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परमाणु बम से भी खतरनाक और शक्तिशाली है ‘ब्रह्मास्त्र’ : रोचक जानकारी

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नई दिल्ली : विज्ञान भवन मंत्रालय की माने तो क्या आप ब्रह्मास्त्र के बारे में आप जानना चाहते हैं. जब इतनी तादाद में सर्च हो ही रहा है, तो हम आपको आसान भाषा में बता देना चाहते हैं कि आखिर ब्रह्मास्त्र इतना ताकतवर क्यों है? और इसकी ताकत क्या वाकई परमाणु बम से ज्यादा है?

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*ब्रह्मास्त्र की उत्पत्ति कैसे हुई?*

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पौराणिक कथाओं और ग्रंथों के मानें तो ब्रह्मास्त्र की उत्पत्ति ब्रह्म ने की थी. इस अस्त्र को बनाने के पीछे ब्रह्मा जी का उद्देश्य था कि सृष्टि में सभी कार्य नियमपूर्वक होते रहे और नियंत्रण बना रहे. इसी विचार से ब्रह्मजी ने इस संहारक अस्त्र का निर्माण किया। इसकी मारक क्षमता अचूक है।
ब्रह्मास्त्र से क्या होता है?
ब्रह्मास्त्र एक बेहद खतरनाक और तबाही मचाने वाला अस्त्र है, इसी की तरह दो अन्य अस्त्रों का भी वर्णन शास्त्रों में मिलता है पहला ब्रह्मशीर्षास्त्र और दूसरा ब्रह्माण्डास्त्र. इनका भी निर्माण ब्रह्मा जी ने ही किया जाता है. ऐसे माना जाता है कि इनके प्रयोग से पृथ्वी नष्ट हो सकती है.
ब्रह्मास्त्र को विश्व का सबसे खतरनाक अस्त्र माना गया है. इसके विनाशक परिणामों की चर्चा पौराणिक कथाओं में मिलती है. कहते हैं कि ब्रह्मास्त्र यह अचूक तबाही मचाने वाला अस्त्र है. ये शत्रु का नाश करके ही रहता है. इससे शत्रु का बच पाना असंभव है. शास्त्रों में बताया गया है इस अस्त्र के विनाश को तभी टाला जा सकता है जब इसके प्रतिकार में दूसरे ब्रह्मास्त्र को छोड़ा जाए.
ब्रह्मास्त्र कौन चलाना आता था?
ग्रंथों की मानें तो रामायण और महाभारतकाल में ये अस्त्र कुछ ही योद्धाओं के पास था. जैसे रामायणकाल में इसे सिर्फ विभीषण और लक्ष्मण ही प्रयोग करना जानते थे. वहीं महाभारतकाल में यह द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा,भगवान श्रीकृष्ण, कुवलाश्व, युधिष्ठिर, कर्ण, प्रद्युम्न और अर्जुन ही इसे चलाने का ज्ञान रखते थे.
ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने वाले दो योद्धा कौन थे?
महाभारत के युद्ध में ब्रह्मास्त्र अर्जुन और अश्वत्थामा के अलावा कर्ण चलाना जानता था. लेकिन गुरू परशुराम के श्राप के चलते कर्ण खुद अंतिम समय में इसे चलाने की विद्या भूल गया. महाभारत के युद्ध में
ब्रह्मास्त्र की मामूली जानकारी रखने वाले अश्वत्थामा ने युद्ध के अंत में गुस्से में आकर इसे चला दिया, प्रत्युत्तर में अर्जुन ने भी अश्वत्थामा पर ब्रह्मास्त्र चला दिया. इससे भयंकर तबाही शुरू हो गई. तब ऋषि मुनियों ने अर्जुन और अश्वत्थामा को समझाया कि इन दो महाविनाशकारी अस्त्रों की आपस में टक्कर से पृथ्वी पर प्रलय आ जाएगा.
भगवान श्रीकृष्ण भी ब्रह्मास्त्र की थी जानकारी
ब्रह्मास्त्र के बारे में भगवान श्रीकृष्ण को भी पूर्ण ज्ञान था. इसके साथ ही इसका पूर्ण ज्ञान गुरू द्रोण और अर्जुन को भी था. जब महाभारत के युद्ध में अर्जुन और अश्वत्थामा से इस अस्त्र को रोकने के लिए कहा गया तो पूर्ण ज्ञान होने के कारण अर्जुन ने इसे वापिस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा इसे वापिस लेने में असफल रहा, क्योंकि वो सिर्फ इसे चलाना जानता था, वापिस लेने का ज्ञान उसे नहीं था. अश्वत्थामा की इसी अज्ञानता के चलते उसने इसे अर्जुन की बहू उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया. इससे उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई. इससे भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत क्रोधित हो गए और क्रोध में आकर अश्वत्थामा को तीन हजार सालों तक बीमारियों के साथ भटकने का श्राप दे दिया. बाद में कृष्ण ने अपने तप से उत्तरा का गर्भ फिर जीवित कर दिया.

*सहर्ष सूचनार्थ नोट्सः–*
उपरोक्‍त दी गई जानकारी एवं सुझाव सिर्फ सामान्‍य ज्ञान मान्‍यताओं पर आधारित है, हम इसकी जांच या सत्‍यता का दावा नहीं करते सकते हैं। इन्‍हें अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञों की सलाह जरूरी है?

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