा मायाराम जीत दर्ज करने वाली आखिरी उम्मीदवार थीं। 25 साल से यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। भाजपा के भजन लाल शर्मा और कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।
रतनगढ़ सीट से कांग्रेस के जयदेव प्रसाद इंदौरिया 1998 में आखिरी बार जीते थे। इसके बाद से यहां के मतदाताओं ने कांग्रेस का रुख नहीं किया है। कांग्रेस के पूसाराम गोदारा का इस बार भाजपा के अभिनेश महर्षि से मुकाबला है।
सिवाना सीट पर 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के गोपाराम मेघवाल ने आखिरी बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद से यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुला। इस बार भाजपा के हम्मीर सिंह भायल की कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह से टक्कर हो रही है।
फतेहपुर सीट पर 1993 में भाजपा के भंवरलाल आखिरी बार चुनाव जीते थे। इसके बाद से भाजपा अब तक यहां कब्जा नहीं जमा पाई है। इस चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर श्रवण चौधरी को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी हाकम अली पर दांव लगाया है।
कोटपूतली सीट पर भाजपा को कमल खिलने का इंतजार है। 1998 के चुनाव में भाजपा से प्रत्याशी रहे रघुवीर सिंह ने यहां आखिरी बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद से बीजेपी की यहां वापसी नहीं हुई है। भाजपा ने इस बार हंसराज पटेल गुर्जर पर दांव लगाया है, जिन्हें के राजेंद्र सिंह यादव टक्कर दे रहे हैं।
वल्लभनगर सीट पर पिछले 20 साल से कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा यहां 2003 से जीत का इंतजार कर रही है। कांग्रेस ने कोरोना काल में जान गंवाने वाले गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति सिंह को यहां से टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने उदय लाल डांगी को टिकट दिया है

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