जानिए सिर में शिखा-चोटी रखने के आध्यात्मिक रहस्य एवं विशेषताएं
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
क्यों रखी जाती है सिर पर शिखा या चोटी? जानिए इसके धार्मिक धार्मिक मान्धाता और वैज्ञानिक कारण
असल मे वैदिक सनातन धर्म संस्कृति में सिर पर शिखा चोटी को कहा जाता है. चोटी रखने की प्रथा वैदिक कालीन राजर्सी महर्षियों और ऋषि मुनि महात्माओं के समय से चली आ रही है. जिसका पालन हिन्दू धर्म में अभी तक किया जा रहा है. चोटी रखने को लेकर विज्ञान ने भी अपना सकारात्मक पक्ष रखा है. आइए जानते हैं कि क्यों सनातन हिंदू धर्म में चोटी-शिखा की अनेक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य की विशेषताएं हैं।
वैदिक सनातन धर्म में पैदा होने से लेकर मृत्यु तक कई सारे संस्कार और मान्यताएं होती हैं. जिनका अपने अपने समय पर महत्व रहता है. जब बच्चा पैदा होता है उसके बाद उसका मुंडन संस्कार किया जाता है. उसे द्विज कहा जाता है इसका मतलब बच्चे का दूसरा जन्म है. इसके अलावा और भी संस्कार हैं जिनमें से एक है सिर पर शिखा या चोटी रखना. वैदिक संस्कृति में शिखा चोटी को कहा जाता है. चोटी रखने की प्रथा ऋषि मुनि के समय से चली आ रही है. जिसका पालन हिन्दू धर्म में अभी तक किया जा रहा है. चोटी रखने को लेकर विज्ञान ने भी अपना सकारात्मक पक्ष रखा है. आइए जानते हैं कि क्यों हिंदू धर्म में चोटी रखना अनिवार्य बताया गया है.
*क्या कारण है चोटी रखने की विशेषताएं*
बच्चे का जब भी मुंडन किया जाता है या फिर किसी के घर में बुजुर्ग का निधन हो जाता है तो जो व्यक्ति अपना सिर मुंडवाता है, उस समय सिर पर थोड़े से बाल छोड़ दिए जाते हैं. जिसे चोटी या शिखा कहा जाता है. यह संस्कार यज्ञोपवित या जनेऊ के समय भी किया जाता है. सिर में जहां पर चोटी रखी जाती है वो जगह सहस्त्रार चक्र कहलाती है. ऐसी मान्यता है कि सहस्त्रार चक्र के नीचे ही मनुष्य की आत्मा का वास होता है.
*ज्योतिष शास्त्र एवं विज्ञान के अनुसार*
आध्यात्मि-वैदिक विज्ञान के अनुसार सिर-मस्तिष्क की केंद्र बिन्दू पर स्थित शिखा में नभमंडल और स्वर्गलोक से दैविक और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है? परिणामत: तपस्वी ऋषि मुनियों में त्रिकाल दर्शी का होना शिखा ही का महत्व माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म के पुरातनवादी वैज्ञानिकों ने शिखा के महत्व का अध्ययन के पश्चात ही दूरदर्शन दूरसंचार रेडियो के परिचालन के लिए गगनचुंबी इमारतों और भवन की छत पर एनटीना के जरिए देश विदेशों के प्रोग्राम जानने और देखने के लिए ऐनटीना लगाना शुरु किया है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य के मस्तिष्क की केंद्र बिन्दू शिखा के जरिए आध्यात्मिक ऊर्जावान ज्योतिष ज्ञान विज्ञान की प्राप्ति होती है।
विज्ञान कहता है कि इस स्थान पर मस्तिष्क का केंद्र होता है. इसी स्थान से शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित किया जाता है.ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जिसकी कुंडली में राहु नीच का हो या फिर बुरा असर दे रहा हो तो उसे सलाह दी जाती है कि वह माथे पर तिलक लगाए और सिर पर चोटी रखे.
जानकारों के अनुसार जिस स्थान पर चोटी रखी जाती है वहां से मस्तिष्क संतुलन में रहता है. इससे सहस्त्रार चक्र जागृत रहता है. चोटी रखने से सहस्रार चक्र को जागृत करने और बुद्धि, मन और शरीर पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है.
*धार्मिक और आध्यात्म ग्रंथों के अनुसार*
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता है कि सहस्रार चक्र का आकार गाय के खुर के समान होता है. इसीलिए चोटी भी गाय के खुर के बराबर ही रखी जाती है.इसलिए इसे गोमुख भी कहते है।
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