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विकास कार्यों से भ्रष्टाचार अलग कर दें,तो सपने हो सकते हैं साकार!

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रायपुर । बीकेएस रे, पूर्व अपर मुख्य सचिव,
रायपुर. छत्तीसगढ़ के सामने सबसे बड़ी समस्या विकास की है। विकास का अर्थ है कि जो भी बने, उसमें उच्च गुणवत्ता हो।उन्होने कहा कि विकास तो हो रहा है, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला है। भ्रष्टाचार और विकास दोनों साथ-साथ नहीं चलना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि विकास के काम में हो रहे खर्च में पारदर्शिता हो। केवल सड़क और बिल्डिंग ही काफी नहीं है।
भ्रष्टाचार की स्थिति ठीक नहीं है। विकास में गांव-गरीबों की भागीदारी होनी चाहिए। लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि उनके लिए कुछ हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी राज्य के विकास की मूलभूत जरूरत है। छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों को छोड़ दें तो ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में आज भी शिक्षा की स्थिति दयनीय है।
आदिवासी इलाकों के बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। सरकार केवल शहरों में बनने वाली सड़क और बिल्डिंग को विकास मानती है, जबकि विकास का मतलब प्रदेश के दूरस्थ अंचल और आदिवासी इलाकों का विकास है। बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा चाहिए, ताकि वे दूसरे बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। शिक्षा से उनमें जागरूकता बढ़ेगी और वे समाज में बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। कुपोषण हर हाल में खत्म होना चाहिए। कुपोषित समाज कभी भी विकास नहीं कर सकता। आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा हो सकती है।,

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