कतर में आठ भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई की खबर से दुनिया भर में हलचल
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक की रिपोर्ट,मों 9822550220
नई दिल्ली । कतर की एक अदालत ने भारत के आठ पूर्व नौ सैनिकों को फांसी की सजा सुनाई है, तब से इसके पीछे के कारण ढूंढे जा रहे हैं। दरअसल, कतर की तरफ से उठाया गया यह कदम काफी चौंकाने वाला है। यही वजह है कि मौजूदा हालात के मद्देनजर कतर से आई खबर का विश्लेषण किया जाने लगा है
कतर की एक अदालत ने भारत के आठ पूर्व नौ सैनिकों को फांसी की सजा सुनाई है, तब से इसके पीछे के कारण ढूंढे जा रहे हैं। दरअसल, कतर की तरफ से उठाया गया यह कदम काफी चौंकाने वाला है। यही वजह है कि मौजूदा हालात के मद्देनजर कतर से आई खबर का विश्लेषण किया जाने लगा है।
कतर के एक कोर्ट ने आठ भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई है। कतर अरब दुनिया का ऐसा देश है जो इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है। ऐसे में पहले हमास के इजरायल पर हमले और बदले में इजरायल का हमास पर बरपता कहर कहीं कतर के इस अप्रत्याशित कदम की वजह तो नहीं हैं? दूसरी तरफ, पाकिस्तान की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ही कतर को भारतीय नागरिकों को उकसाया है। भारत के प्रति पाकिस्तान की नीति और नीयत कैसी रही है, इसके सबूत देने की तो जरूरत है नहीं। अभी पाकिस्तान एक और वजह से भी भारत के खिलाफ ऐसी साजिश कर सकता है। इसका जिक्र हम आगे करेंगे। इस तरह गौर से देखें तो कम-से-कम ठोस कदम उठाया जाना चाहिए
हमास पर भारत के रुख से कतर को लगी मिर्ची?
कतर की अदालत ने जिन आठ भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई है, वो वहां ‘अल-जाहिरा अल-आलमी कन्सलटेन्सी एंड सर्विसेज’ नामक कंपनी में काम करते थे। ये सभी भारतीय नौ सेना के अधिकारी रह चुके हैं और कंपनी ओमान के एक उद्योगपति की है। कतर की पुलिस ने इन भारतीयों को इस आरोप में गिरफ्तार किया कि वो इजरायल के लिए जासूसी कर रहे थे। इजरायल, कतर को फूटी आंख नहीं सुहाता है। ऐसे में यह आरोप लगना था कि कतर पुलिस ने भारतीयों के साथ-साथ ओमान के एक नागरिक को भी गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, ओमान के नागरिक को दो महीने बाद ही छोड़ दिया गया जबकि भारतीयों को कभी जमानत भी नहीं मिली। अब जब अचानक फांसी की सजा सुनाई गई तो यह आशंका जताई जा रही है कि कतर ने ऐसा भारत से खुन्नस निकालने के लिए किया है। दरअसल, भारत ने इजरायल पर हमास के हमले को बिना देर किए आतंकी कार्रवाई करार दे दिया। चूंकि कतर हमास और हिज्बुल्ला ही नहीं, करीब-करीब सभी इस्लामी आतंकी संगठनों की चौतरफा मदद करता है। खासकर, इजरायल की दुश्मनी में वो हमास और हिज्बुल्ला जैसे संगठनों के संरक्षक की भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत का बेलाग लपेट कहना कि हमास आतंकी संगठन है, कतर को जरूर गहरा चुभ गया होगा। ध्यान रहे कि बीजेपी की तत्कालीन नेता नूपुर शर्मा के एक टीवी डिबेट में इस्लाम पर दिए बयान पर भी कतर ने बड़ा कड़ा रुख दिखाया था। नूपुर का बयान कतर को कांटे की तरह चुभा और संभव है कि हमास पर भारत के बयान ने वह चुभन बढ़ा दी है।
भारत में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर एक ऐसी घोषणा हुई जिससे अरब वर्ल्ड में काफी हलचल हुई। वह घोषणा थी- भारत की मध्य पूर्व के देशों से होकर यूरोप तक व्यापारिक पहुंच। भारत को यूरोप से जोड़ने वाले इस गलियारे का प्रॉजेक्ट भारत, अमेरिका और सऊदी अरब ने घोषित किया। इससे तुर्की तो तुरंत सुलग गया। पाकिस्तान परस्त और भारत विरोधी तुर्की ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) परियोजना के खिलाफ तुरंत जहर उगलने लगा। इतना ही नहीं, एक रेल रोड नेटवर्क का भी ऐलान कर दिया जो इराक में आईएसआईएस के गढ़ से होकर गुजरेगा। कतर की भी मानसिकता तुर्की जैसी ही है। वह भी नहीं चाहता है कि भारत और यूरोप को जोड़ने वाला गलियारा अरब वर्ल्ड से होकर गुजरे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी यह आशंका जताई कि हमास का अचानक इजरायल पर इतना बर्बर हमला संभवतः आईएमईसी को रोकने के लिए ही किया गया हो। दरअसल, इस परियोजना को बट्टा लगने पर चीन भी खुश होगा क्योंकि इस प्रॉजेक्ट से कहीं ना कहीं उसके महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की सफलता भी सीमित हो सकती
खबर यह भी है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के उकसावे पर ही कतर ने आठ भारतीयों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। भारत ने बिना युद्ध किए पाकिस्तान को पस्त कर दिया है। उसकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि वह कर्जों और मदद के पैसों पर पूरी तरह निर्भर हो गया है। उधर, कतर में करीब एक चौथाई आबादी भारतीयों की है। वहां से भारतीय भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं। इतना ही नहीं, भारत अपना 90 प्रतिशत गैस आयात कतर से ही करता है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका है। उसे लगता है कि मुस्लिम देश में भारत की जगह उसके नागरिकों को काम मिलना चाहिए जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी सुधर पाएगी। ऐसे में संभव है कि कतर में भारतीयों के प्रति संदेह पैदा करने की नीयत से पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई ने चाल चली हो। आईएसआई एक इस कदम के पीछे एक और बात हो सकती है। वो यह कि पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से खूंखार आतंकियों का लगातार सफाया हो रहा है। हर बार कोई अनजान व्यक्ति किसी बड़े आतंकी को कभी नमाज पढ़ते वक्त तो कभी यूं ही गलियों में गोली मारकर मौत के घाट उतार देता है। पाकिस्तान को लगता है कि यह भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के इशारे पर हो रहा है। संभव है कि पाकिस्तान अपने आतंकी नागरिकों के मारे जाने का बदला कतर में लेना चाहता हो। आईएसएआई जरूर सोच रही होगी कि अगर आठ भारतीयों को फांसी दी जाती है तो उनके आतंकियों की हत्या का हिसाब चुकता हो सकता है।
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