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जानिए इस दिन की वट सावित्री पूर्णिमा पूजा विधान

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जानिए इस दिन की वट सावित्री पूर्णिमा पूजा विधान

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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जानिए इस दिन की पूजा विधि…वट सावित्री पूर्णिमा व्रत आज ज्येष्ठ माह में वट सावित्री व्रत रखा जाता है. कुछ जगहों पर यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रखा जाता है तो कुछ जगहों पर यह पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है. इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र की कामना से वट सावित्री व्रत को रखती हैं. इस व्रत को सुहागिन स्त्रियां रखती हैं. बीती 6 जून को वट सावित्री अमावस्या व्रत को रखा गया था.इब वट सावित्री पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा.

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 21 जून की सुबह 7 बजकर 31 पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 22 जून की सुबह 6 बजकर 37 पर होगा. यह पूजन अभिजीत मुहूर्त में किया जाता है. इस कारण यह व्रत 21 जून दिन शुक्रवार को ही रखा जाना चाहिए. इस दिन शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है. शुभ योग शाम 6 बजकर 40 तक रहेगा और इसके बाद शुक्ल योग शुरू हो जाएगा. अविवाहित महिलाएं भी इस व्रत को मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रख सकती हैं.

 

वट सावित्री व्रत पूजा विधि

वट पूर्णिमा के दिन विवाहित महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं. इस दिन जल्दी सोकर उठें. इसके बाद लाल रंग के वस्त्र पहनें. इसके बाद सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करें. इसके बाद कच्चा सूत, जल से भरा हुआ कलश , हल्दी, कुमकुम, फूल और फल लेकर वट वृक्ष के नीचे जाएं. वृक्ष पर जल अर्पित करें. इसके बाद देशी घी का दीपक जलाएं. पेड़ के चारों ओर धागा लपेटते हुए परिक्रमा करें. अंत में सावित्री की कथा का पाठ करें. अंत में आरती करें. भगवान का आशीर्वाद लें और पति की लंबी उम्र की कामना करें

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