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व्यापम घोटाले में फंसे CM शिवराज सिंह : दोष साबित हुआ तो संन्यास

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भोपाल : साम दाम दण्ड भेद और झूठ छल कपट विश्वासघात धोखाधडी बेईमानी और भ्रष्टाचार के जरिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 साल पूर्व कथित व्यापम घोटाला को दफनाने मे सफलता तो हांसिल की? परंतु प्राकृतिक परमात्मा के दरबार मे देर है परंतु अंधेर नहीं होता? दोषियों को सजा जरुर देता है!
आज से 7 साल पूर्व मध्यप्रदेश विधान सभा में व्यापमं घोटाले पर हंगामे और चर्चा के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में कहा था कि कांग्रेस व्यापमं जांच की दिशा को भटकाने की कोशिश में मुझ पर और मेरे परिवार पर कीचड़ उछाल रही है। यदि दोष साबित हो जाए तो मैं राजनीति तो क्या, दुनिया से संन्यास ले लूंगा।
नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे व कांग्रेस विधायकों ने इस दौरान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान कांग्रेस विधायकों ने जमकर हंगामा किया। वे मामले की सीबीआई से जांच कराने के लिए नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने सदन में फिर जवाब दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे व विधायक सुंदरलाल तिवारी सहित अन्य कांग्रेस विधायकों ने व्यापमं घोटाले पर चर्चा कराने की मांग शुरू कर दी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग के अनुरोध को मान लिया। मांग अचानक मंजूर होने से विपक्षी विधायक चकित रह गए।

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उन्होंने कुछ देर तक चर्चा को टालने की भी कोशिश की। इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के बीच नोक-झोंक भी हुई। कटारे ने तो यहां तक कहा कि हमने स्थगन नहीं बल्कि नियम 139 के तहत चर्चा की मांग की थी। शर्मा ने उन्हें कमलेश्वर पटेल द्वारा दिए स्थगन प्रस्ताव का हवाला देकर चुप करा दिया। अध्यक्ष शर्मा को यह भी कहना पड़ा कि क्या मैंने चर्चा का अनुरोध स्वीकार करके गलती की है।

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चर्चा के दौरान भाजपा विधायक मोहन यादव की कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी व सुंदरलाल तिवारी से कहासुनी हुई। नेता प्रतिपक्ष के वक्तव्य के बाद जब मुख्यमंत्री ने दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में नोटशीट पर हुई नियुक्तियों का हवाला दिया तो कांग्रेस इस बात पर अड़ गई कि उस समय की गड़बड़ी के साथ ही व्यापमं घोटाले और कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उनका वक्तव्य पूरा सुना जाए।
कांग्रेस के विधायक इस पर तैयार नहीं हुए और कुर्सी छोड़कर गर्भगृह में धरने पर बैठ गए। साथ ही सीबीआई जांच के लिए नारे लगाने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में जब दोबारा कार्यवाही प्रारंभ हुई, तब भी विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा। लिहाजा कार्यवाही गुरुवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई। मुख्यमंत्री शेष जवाब विगत गुरुवार को रखा था। परंतु मामले को पूरी तरह दबाने का प्रयास किया गया?
राजनैतिक भविष्य वक्ताओं की माने व्यापम घोटाला की सजा बतौर CM शिवराज सिंह चौहान के मुख से निकली भविष्यवाणी निकट भविष्य सत्य होते दिखाई देते नजर आ रही है?

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