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मध्य प्रदेश चुनाव हारकर भी जीत गए अखिलेश, कांग्रेस को कई सीटों पर हराया है।

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मध्य प्रदेश चुनाव हारकर भी जीत गए अखिलेश, कांग्रेस को कई सीटों पर हराया है।

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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भोपाल। मध्य प्रदेश की निवाड़ी विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 17157 मतों से हरा दिया। यहां पर सपा को 32670 वोट मिले हैं। चांदला विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 15491 मतों से हराया है। यहां भी सपा को 24977 वोट मिले हैं। इसी प्रकार राजनगर विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 5867 वोटों से हराया यहां भी साइकिल को 6353 वोट मिले है।
मध्यप्रदेश की निवाड़ी विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 17,157 मतों से हरा दिया। यहां पर सपा को 32,670 वोट मिले हैं। चांदला विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 15,491 मतों से हराया है। यहां भी सपा को 24,977 वोट मिले हैं। इसी प्रकार राजनगर विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 5,867 वोटों से हराया, यहां भी साइकिल को 6,353 वोट मिले हैं।
यह चंद उदाहरण हैं जो यह समझने के लिए काफी हैं कि सपा मध्य प्रदेश में भले ही एक भी सीट जीत न पाई हो, लेकिन उसने कांग्रेस को हरा जरूर दिया है। जतारा भी ऐसी सीट है, जहां कांग्रेस जितने मतों से भाजपा से हारी है, उससे ज्यादा वोट सपा को मिले हैं। हार के बावजूद अखिलेश के लिए यह चुनाव परिणाम राहत देने वाले हैं।
मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने अपना पूरा जोर लगाया था। अति आत्मविश्वास के कारण पार्टी ने विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए का भी ख्याल नहीं रखा। सपा मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती थी, किंतु पार्टी ने यहां साइकिल को भाव नहीं दिया।
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तो …अरे भाई छोड़ो कौन अखिलेश-वखिलेश कहकर सपा को बहुत हल्के में लिया था और उसे एक भी सीट नहीं दी थी। अखिलेश ने भी खुले तौर पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद सपा ने यहां 74 प्रत्याशी घोषित कर दिए थे।

बाद में कुछ जगह पर्चे निरस्त हुए तो 70 प्रत्याशी मैदान में बचे। अखिलेश ने करीब एक हफ्ते से अधिक समय वहां के चुनाव प्रचार में लगाया। उनकी पत्नी डिंपल यादव ने भी यहां कई जगह रोड-शो किए। कांग्रेस अति आत्मविश्वास में थी कि सरकार बनाने के बाद वह अखिलेश को मना लेगी, किंतु अब दांव उल्टा पड़ गया है।

कांग्रेस के मुश्किल बढ़ेगी

कांग्रेस को मध्य प्रदेश में करारी शिकस्त मिलने के बाद अब यूपी में लोक सभा चुनाव में भी उसके लिए मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं। कांग्रेस के ऐसे प्रदर्शन के बाद अब विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए में शामिल पार्टियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर वह बहुत प्रभावी मुद्रा में नहीं रह पाएगी।

प्रदेश में सीट बंटवारे की स्थिति में कांग्रेस अब मजबूती से दावेदारी भी नहीं कर पाएगी। सपा भी अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन का हवाला देते हुए उस पर हावी होती नजर आएगी।

अगर कांग्रेस से गठबंधन न हुआ तो इस बार सपा अमेठी व रायबरेली में भी अपने दमदार प्रत्याशी उतारेगी। अभी तक सपा अमेठी में राहुल गांधी व रायबरेली में सोनिया गांधी के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारती आई है।

कमलनाथ का अहंकार ले डूबा : सपा

सपा के प्रवक्ता मनोज काका ने कहा, कमलनाथ का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा था, उन्होंने अखिलेश यादव का अपमान किया था। रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा है कि जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है, कमलनाथ के अमर्यादित बयानों से कांग्रेस हारी है। जब-जब दलितों, पिछड़ों और क्षेत्रीय दलों का अपमान होगा, तब-तब कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ेगी

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