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पूर्व CM भूपेश बघेल का बेटा चैतन्य को जेल? याचिका पर हो रही है सुनवाई

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पूर्व CM भूपेश बघेल का बेटा चैतन्य को जेल? याचिका पर हो रही है सुनवाई

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले के मामलों में मिली जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर एक सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।

चैतन्य बघेल, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे हैं। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को छत्तीसगढ़ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले के महत्वपूर्ण गवाहों में से एक सामने नहीं आ रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक संबंधित धन शोधन मामले में चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है। पीठ ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई एक सप्ताह बाद करेगी। न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया द्वारा दायर एक अलग याचिका पर भी सुनवाई की, जिन्हें राज्य में कथित शराब घोटाले के सिलसिले में पिछले साल दिसंबर में ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

चौरसिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय ने पहले भी चौरसिया को उन अन्य मामलों में जमानत दी थी जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया गया था। रोहतगी ने कहा, ‘‘उन्होंने फिर से एक नयी प्राथमिकी दर्ज की और उन्हें दिसंबर में गिरफ्तार कर लिया।’’ उन्होंने कहा कि यह छठी बार है जब चौरसिया को गिरफ्तार किया गया है।

पीठ ने चौरसिया को जमानत के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में अपनी याचिका दायर कर सकती है और उच्च न्यायालय प्राथमिकता के आधार पर उनकी याचिका पर सुनवाई कर दो सप्ताह के भीतर फैसला सुना सकता है।

पीठ को यह भी बताया गया कि चौरसिया को दो जनवरी को एक अलग मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। न्यायालय ने कहा कि वह उस मामले में भी जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकती हैं।

न्यायालय ने पूर्व में कोयला लेवी (शुल्क) घोटाले में चौरसिया को जमानत दी थी। उन्हें शराब घोटाले के मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उच्चतम न्यायालय ने 15 जनवरी को, चैतन्य बघेल को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर सुनवाई स्थगित कर दी थी।

राज्य सरकार का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस सनसनीखेज मामले में प्रमुख आरोपियों और षड्यंत्रकारियों में से एक थे, वहीं उनके वकील ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने उस मामले में एक सुविचारित फैसला सुनाया है, जिसकी जांच पिछले दो वर्षों से जारी थी। दो जनवरी को उच्च न्यायालय ने कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी।

ईडी के अनुसार, राज्य में शराब ‘‘घोटाला’’ 2019 और 2022 के बीच उस समय हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। उसका दावा है कि कथित घोटाले के परिणामस्वरूप राज्य के खजाने को ‘‘भारी नुकसान’’ हुआ और शराब गिरोह के लाभार्थियों की जेबें भर गईं।

ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले में शामिल गिरोह के सरगना थे और उन्होंने इस घोटाले के तहत लगभग 1,000 करोड़ रुपये का लेन-देन व्यक्तिगत रूप से किया था.जागरूक नागरिकों का मानना है कि अगर चैतन्य बघेल अपने समस्त दोस्त भाइयों और कार्यकरताओं के साथ भाजपा शामिल हो जाता ओ वह बच सकता था.जिस तरह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री अशोक चव्हाण मौके पर भाजपा मे शामिल हो जाने से उन पर होने वाली ED की कार्रवाई टल गई है.

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