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जानिए, जंंगल खेती में पाए जाने वाली चेच भाजी खाने के फायदे

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जानिए, जंंगल खेती में पाए जाने वाली चेच भाजी खाने के फायदे

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की जंगल खेती मे पाए जाने वाली चेच भाजी खाने से शरीर मे अत्यधिक फायदे मिलते हैं.इससे पेट साफ होता है और भूख बढ़ती है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। यह फाइबर से भरपूर होती है और शरीर को ठंडा रखने में सहायक है। इसमें मौजूद खनिज और विटामिन विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, जैसे आँखों की रोशनी में सुधार, खून की कमी को दूर करना और शरीर की सूजन को कम करना। चेच भाजी फाइबर से भरपूर होती है, जो पेट को साफ करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करती है।

यह भूख बढ़ाने में सक्षम होती है, जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन ए और सी आँखों की रोशनी के लिए फायदेमंद हैं।गुमी भाजी, जिसे द्रोण भाजी भी कहा जाता है, सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में उपयोगी हो सकती है।

चेच भाजी शरीर को ठंडा रखने का काम करती है।

खून की कमी दूर करना:

इसमें मौजूद आयरन रक्त की कमी (एनीमिया) को दूर करने में सहायक है। चेच भाजी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – लाल चेच और सफेद चेच, जिनमें लाल चेच को तल कर खाया जाता है और सफेद को खट्टी सब्जी के रूप में तैयार किया जाता है। इसमें विटामिन ए, सी, आयरन और अन्य खनिज पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं।छत्तीसगढ़ के लोग इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी के रूप में खाते हैं।

बालाघाट जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. यहां पर करीब 53 प्रतिशत भूभाग वन है. ऐसे में वन आधारित सब्जी-भाजी सहित कई कुदरती चीजें बालाघाट में वरदान की तरह हैं. इन्हीं में से एक है चेच भाजी. बारिश में ये भाजी खूब उगती है. इसकी पहचान आदिवासियों को खूब होती है. आपने शायद ही इस भाजी का नाम और इसके फायदे के बारे में सुना होगा. ऐसा इसलिए, क्योंकि यह बालाघाट के जंगल में ही पाई जाती है. कान्हा नेशनल पार्क के पास में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग चेच भाजी को उगाते हैं.

बारिश के दिनों में बनती है

खुर्सीपार निवासी लक्ष्मण अर्मो बताते हैं कि इसे बारिश के दिनों में भाजी के रूप में बनाते हैं. इसके लिए सबसे पहले इसे उबालते हैं. इसके बाद आम की खटाई और नमक, मिर्च, हल्दी डाल कर इसे पकाया जाता है. फिर ये भाजी बिना किसी ज्यादा मसाले के तैयार हो जाती है. इसे बनाने का प्रोसेस बेहद आसान है. बारिश के दिनों में यह आदिवासियों के खान पान का अहम हिस्सा है. इसे रोटी या चावल के साथ बड़े ही चाव से खाया जाता है.

गर्मी में सुखाकर बनाते हैं

लक्ष्मण ने बताया, जब चेच भाजी मुलायम होती है, तब इसे भाजी के तौर पर बनाया जाता है. लेकिन, जैसे-जैसे इसकी पत्तियां जठर होती जाती हैं, तब इस तोड़ा जाता है. इसे सुखाया जाता है. इसके बाद इसे ठंड में नहीं खाया जाता. गर्मी के लिए संरक्षित किया जाता है. वहीं, गर्मी में इसे दाल के साथ बनाया जाता है. यह भी खाने में स्वादिष्ट होती है.खर्च ज़ीरो, कमाई भारी! चलते-फिरते कमाई

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मिनरल्स और प्रोटीन से भरपूर

प्रति 100 ग्राम खाने योग्य पत्तियों में 81.4 ग्राम पानी, खनिज 2.7 ग्राम, 5.1 ग्राम प्रोटीन, कैल्शियम 241 मिग्रा एवं फास्फोरस 83 मिग्रा पाया जाता है. वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सब्जी गर्मी में पेट साफ करने के साथ-साथ भूख बढ़ाने में भी सक्षम है. आयुर्वेद भी इसकी ताकत को मानता है. ये भाजी पेट के लिए रामबाण है. इसके सेवन से पेट साफ रहता है.

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित है. अधिक जानकारी के लिए असली चेच भाजी को जानने और पहचानने के लिए कृषि विशेषज्ञ से सलाह अनिवार्य है.

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