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सड़क व भवन निर्माता कंपनियों ने बिना परमिशन के हीं खुदाई करवा दी नागपूर के सुरादेवी की पहाडी? सरकार को करोडों की चपत

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सड़क व भवन निर्माता कंपनियों ने बिना परमिशन के हीं खुदाई करवा दी नागपूर के सुरादेवी की पहाडी? सरकार को करोडों की चपत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नागपुर । बिना मिलिट्री और माइनिंग परमिशन के हीं टू टेंन से खुदाई कर डाली रक्षा संपदा विभाग और राजस्व विभाग का पहाडों के गहरे गड्ढों में मवेशियों के मरने का खतरा बढ चुका है।

कोराडी, कामठी और नागपुर से आएं सड़क ठेकेदारों ने बिना अनुमति के हीं हजारों डम्फर मूरम सुरादेवी पहाड़ी से मशीन लगाकर खुदवा डाली। हालकि ग्रामीणों को इसकी पूरी तरह भनक है? परंतु इसके खिलाफ कोई भी आबाज उठाने को तैयार नहीं है। ठेकेदार ने भोले भाले ग्रामीणों को कहा कि मेरे पास निजी भूमि से मूरम खोदने कि परमिशन है वही माइनिंग विभाग का कहना है कि हमने किसी को भी परमिशन नहीं दी है जिसके कारण माइनिंग विभाग को हीं करोड़ो का नुकसान,हो रहा है। बताते हैं कि राजस्व भूमि खनन माफिया कंपनी प्रबंधन अपनी मूछों पर ताव देकर कहते हैं कि संबंधित विभाग के राजनेता मंत्रियों और अधिकारी उनकी जेब में है? करोडों रुपए का चंदा राजनेताओं और अधिकारियों को भरपेट यानी मनो अनुकूल रिश्वत जो मिल जाती हैं? इसलिए स्थानीय ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत की चुप्पी विभिन्न संदेह को जन्म देती है? ये राजस्व भूमि अवैध खनन माफिया तत्कालीन कांग्रेस सरकार के पाले हुए हैं? जो सत्ता बदलते ही गिरगिट की तरह अपना रंग बदलकर वर्तमान सत्ताखोरों से सांठ-गांठ कर सरकार को बदनाम करने में अग्रसर दिखाई दे रहें है?

 

वही परिणामत: प्रशासनिक व्ययवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खडे हो रहें है कि दिन दहाड़े हीं सुनाएगी की पहाड भूमि का कतले आम कर अंधा जेसीबी और पोकलेन मशीन के द्वारा मूरम कि खुदाई कि जा रही है वही राजस्व से लेकर माइनिंग विभाग तक किसी कि भी नजर सड़क ठेकेदार पर पड़ रही है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध मूरम का काम कितने जोरो से चल रहा है |

 

वही ठेकेदार के द्वारा लगभग सड़कों कि पूराई अवैध मूरम के द्वारा कि जा चुकी है | वही सड़क ठेकेदार का रुतबा ऐसा है कि वहा मशीन के द्वारा पहले पहाड़ों को चेक कर्ता है कि कहा से मूरम ज्यादा निकल पायेगी और पत्थर कहा से निकलेगे इसकी बानगी ठेकेदार द्वारा पहाड़ों के चारों और देखते हीं बनती है कि जहा ठेकेदार का मन हुआ वहा खुदाई कर ली और यदि मूरम नहीं निकली तो उसको वैसे हीं छोड दिया इसके बकायदा सबूत हनुमान मंदिर के पीछे देखने को मिलते है |

 

राजस्व खनिज माफिया कंपनी ठेकेदार का कहना रहता है कि हमारे पास मूरम खोदने का परमिशन है | और हम कही से भी खोद सकते हूँ हमें किसी से पूछना नहीं पड़ता है वही हरे भरे पेड़ों को काटने पर ज़ब पूछा जाता है तो ठेकेदार कहता है पेड़ फिर उग जायेंगे लेकिन सड़क नहीं बन पायेगी |

 

इस संबंध मे कामठी तहसील के राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार चुप्पी साधे हुए मौन हैं। मिलिट्री और राजस्व विभाग की तरफ से ठेकेदार द्वारा किसी भी प्रकार की मूरम और पत्थर खोदने की अनुमति नहीं ली गई है वही माइनिंग कि जांच का विषय है इसलिए हमने कोई जांच नहीं कि है।

नागपुर जिला खनिज सम्पदा विभाग की माने तो कामठी तहसील अंतर्गत सुरादेवी की 50% पहाड राजस्व विभाग तथा 50% रक्षा संपदा विभाग के आधीन आता है? और रक्षा संपदा विभाग और राजस्व विभाग की बिना अनुमति के करोडों रुपए कीमत की मुरुम की अवैध खनन करके चोरी और स्मगलिंग करवा दिया गया है।

बताते हैं कि अवैध मूरम खनन माफिया और सडक-भवन निर्माता कंपनियों को स्थानीय जिला परिषद, पंचायत, विधायक और सांसद सदस्यों का वरद-हस्त होने के कारण नागपुर जिले में अवैध राजस्व चोरी और तस्करी जमकर शुरु है? और खनिज संपदा राजस्व विभाग चुप्पी साधे मौन बैठा है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्य मंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मामले की संपूर्ण जांच-पड़ताल और दोषियों पर कठोर कारवाई की मांग की गई है।

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