न डीजे, न शोर-शराबा, दफ्तर बना मंडप में सादगी से रचाई शादी
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
अलवर। राजस्थान के अलवर जिले के दो आईएएस अधिकारी ने बिना किसी बैंड-बारात के सरकारी दफ्तर में सादगी भरी शादी रचाई. दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2023 बैच से हैं.
राजस्थान में दो आईएएस अधिकारियों ने पारंपरिक धूमधाम से आगे बढ़कर सादगी भरा विवाह करने का फैसला लिया. बिना बैंड-बाजे और बारात के, बेहद सीमित दायरे में संपन्न हुआ यह विवाह अब चर्चा का विषय बना हुआ है. 2023 बैच के दो अधिकारियों ने बुधवार को अलवर जिला कलेक्टर कार्यालय में एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और विवाह के बंधन में बंध गए. यह विवाह समारोह केवल उनके करीबी परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में, बिना किसी धूमधाम या भव्यता के संपन्न हुआ. दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2023 बैच से हैं.
मिनी सचिवालय में शादी
आईएएस अधिकारी माधव भारद्वाज इस समय राजस्थान के अलवर में उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) हैं, वहीं, दूसरी तरफ अदिति वास्ने गुजरात के जामनगर में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं. दोनों ने राजस्थान के अलवर मिनी सचिवालय में शादी की रस्में पूरी कीं.
दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे को पहनाया माला
इसमें नहीं तो बैंड था, न गाना-बजाना और न ही भव्य जुलूस. समारोह बिना किसी सोसा(डिजे-शोर) के संपन्न हुआ. दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को माला पहनाकर अलवर जिला कलेक्टर डॉ. आर्टिका शुक्ला के समक्ष अपने विवाह को पंजीकृत कराया. इस दौरान दोनों अधिकारियों के माता-पिता और भाई-बहन मौजूद थे.
पहली मुलाकात ट्रेनिंग के दौरान हुई
इन दोनों अधिकारियों की पहली मुलाकात आईएएस ट्रेनिंग के दौरान हुई थी. समय के साथ, उन्होंने शादी करने और साथ में जीवन बिताने का निर्णय लिया. इस अवसर पर मिनी सचिवालय के कई अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे. माधव मसूरी के राजकुमार भारद्वाज के पुत्र हैं और वर्तमान में अलवर में कार्यरत हैं. उनकी पत्नी अदिति उत्तर प्रदेश के बरेली की हैं. उनके पिता एक व्यापारी हैं.
मंदिर में पारंपरिक हिंदू विवाह का फैसला
आगे दंपति ने बताया कि वे अपनी शादी का पंजीकरण कराने के बाद किसी शुभ तिथि को देखकर मंदिर में पारंपरिक हिंदू विवाह करने का फैसला लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि यह समारोह सादा होगा और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्य ही उपस्थित होंगे.
पारंपरिक रस्मों के बिना विवाह पूर्ण नहीं
उन्होंने कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, पवित्र अग्नि फेरा और पारंपरिक रस्मों के बिना विवाह पूर्ण नहीं माना जाता है. इसलिए, वे आने वाले दिनों में अपने परिवार की मौजूदगी में धार्मिक समारोहों को पूरा करने की प्लानिंग करेंगे. इस अलवार की शादी ने सबका ध्यान अपनी और आकर्षित किया है
विश्वभारत News Website