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नागपूर के कोराडी स्थित सुरादेवी की पहाडी के भूगर्भ मे डोलामाईन,तांबा और अभ्रक का भंडार : रांगोली पत्थर

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नागपूर,कोराडी । सफेद दानेदार रंगोली पत्थर उगलने वाला पुराना कोराडी परिसर और सुरादेवी की सूखी पहाडी के भूगर्भ मे लाखों-करोडों मीट्रिक टन डोलामाईन और अभ्रक का भंडार छिपा हुआ है। खनिज एवं भू- विज्ञानिकों के मुताबिक जिस भूमि पर अभ्रक होता है उक्त भूमि के भीतर कापर तांबा अयस्क उपलब्ध होने के चांशेस है।
पुरानी कोराडी गांव के प्रबुद्ध बुजुर्ग लोग बतलाते हैं कि यहां प्रचुर मात्रा मे रंगोली पत्थर पाये जाते थे। जिसके भरोसे पर यहां रंगोली का धंधा बहुत चलता था। पुरानी कोराडी का 80% प्रतिशत स्थानीय तापीय बिजली परियोजना के लिए अधिग्रहित हो जाने तथा कोराडी गांव का अन्यत्र पुनर्वास हो जाने की वजह से यहां का रंगोली व्यवसाय चौपट सा हो गया है। नतीजतन व्यवसायी रंगोली कंकण भेड़ाघाट जबलपुर और अन्यत्र स्थानों से मंगाते है।
आज से 15-20 साल पूर्व भूगर्भ खनिज गणवेश विभाग की तरफ से भूगर्भ की जांच-पड़ताल की गई थी। जिसमे काफी मात्रा मे डोलामाईन,अभ्रक और तांबे के अयस्क चिन्हित किए गए थे। खनिज विभाग ने अनेक सालों से नागपुर जिले की धरती में दबे अन्य खनिज का पता करने के प्रयास में जुटा है। इस संबंध में केंद्र सरकार के मिनरल एक्सप्लोशन कारपोरेशन सेंट्रल जोन नागपुर की एक रिपोर्ट सकारात्मक रही है। इसके अनुसार सब कुछ सही रहा तो इस क्षेत्र की मेगनीज, डोलामाईन कॉपर, अभ्रक और रंगोली के रूप में होने का दावा किया था। भारत सरकार का खान ब्यूरो मुख्यालय सेमीनरी हिल नागपुर मे संचालित है। इस खनिज मुख्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जमीन के भूगर्भ मे सोना, तांबा, अभ्रक की मात्राएं पाई जाती है? परंतु खनिज उत्खनन का खर्च अधिक और उत्पादन 25 प्रतिशत होगा? इसलिए सरकार घाटे वाला उपक्रम शुरु करना मुनासिब नही समझती है?

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*1980 में भी मिले थे संकेत, लेकिन आगे नहीं बढ़ा सर्वे*

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इस क्षेत्र में डोलामाईन और अभ्रक रंगोली संकेत 1980 में ही मिल गए थे, लेकिन कई कारणों से सर्वे कार्य गति नहीं पकड़ नहीं पाया। बाद में आधुनिक संसाधनों व सेटेलाइट से खोज पूरी हुई तो प्रचुरता वाली कई जमीनें चरागाह एवं रक्षा मंत्रालय की आधीन होने से मामला प्रलंबित रह गया।
हालकि नागपुर जिले के रामटेक तहसील के गुमगांव,मन्सर और पारसिवनी तहसील के खापा की जमीन मे लोह अयस्क और मेगनीज के साथ डोलामाईन भारी मात्रा मे पाया जाता है और यहां सरकार की तरफ से उत्खनन भी शुरू है। परिणामतः इससे सरकार को करोडों का राजस्व लाभ मिल रहा है।
खान ब्यूरो कार्यालय के मुताबिक भंडारा साकोली तुमसर,रामटेक, पारसिवनी, नरखेड ,काटोल से लेकर अमरावती जिले के मेलघाट धारणी तक इस बेल्ट मे प्रचुर मात्रा मे खनिज संपदा का भंडारण पाया गया है। इस एरिये में दुर्लभ प्रकार का पत्थर, पानी के द्वारा बही गई पतली मिटटी की परत पाई गई है। सेप्टिक पत्थर और अम्लीय ज्वालामुखी के अंश भी देखे गए हैं।

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