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(भाग:452)गौतम ऋषि के तप से प्रकट हुई थीं गोदावरी गंगा

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(भाग:452)गौतम ऋषि के तप से प्रकट हुई थीं गोदावरी गंगा:

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

 

नासिक। गौतम ऋषि के तपोवल से प्रकट हुई गोदावरी गंगा मैया शिव-पार्वती, गंगा और गौतम ऋषि से जुड़ी त्र्यंबकेश्वर की आलौकिक कथाएं जो ज्योतिर्लिंग की मान्यता से आठवें ज्योतिर्लिंग त्रिदेवों के दर्शन होते हैं।

 

शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों में आठवां नासिक जिले में स्थापित है, इसका नाम त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर के संबंध में मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है यानी स्वयं प्रकट हुआ है। ये मंदिर पवित्र नदी गोदावरी के किनार पर स्थित है। इस मंदिर की मान्यता शिव-पार्वती, गंगा और गौतम ऋषि से जुड़ी है। जानिए मंदिर से खास बातें जुड़ी हूई हैं।

 

मान्यता है कि पुराने समय गौतम ऋषि और देवी अहिल्या ब्रह्मगिरी पर्वत पर रहते थे। वर्तमान में ये क्षेत्र नासिक जिले में है। गौतम ऋषि तपस्वी थे, इस कारण उन्हें हर जगह मान-सम्मान मिलता था। इस बात से यहां अन्य साधु-संत गौतम ऋषि के लिए जलन की भावना रखते थे। साधु-संत गौतम ऋषि का अपमान करने का कोई न कोई बहाना खोजते रहते थे।

 

एक दिन जलन की वजह से सभी साधु-संतों ने गौतम ऋषि पर गोहत्या करने का झूठा आरोप लगा दिया। सभी साधु-संतों ने कहा कि इस हत्या के पाप के प्रायश्चित के लिए आपको देवी गंगा को यहां बुलाना होगा। तब गौतम ऋषि ने यहां शिवलिंग स्थापित करके तपस्या करना शुरू की। गौतम ऋषि की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी और माता पार्वती यहां प्रकट हुए।

 

जब शिव जी ने गौतम ऋषि से वरदान मांगने को कहा तो गौतम जी से वरदान में मांगा कि देव नदी गंगा को यहां भेज दीजिए।

 

ऐसा कहने पर शिव जी की इच्छा से देवी गंगा भी वहां प्रकट हो गईं। गंगा ने कहा कि अगर शिव जी भी यहां रहेंगे, तभी मैं भी यहां रहूंगी।

 

गौतम ऋषि को वरदान देने और देवी गंगा की इच्छा पूरी करने के लिए शिव जी यहां ज्योति रूप में विराजमान हो गए। इसके बाद देव नदी गंगा भी यहां गौतमी नदी के रूप में वहां बहने लगी। गौतमी नदी का एक नाम गोदवरी भी है।

 

इसके बाद गौतम ऋषि पर लगाया गया आरोप झूठा साबित हो गया। साधु-संतों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने गौतम ऋषि से क्षमा मांगी। गौतम ऋषि ने सभी को क्षमा भी कर दिया।

 

त्रिदेवों के एक साथ दर्शन होते हैं त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में

 

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग में तीन छोटे-छोटे शिवलिंग भी हैं। ये तीन शिवलिंग ब्रह्मा, विष्णु और शिव के प्रतीक हैं। इस मंदिर के पास तीन पर्वत भी हैं, जिन्हें ब्रह्मगिरी, नीलगिरी और गंगा द्वार कहा जाता है। ब्रह्मगिरी पर शिव जी, नीलगिरी पर नीलांबिका देवी और दत्तात्रेय का मंदिर है। गंगा द्वार पर्वत पर देवी गंगा का मंदिर है। गंगा माता की प्रतिमा से बूंद-बूंद करके जल टपकता रहता है। नासिक में ही गोदावरी नदी का उद्मम स्थल है।

 

कैसे पहुंच सकते हैं मंदिर तक

 

इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सबसे पहले नासिक पहुंचना होता है। नासिक वायु मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग से सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। नासिक से त्र्यंबकेश्वर मंदिर करीब 29 किमी दूर है। यहां से मंदिर तक पहुंचने प्रायवेट टैक्सी और बसें आसानी से मिल जाती हैं।

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