रायपुर : छत्तीसगढ़ में इन दिनों फर्जी जाति का मामला गर्माया हुआ है. बता दें छत्तीसगढ़ बनने के बाद से राज्य के विभिन्न विभागों को शिकायतें मिली थी कि गैर आरक्षित वर्ग के लोग आरक्षित वर्ग के कोटे का शासकिय नौकरियों एवं राजनीतिक क्षेत्रों में लाभ उठा रहे है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति गठित की थी, जिसकी रिर्पोट के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों से तत्काल हटा उन्हें बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिया.
आदेश खानापूर्ति ही साबित हुए और सरकारी आदेश को पालन में नहीं लाया गया. फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वाले कुछ सेवानिवृत हो गए तो, कुछ ने जांच समिति के रिर्पोट कों न्यायलय में चुनौती दी, लेकिन सामान्य प्रशासन की ओर से जारी फर्जी प्रमाण पत्र धारकों की लिस्ट में ऐसे अधिकांश लोग है जो सरकारी फरमान के पालन नहीं होने का मौज काट रहे और प्रमोशन लेकर मलाईदार पदों में सेवाए दे रहे है. इसे लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के युवाओं ने मोर्चा खोल दिया और पिछले दिनों वे आमरण अनशन पर बैठ गए. प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी के तबियत बिगड़ गई, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया उदासिन है
छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फर्जी जाति प्रमाण पत्र के शिकायतों की जांच करने उच्च स्तरीय जाति छानबींन समिति का गठन किया. समिति को वर्ष 2000 से लेकर 2020 तक के कुल 758 प्रकरण मिले, जिसमें से 659 प्रकरणों में जांच की गई. जांच के बाद 267 प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए. छत्तीसगढ़ के लगभग सभी सरकारी विभागो में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के प्रकरण पाये गए है. इसमें सबसे अधिक खेल एवं युवा कल्याण विभाग में 44 मामले है. वहीं भिलाई स्पात संयंत्र में 18 तथा सामान्य प्रशासन विभाग एवं कृषि विभाग में 14-14 प्रकरण है. इस तरह प्रत्येक विभाग में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले है, जिसकी जांच पूरी होने एवं कार्यवाही के सरकारी आदेश के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया है.
दरसअल फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यवाही से खुश रहने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवा अब सरकार से नाराज है. मसलन जिस फर्जी जाति प्रकरणों की जाचं सरकार ने करवाई उसमें पाये गए दोषियों के खिलाफ सरकारी फरमान के बावजूद तीन वर्ष बाद भी कार्यवाही नहीं की गई. वहीं फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारकों को महत्वपूर्ण पदों में प्रमोशन भी समय से दिया जा रहा है. इससे अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवा आंदोलित हो गए है.
1दिनों तक भूखे रहकर आंदोलन किया. हमारे आंदोलनकारी युवा साथी एक-एक कर गंभीर हालात में अस्पताल भर्ती कराये गए, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से इस मामले में उदासिन रवैया रहा. हमने आमरण अनशन कों स्थगित कर दिया, लेकिन अपने हक और अधिकार के लिए किसी भी हद तक जा सकते है. हम अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकते इसलिए अपनी इज्जत खोकर पूर्ण रूप से निर्वस्त्र होकर सरकार कों नींद से जगाने का काम किया.
विधानसभा के सामने आरोपियों को सरकारी संरक्षण देने के विरूद्ध तथा आरोपियों पर कठोर कार्यवाही की मांग को लेकर प्रदेशभर के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के 100 से अधिक युवा पूर्ण रूप से नग्न होकर मानसून विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा के सामने प्रदर्शन करते नजर आए.
रमन सिंह ने सरकार को घेरा
एससी-एसटी युवाओं के नग्न प्रदर्शन के मसले पर पूर्व सीएम डॉक्टर रमन सिंह ने कहा कि सरकार के खिलाफ विरोध इस स्तर तक पहुंच चुका है. हमारी सरकार को गए 5 साल हो गए हैं. अनियमितता थी तो इन्होंने ठीक क्यों नहीं किया कांग्रेस सरकार कब तक यहीं राग अलापती रहेगी
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