महायुति में बडा घमासान:50 सीटों पर मानने को तैयार नहीं शिंदे सेना
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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मुंबई । BMC चुनाव से प।ले ही महायुति में बडा घमासान मचा हुआ है.DCM एकनाथ शिंंदे 50 सीटों पर मानने को तैयार नहीं और भाजपा भी अडिग है; BMC चुनाव से पहले महायुति में घमासान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. दरअसल में DCM एकनाथ शिंदे के 90 सीटों की मांग पर अड़े रहने के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बीएमसी चुनावों के लिए अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को मजबूती से गठबंधन में शामिल करने का फैसला किया है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के लिए महायुति गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध बरकरार है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भाजपा के 50 सीटों के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर रही है। शिंदे सेना खुद 80 से 90 सीटों की मांग कर रही है। बीएमसी की कुल 227 सीटों में भाजपा 150 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रख रही है, शिंदे सेना को 50 सीटें और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों की अधिकतर 27 सीटें अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को देने की योजना है।
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द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उनका तर्क है कि उनके पास लगभग 100 योग्य उम्मीदवार हैं, जिनमें कई पूर्व पार्षद शामिल हैं। शिंदे ने भाजपा नेतृत्व से कहा- शिवसेना मुंबई की मुख्य पार्टी है, इसलिए कम से कम 80 से 90 सीटें मिलनी चाहिए। यदि कम सीटें दी गईं तो बीएमसी चुनाव की उम्मीद में शिवसेना में शामिल हुए लोगों को समायोजित करना मुश्किल होगा।
शिंदे ने चेतावनी दी कि इससे असंतोष बढ़ सकता है और नाराज उम्मीदवार उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में वापस लौट सकते हैं, जो महायुति के लिए नुकसानदेह होगा। साथ ही, इससे मराठी मतदाताओं को गलत संदेश जाएगा, जो बीएमसी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, भाजपा अपनी स्थिति पर अड़ी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा- शिवसेना को 80 सीटें भी नहीं दे सकते। अधिकतम 60 सीटों का प्रस्ताव दे सकते हैं। यदि शिंदे अपनी मांग पर अड़े रहे तो हम उन्हें अलग चुनाव लड़ने के लिए कह सकते हैं। ऐसे में शिवसेना की मांग वाली 27 सीटें अजित पवार की एनसीपी को दे दी जाएंगी और भाजपा करीब 200 सीटों पर लड़ेगी। 50 प्रतिशत स्ट्राइक रेट से भी हम सत्ता में आ सकते हैं, लेकिन कम सीटें लड़ने से भाजपा को कोई फायदा नहीं होगा।
भाजपा अपने रुख पर कायम दिखाई दे रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिंदे के 90 सीटों की मांग पर अड़े रहने के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बीएमसी चुनावों के लिए अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को मजबूती से गठबंधन में शामिल करने का फैसला किया है।
फिलहाल, महायुति के घटक दलों के बीच सहमति न बनने से बीएमसी चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सीट बंटवारे का यह विवाद आने वाले दिनों में गठबंधन की एकता और चुनावी रणनीति दोनों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। बीएमसी चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं और नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महायुति की हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी जीत ने भाजपा की स्थिति मजबूत की है, जहां वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
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