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हर खाते में आएंगे रुपये 15 लाख?अच्छा हुआ सवा सौ करोड मतदाताओं को मोदी ने सुनाया था जुमला ?

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हर खाते में आएंगे रुपये 15 लाख?अच्छा हुआ सवा सौ करोड मतदाताओं को मोदी ने सुनाया था जुमला ?

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:संपर्क:9822550220

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नई दिल्ली। बनावटी,झूठे,और मनगढंत अश्वासन देकर देश की सवा सौ करोड जनता-जनार्दन के साथ धोखाधडी बेईमानी झूठ छल कपट और विश्वासघात किया गया था? क्योंकि राजनीति में सब जायज है नाजायज कुछ भी नहीं है? क्योंकि देश के मूर्ख मतदाताओं जनता-जनार्दन को एसे ही जुमला सुनाकर असलियत से गुमराह करना पडता है? देश की जनता को जुमला सुनाने वाले माननीय PM श्री नरेन्द्र दामोदरदास जी मोदी ही भावी प्रधानमंत्री के लायक होना चाहिए? 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान माननीय मोदी जी ने 15 लाख रुपए का जिक्र किया था

फरवरी 2015 में अमित शाह ने भी कहा था कि ये एक जुमला था? क्योंकि अधिकांश भारतीय लालची और बेवकूप किस्म के होते है? ज्ञातव्य है कि विगत 3 अरसा पूर्व अंग्रेजों की इस्ट इंडिया कंपनी ने भी इसी तरह तत्कालीन लोभी और लालची प्रवृति के भारतीयों को मूर्ख बनाकर गुलामी की जंजीरों मे जकड लिया था?

इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि हर खाते में 15 लाख रुपए जमा होने के नरेंद्र मोदी के वादे को पूरा करने की तारीख बताना सूचना का अधिकार कानून के तहत ‘सूचना’ के दायरे में नहीं आता। लिहाजा, इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। पीएमओ ने केंद्रीय सूचना आयोग को यह जानकारी दी है।

– यह मामला एक आरटीआई अर्जी से जुड़ा है। अर्जी लगाने वाले मोहन कुमार ने नोटबंदी लागू होने के 18 दिन बाद 26 नवंबर 2016 को पीएमओ से यह जानकारी मांगी थी कि हर खाते में 15 लाख रुपए देने का मोदी का वादा कब पूरा होगा। जवाब नहीं मिलने पर मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा।

– मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर ने कहा कि अर्जी लगाने वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री कार्यालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पूरी जानकारी नहीं दी।

– आयोग के मुताबिक, पीएमओ ने कहा कि 15 लाख रुपए जमा करने की तारीख क्या होगी और नोटबंदी लागू होने की जानकारी प्रिंट मीडिया तक पहले कैसे पहुंची, इन दोनों के बारे में जानकारी आरटीआई एक्ट की धारा 2(f) के तहत सूचना के दायरे में नहीं आती।

क्या है धारा 2(f)?

– आरटीआई एक्ट की इस धारा के तहत सूचना का मतलब ऐसे रिकॉर्ड, दस्तावेज, मेमो, ई-मेल, विचार, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, सर्कुलर, ऑर्डर, लॉगबुक, अनुबंध, कागजात, मॉडल्स, डेटा आदि से है जो इलेक्ट्रॉनिक या किसी भी स्वरूप में मौजूद हो और जिसका लोक अधिकारी इस्तेमाल करते हों। प्रधान मंत्री नरेंद मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान 15 लाख का रुपए हर नागरिकों के खाते मे डालने का जिक्र किया था

मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक रैली में कहा था, ‘‘हमारा चोरी किया हुआ पैसा वापस आना चाहिए या नहीं? क्या कालाधन वापस नहीं आना चाहिए? चाेर-लुटेरों से एक-एक रुपया वापस लेना चाहिए या नहीं? इन रुपयों पर जनता का अधिकार है या नहीं? ये रुपया जनता के काम नहीं आना चाहिए या नहीं? ये जो चाेर-लुटेरों के पैसे विदेशी बैंकों में जमा हैं ना, वो अगर ले आए तो देश के गरीब आदमी को मुफ्त में 15-20 लाख रुपए यूं ही मिल जाएंगे।

दिसंबर 2016: मोदी ने कहा था- जनधन खातों में जिन्होंने बेहिसाब पैसा डाला, उनका रुपया गरीब को मिलेगा

– मोदी ने खातों में पैसे पहुंचने का एक और बार जिक्र नाेटबंदी के बाद किया था। मुरादाबाद में एक रैली में उन्होंने कहा था- ‘‘मैं दिमाग लगा रहा हूं। गरीब के खातों में जिन लोगों ने पैसा डाला है, वह जेल में जाएगा और वह रुपया गरीब के घर जाएगा। लेकिन जिसने भी आपके जनधन खाते में पैसा डाला है, वह उठाइए मत।’’

– तब मोदी का यह बयान इसलिए मायने रखता था क्योंकि नोटबंदी के बाद 25 करोड़ जनधन खातों में 21 हजार करोड़ रुपए जमा हो गए थे।

फरवरी 2015 में अमित शाह नेPM मोदी के नारे को जुमला बताया था

– अमित शाह ने 5 फरवरी 2015 को कहा था- ”हर परिवार के खाते में 15-15 लाख जमा करने की बात जुमला है। भाषण में वजन डालने के लिए यह बात बोली गई थी यह जानकरी देने वाले जागरूक नागरिकों ने भूल-चूक के लिए माफी मांगी है। ताकि संभावित सरकारी अन्याय और अत्याचार से निजात पाया जा सके?

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