Breaking News

बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं राजस्थान के घुमंतू समुदाय!

Advertisements

नई दिल्ली। मात्र आज तक सभी प्रधान मंत्रियों और सभी मुख्य मंत्रियों ने सर्वांगीण विकास की घोषणा कर दिया और चलते बने? हालकि देश में विकास की जो सरकारी बयार चली वहाँ आज कोई भी न तो गरीब बचा है, न ही कोई भूखा है और न ही कोई बेरोजगार! देश के सभी मुखिया प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने घोषणा कर दी है कि देश में विकास आ गया है, मतलब आ गया है। जो इस सरकारी आदेश को नहीं माने वो देशद्रोही! आजादी के बाद देश में कई योजनाएं गरीबी, भुखमरी, बेरोजारी को दूर करने के लिए आयी और कागजों पर सिमट कर दम तोड़ती हुई खत्म हो गई। गांधी, विनोबा भी चले गए, पर स्थितियाँ आज भी लगभग वैसी की वैसी ही हैं। आजादी के 75 साल गुजर गए। इस बीच कई सरकारें आयी और चली गई।

Advertisements

उन्होंने बड़े-बड़े वादों की फुलझड़ियाँ छोड़ी पर देश में कुछ जातियों की हालत जैसी पहले थी वैसी ही आज भी बनी हुई है। न उनके रहने में कोई विशेष बदलाव आया है और न ही खान-पान और पहनावे-ओढ़ावे में। विनोबा ने देश भर में भूदान चलाया, तमाम सरकारी योजनाओं ने भूमिहीन के लिए भूमि वितरण और आवंटन किया, लेकिन कुछ जातियों के लोग आज भी वैसे ही बेजमीन ही बने हुए हैं, जैसे पहले थे। जिन्हें थोड़ी-बहुत जमीन मिली भी, उन्हें आज तक उनके कब्जे हासिल नहीं हो पाये। बहुत लोगों के पास तो अभी भी घर तक बनाने की भी जमीन नहीं है।

Advertisements

देश में आज तक सभी प्रधानमंत्रियों और सभी मुख्यमंत्रियों ने घोषणा कर रखी है कि घर-घर में शौचालय हो लेकिन जिनके घर ही नहीं उनके लिए कुछ भी नहीं सोचा। राजस्थान के अलवर जिला मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली हाइवे के किनारे एक बड़ी बस्ती है। जहाँ यह बस्ती बसी है, वह जमीन संभवतः सरकारी है अथवा ऐसे ही खाली पड़ी किसी की निजी मिल्कियत। लेकिन नट जाति के लोगों के घर तो बदलते रहते हैं। जहाँ जैसा काम वहाँ वैसा घर! नट जाति के ही हेमों की उम्र लगभग 35 साल होगी। वह अपने बारे में बताती है कि सरकार से हम लोगों ने और बहुत सारे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बात की। कई योजनाएं भी है लेकिन हमें आज तक कुछ भी नहीं मिला है। पहले हम लोगों के पास राशन कार्ड नहीं थे, आधार कार्ड भी नहीं था। लेकिन अब ये सब तो हमारे पास मौजूद है, उसके बावजूद भी आज तक हमें सरकार ने देश का नागरिक ही नहीं समझा है।

आगे वह बताती है कि हमारा गाँव ‘हलेना’ यहीं नजदीक ही है। रहने को घर तो है लेकिन हमारे पास न तो खेती की जमीन है और न ही हमारे पास और कोई रोजगार है। उस के 3 बच्चे हैं। बड़ी लड़की ब्याह के काबिल होने को है। इसलिए उन्हें घर- गाँव छोड़ जंगलों में रहना पड़ रहा है। वे रंज के साथ बताती हैं कि हमें जहाँ काम मिलता है, वहाँ हम परिवार सहित चले जाते हैं। इसके अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है।
उसी बस्ती की अनीता (उम्र 50 वर्ष) बताती हैं कि मेरे पति शादियों में बैंड बजाने का काम करते हैं। लेकिन यह काम शादियों के सीजन भर ही चलता है। उसके बाद कोई काम नहीं रहता। उसके पेट के दो ऑपरेशन हो चुके हैं और वह अभी कोई काम करने की स्थिति में नहीं है। अब पति को जो भी जहाँ भी काम मिलता है, गुजारे के लिए वह करना पड़ता है।

गाँव-घर में कहीं भी खेती नहीं है तो सड़कों पर गुजारा करना पड़ता है। उसके 5 बच्चे हैं। जिसमें दो लड़कियाँ हैं। एक लड़की की शादी हो चुकी है। बाकी अभी सब की शादी करनी बाकी है। पति के पास कोई ठोस काम नहीं है। बच्चे भी अभी छोटे हैं। जैसे-तैसे एक टाइम का खाना सबको नसीब हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई पर सवाल करने पर वह कहती है कि जब खाने को ठीक से नहीं है तो आगे क्या सोचें? कृष्णा अपने बारे में बताती है कि 5 बच्चे मेरे भी हैं। मेरा जहाँ जन्म हुआ वह पिलवा नामक गाँव यहीं अलवर में ही है। लेकिन वहाँ कोई भी रोजगार हम लोगों के लिए नहीं था। इसलिए गाँव को छोड़ना मजबूरी हो गया। नहीं तो कौन अपना गाँव, जड़, जमीन छोड़ता है। हमारे पास खेती बिल्कुल भी नहीं है। खेती के लिए कई लोगों से मिली कुछ लोगों ने कुछ पैसे भी खा लिए लेकिन खेती की बात आज तक नहीं बन पाई। मैंने कई बार प्रयास किया। लेकिन आज तक कोई मामला नहीं बन पाया। अब पति मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। मैं भी कुछ न कुछ करके थोड़ा- बहुत पैसे कमा लेती हूँ। बाकी जंगल अपने तो हैं ही। पुलिस ने डंडा मारा तो रातों-रात कहीं और झोपड़ियाँ बना लेते हैं। बस अब यही हमारी ज़िंदगी बन गई है।

ऐसी हजारों कहानियों से भरा पड़ा है अलवर के पास का क्षेत्र। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले हर परिवार की यही कहानी है। आजादी के 75 सालों में इन परिवारों तक आजादी की रोशनी नहीं पहुंच पाई। बावजूद इसके अगर देश के हुक्मरान कह रहे हैं कि देश का विकास हो गया, तो मानना ही पड़ेगा न! अन्यथा देशद्रोही बनने का जोखिम उठाना पड़ेगा!

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

दुुर्भावनाओं के आवेश में गंधी राजनीति की वजह से हिंदू धर्म बदनाम

दुुर्भावनाओं के आवेश में गंधी राजनीति की वजह से हिंदू धर्म बदनाम टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 …

स्वदेशी अपनाओ और विदेश हटाओ के उद्देश्य के अनन्य लाभ

स्वदेशी अपनाओ और विदेश हटाओ के उद्देश्य के अनन्य लाभ टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220   प्रधान …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *