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DCM शिंदे की नाराज बहन ने शिवसेना छोड़ अजितदादा NCP की घड़ी बांधी

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DCM शिंदे की नाराज बहन ने शिवसेना छोड़ अजितदादा NCP की घड़ी बांधी

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टेकचंद्र शास्त्री:

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मुंबई ।महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महाबलेश्वर नगर निगम चुनाव में नाम वापस लेने के आखिरी दिन (शुक्रवार) नाटकीय घटनाक्रम हुआ। शिवसेना की पूर्व नगरसेवक विमल ओंबले ने वार्ड नंबर चार से अपना नाम वापस ले लिया। इतना ही नहीं वह अजित पवार की एनसीपी में शामिल हो गईं।

सतारा: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महाबलेश्वर नगर निगम चुनाव में नाम वापस लेने के आखिरी दिन (शुक्रवार) नाटकीय घटनाक्रम हुआ। शिवसेना की पूर्व नगरसेवक विमल ओंबले ने वार्ड नंबर चार से अपना नाम वापस ले लिया। इतना ही नहीं वह सार्वजनिक रूप से उपमुख्यमंत्री अजित पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि विमल ओंले को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बहन मानते हैं।

शिंदे की बहन अब एनसीपी में शामिल हूई हैं?

दरअसल कुछ दिन पहले जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सतारा के दौरे पर थे, तो उन्होंने शिवसैनिकों की एक मीटिंग की थी। उस समय उन्होंने महाबलेश्वर में बहन मानी जानी वाली विमल ओंबले की राजनीतिक जिम्मेदारी कुमार शिंदे को सौंपी थी। हालांकि उसी चुनाव में कुमार शिंदे ने ओंबले से अपना समर्थन वापस ले लिया और अपने विरोधी उम्मीदवार विमल बिरमने को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। ओंबले ने यह बात एकनाथ शिंदे को बताई। हालांकि उन्हें कोई पॉजिटिव जवाब नहीं मिला। इसलिए विमल ओंबले ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके अलावा उन्होंने शिवसेना छोड़कर अजित पवार की अगुवाई वाली नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली थी।

शिवसेना छोड़ने की वजह?

शिवसेना को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की बहन मानी जाने वाली विमल ओंबले महाबलेश्वर म्युनिसिपैलिटी की कॉर्पोरेटर थीं। वह पिछले चुनाव में चुनी गई थीं। एकनाथ शिंदे ने अपनी पॉलिटिकल जिम्मेदारी शिवसेना के पदाधिकारी कुमार शिंदे को सौंपी थी, लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और विरोधी कैंडिडेट का साथ दिया। इससे नाराज होकर विमल ओंबले ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शिवसेना छोड़ दी।

महाबलेश्वर मेयर पद के लिए कितने कैंडिडेट्स?

महाबलेश्वर के मेयर पद के लिए 7 कैंडिडेट्स ने कुल 9 एप्लीकेशन दी थीं। एनसीपी ने सही समय पर सुनील शिंदे का नाम तय किया। इससे नाराज होकर नासिर मुलानी ने बगावत कर दी। राहत और रिहैबिलिटेशन मिनिस्टर मकरंद पाटिल के महाबलेश्वर आने और मुलानी परिवार को मनाने के बाद उन्होंने अपनी एप्लीकेशन वापस ले ली। अब मेयर पद के लिए चुनाव एनीसी के सुनील शिंदे, लोकमित्र जनसेवा अघाड़ी के डी. एम. बावलेकर, कुमार शिंदे, सतीश सालुंखे और संजय पाटिल के बीच होगा।

बीजेपी के सिर्फ़ तीन उम्मीदवार मैदान में

भारतीय जनता पार्टी अभी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है। महाबलेश्वर नगर निगम चुनाव में अपना पूरा पैनल भी नहीं उतार पाई है। कमल के निशान पर बीजेपी के सिर्फ़ तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इसी तरह डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की शिवसेना को भी उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला है। जो लोग इंटरेस्टेड हैं,

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