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दो मुस्लिम सहेलियां बनी हिंदू दोस्तों की हमसफर! टूटी मजहबी दीवार

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दो मुस्लिम सहेलियां बनी हिंदू दोस्तों की हमसफर! टूटी मजहबी दीवार

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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मुरादाबाद। उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद में मोहब्बत की एक अनोखी कहानी खुलकर सामने आई है जहाँ दो मुस्लिम सहेलियों ने हिंदू धर्म अपनाकर अपने हिंदू दोस्तों से शादी कर ली। नूर फातिमा नीलम और स्वालेहीन शालिनी बन गईं। उन्होंने गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में मतांतरण किया और वैदिक पद्धति से विवाह कर लिया। प्रेम की शुरुआत फोन कॉल से हुई थी लेकिन धर्म की बाधा आने पर उन्होंने घर छोड़ दिया और अपनी मर्जी से शादी की।

दो सहेलियों दो जिगरी दोस्तों को दिल दे बैठीं। प्रतीकात्‍मक

दोनों मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू धर्म में आस्था जता किया मतांतरण, लिये सात फेरे

फोन से शुरू हुई थी मोहब्बत की कहानी, एक-दूजे के लिए अपना घर छोड़कर दिया.

कहते हैं कि मोहब्बत सच्ची हो तो लाख बाधाएं भी छोटी हो जाती हैं। फिर चाहे धर्म आड़े आए या परिवार। मोहब्बत से टूटी मजहबी दीवारों की रोचक कहानी सामने आई हैं। दो सहेलियों दो जिगरी दोस्तों को दिल दे बैठीं।

एक साथ दिनभर उठने बैठने वाले दोस्त हर पल साये की तरह साथ रहने वालीं सहेलियों के हो गए। एक-दूसरे को दोस्तों ने पसंद कर लिया। एक-दूजे के होने का इरादा बना लिया, मगर धर्म और परिवार रोड़ा बन गया। तब किसी की परवाह किए बिना चारों ने घर छोड़ दिया।

लड़कियों ने हिंदू धर्म में आस्था जताकर ना सिर्फ मतांतरण किया, वरन सात फेरे लेकर एक-दूजे के हो गए। कहानी की शुरुआत एक फोन काल के जरिये तीन साल पहले हुई। नूर फातिमा व गौरव कुमार के बीच बातचीत शुरू हुई। दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे। मिलना-जुलना शुरू हुआ। इस दौरान नूर की दोस्त स्वालेहीन भी साथ जाती। इधर, गौरव के साथ उसका जिगरी यार अमित कुमार साथ रहता।

नूर व गौरव एक-दूजे से बात करते। इस दौरान स्वालेहीन व अमित अलग होकर बातचीत करने लगे। धीरे-धीरे एक प्रेम कहानी इधर भी शुरू हो गई। एक साथ दो प्रेम कहानियां चलने लगीं। दोनों ही जोड़ों ने एक-दूसरे संग जीने मरने की कसमें खा लीं। मोहब्बत की कहानी परिवार तक पहुंची तो धर्म आड़े आ गया। मगर, एक-दूजे के होने का संकल्प ले चुके दोनों जोड़ों ने 12 जुलाई को घर छोड़ दिया। गाजियाबाद स्थित आर्य समाज मंदिर पहुंचे। वहां आचार्य प्रेमदेव शास्त्री से मिले।

शादी की इच्छा जताई और बालिग होने के प्रमाण-पत्र सौंपे। इसके बाद दोनों मुस्लिम लड़कियां इस्लाम धर्म त्यागकर हिंदू बन गई। नूर फातिमा की नई पहचान नीलम व स्वालेहीन शालिनी हो गई। शादी के बाद लड़कियों ने बताया कि बालिग हूं। मर्जी से शादी की है, कोई जबरदस्ती नहीं है। इंस्पेक्टर शरद मलिक ने बताया कि प्रकरण में जानकारी मिली है। अभी तक शिकायती पत्र नहीं मिला है। शिकायती पत्र मिलने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री और पुलिस से सुरक्षा की मांग

विवाह के बाद जोड़ों ने एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वीडियो प्रसारित करते हुए मुख्यमंत्री और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। कहा कि हम बालिग हैं। एक-दूसरे से प्यार करते हैं। मैंने अपनी मर्जी से शादी की है। मुख्यमंत्री और पुलिस हमारी सुरक्षा करे। शालिनी ने भी वीडियो जारी कर यही बात कही है.

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