वकील द्धारा केश प्रकरण के तथ्यों को छुपाना एक गंभीर अपराध
नई दिल्ली। भारतीय विधि न्याय प्राधिकरण और भारतीय अधिवक्ता अधिनियम के अनुसार वकील द्वारा अपने पक्षकार के समक्ष मामले के तथ्यों को छुपाना एक गंभीर अपराध और पेशेवर कदाचार माना जाता है। इसके लिए भारतीय कानून के तहत कठोर दंड का प्रावधान है।
कानूनी प्रावधान और सजा अधिवक्ता अधिनियम 1061
(Advocates Act, 1961): इस अधिनियम की धारा 35 के तहत, यदि किसी वकील के खिलाफ पेशेवर कदाचार की शिकायत राज्य बार काउंसिल (State Bar Council) को मिलती है, तो मामला अनुशासनात्मक समिति (Disciplinary Committee) को भेजा जाता है। अनुशासनात्मक समिति सुनवाई के बाद दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित आदेश दे सकती है.वकील को फटकार (Reprimand)।
एक निश्चित अवधि के लिए प्रैक्टिस करने से निलंबित (Suspend) करना।
वकील का नाम राज्य रोल ऑफ एडवोकेट्स (State roll of advocates) से हटाना, जिससे वह आगे वकालत नहीं कर पाएगा भारतीय दंड संहिता (IPC). वकील पर भारतीय दंड संहिता की कुछ धाराओं के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, यदि उसका कृत्य किसी अपराध की श्रेणी में आता है.
धारा 201: यदि कोई व्यक्ति (वकील सहित) किसी अपराध के साक्ष्य (evidence) को छिपाने या अपराधी को बचाने के इरादे से झूठी जानकारी देता है, तो उसे कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
धारा 209: यदि कोई वकील बेईमानी से या धोखाधड़ी के इरादे से अदालत में झूठा दावा करता है, तो यह एक अपराध है।
न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court): यदि वकील का आचरण अदालत की गरिमा और न्याय प्रशासन को कमजोर करता है (जैसे कि जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाना), तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जा सकता है, जिसके लिए उसे सजा मिल सकती है।
ग्राहक के अधिकार और उपाय
यदि कोई वकील मामले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो ग्राहक (client) के पास निम्नलिखित उपाय हैं:
राज्य बार काउंसिल में शिकायत ग्राहक संबंधित राज्य बार काउंसिल में वकील के खिलाफ पेशेवर कदाचार की लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है।
अदालत को सूचित करना चाहिए. ग्राहक सीधे अदालत के संज्ञान में ला सकता है कि उसका वकील तथ्यों को छुपा रहा है। अदालत ऐसे मामलों में वकील और याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगा सकती है या मामले को खारिज कर सकती है।
वकील का प्राथमिक कर्तव्य न्याय प्रशासन में अदालत की सहायता करना है, जो ग्राहक के प्रति अपने दायित्वों से भी ऊपर है। तथ्यों को छुपाना इस कर्तव्य का घोर उल्लंघन है
जो वकील अपने मुवक्किल को केस के बारे में जानकारी नहीं बताता, वह वकील के कर्तव्यों का उल्लंघन कर रहा है। ऐसी स्थिति में, मुवक्किल वकील बदल सकता है या राज्य बार काउंसिल में शिकायत कर सकता है। वकील को अपने मुवक्किल के हित में काम करना चाहिए और पूरी जानकारी देनी चाहिए, जैसे कि किसी भी गवाह या सबूत को न छिपाना और स्पष्ट और दो टूक तरीके से बात करना।
वकील की जिम्मेदारियां
ईमानदारी और निष्ठा: वकील का अपने मुवक्किल के प्रति सर्वोच्च प्रत्ययी कर्तव्य है और उसे ईमानदारी से काम करना चाहिए। केशव प्रकरण के संबंध मे जानकारी देना चाहिए. वकील को मुवक्किल को मामले से जुड़ी हर प्रासंगिक जानकारी देनी चाहिए, जिसमें यह भी शामिल है कि वे बचाव के लिए क्या योजना बना रहे हैं। वकील ने सदैव कानून हित की रक्षा करना चाहिए. वकील को हमेशा अपने पक्षकार के हित में काम करना चाहिए और उससे कोई भी जानकारी नहीं छिपानी चाहिए।
ऐसी स्थिति में क्या करें
वकील बदल लेना चाहिए. यदि आप अपने वकील के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अदालत को सूचित करके और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करके वकील बदल सकते हैं।
राज्य बार काउंसिल से संपर्क कर सकते हैं. आप अपने राज्य बार काउंसिल में वकील के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। Kaanoon और Dainik Bhaskar में दी गई जानकारी के अनुसार, ऐसा करने से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत में अपनी फाइल देखें: यदि आप अपने वकील के जवाबों से नाखुश हैं, तो आप अदालत जाकर अपनी केस फ़ाइल देख सकते हैं, जिसमें वे सभी कागज़ात शामिल हैं जो अदालत में दायर किए गए हैं। यदि आप किसी अन्य वकील को नियुक्त करते हैं, तो वह इसमें आपकी मदद कर सकता है। अन्यायग्रस्त पक्षकार विधि न्याय प्राधिकरण की ओर से
मुफ्त कानूनी सहायता ले सकता हैं. यदि आप वकील को नियुक्त करने का खर्च नहीं उठा सकते हैं, तो आप अपने क्षेत्र के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी सहायता ले सकते हैं
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