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सिंधु जल संधि पाकिस्तान में हलचल तेज:बांध निर्माण की समीक्षा शुरु

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सिंधु जल संधि पाकिस्तान में हलचल तेज:बांध निर्माण की समीक्षा शुरु

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

नई दिल्ली। भारत सरकार ने चिनाब नदी पर चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के सख्त आदेश दिए हैं। इस दौरान अधिकारियों से कहा गया है कि वे दिसंबर 2026 तक पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को हर हाल में शुरू करेंगे। सरकार की तरफ से कहा गया है कि मार्च 2028 तक क्वार प्रोजेक्ट को पूरा किया जाए।

पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहे भारत के नये बांध की समीक्षा शुरू कर दी है। दरअसल, भारत ने चिनाब नदी पर सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के टॉप सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने दावा किया है कि पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत के नए डैम का रिव्यू कर रहा है। भारत का ये प्रोजेक्ट करीब 5,129 करोड़ रुपये का है। मोदी सरकार ने पिछले साल जब सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था, उसके बाद मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी।

भारत के चिनाब नदी बांध को लेकर पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट जा सकता है.

पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट को अपने खेतों की सिंचाई और खेती किसानी के लिए खतरा मान रहा है। न्यूज 18 की ही रिपोर्ट में पिछले महीने कहा गया था कि केन्द्र सरकार ने चिनाब नदी पर चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के सख्त आदेश दिए हैं। इस दौरान अधिकारियों से कहा गया है कि वे दिसंबर 2026 तक पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को हर हाल में शुरू करेंगे। सरकार की तरफ से कहा गया है कि मार्च 2028 तक क्वार प्रोजेक्ट को पूरा किया जाए और रणनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील रतले डैम पर भी निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।

चिनाब नदी पर भारत के नए बांध की समीक्षा कर रहा पाकिस्तान

भारत ने जब से सिंधु जल संथि को सस्पेंड किया है, उसके बाद से ही पाकिस्तान ने कई बार धमकियां दी हैं। पाकिस्तान, परमाणु जंग की गीदड़भभकी भी दे चुका है। लेकिन अब जब भारत ने प्रोजेक्ट को गंभीरता के साथ और तेजी से शुरू कर दिया है तो पाकिस्तान वाकई डर गया है। ये बांध, पाकिस्तान की खेती को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। संधि को सस्पेंड करने के बाद से भारत अब चिनाब नदी पर नए या मौजूदा प्रोजेक्ट्स के लिए पाकिस्तान के साथ डेटा-शेयरिंग या पहले से जानकारी देने की जरूरतों को नहीं मान रहा है। भारत, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसलों को भी खारिज कर चुका है। भारत ने इसे ‘गैर-कानूनी’ कहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।

पाकिस्तान के पास चिनाब नदी को लेकर क्या प्लान हो सकता है?

आपको बता दें कि चिनाब नदी, सिंधु बेसिन का हिस्सा है और पाकिस्तान के लिए इसे लाइफलाइन माना जाता है। पाकिस्तान का लगभग तीन-चौथाई पानी, पश्चिमी नदियों से आता है जो भारत से पाकिस्तान में बहती हैं। पाकिस्तान अपने 90 प्रतिशत से ज्यादा खेती के लिए इसी बांध पर निर्भर रहता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के डैम और नहरों का लगभग पूरा नेटवर्क इसी के आस-पास बनाया गया है। पाकिस्तान के दस में से नौ नागरिक, उस पानी पर निर्भर हैं जो पहले भारतीय इलाके से होकर बहता है। न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि “पाकिस्तान के डिपार्टमेंट जैसे इंडस वॉटर कमिश्नर ऑफिस, पाकिस्तान वॉटर रिसोर्स मिनिस्ट्री, विदेश मंत्रालय, अटॉर्नी जनरल ऑफिस और दूसरे संबंधित डिपार्टमेंट इस प्रोजेक्ट की स्टडी कर रहे हैं।”

खुफिया सूत्रों ने बताया है कि “एक मिली-जुली और पूरी रिपोर्ट जल्द ही प्रधानमंत्री ऑफिस को भेजा जाएगा।” सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया है कि “अधिकारी, पाकिस्तान के डैम और डी-वाटरिंग से निपटने के लिए कई ऑप्शन पर भी काम कर रहे हैं।” पाकिस्तान भारत को चुनौती देने के लिए सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। सूत्रों ने कहा है कि वह एक पॉलिसी स्टेटमेंट जारी करेगा और जल्द ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और दूसरे इंटरनेशनल मंचों पर भारत के नए डैम प्रोजेक्ट को चुनौती दे सकता है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया समूह को बताया है कि “यह हमारी जानकारी में है और हम जल्द ही और डिटेल्स के साथ जवाब देंगे।” सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही इंटरनेशनल फोरम पर सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने के भारत के फैसले को चुनौती दे चुका है।

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