जानिए शगुन-अपशगुन नहीं? आंखें फड़कने की असली वजह हैं कोई गंभीर बीमारी
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक किसी महिला की बाईं आंख फड़कती है तो इसका अर्थ है उसे साथ कुछ अच्छा होने वाला है. लेकिन वहीं बाईं आंख का फड़कना महिलाओं में शुभ नहीं होता. इसका अर्थ है आपके साथ कुछ बुरा होने वाला है या फिर कोई दुर्घटना होने वाली है. वहीं पुरुषों की बात करें तो पुरुषों में दाहिनी आंख का फखड़ना शुभ माना जाता है.
जबकि आयुर्विज्ञान के मुताबिक आंख फड़कने से कौन सी बीमारी हो सकती है?जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं तो वो फड़कने लगती हैं। इसके कई आम कारण होते हैं। ज्यादातर मामलों में स्ट्रेस, आई स्ट्रेन, नींद की कमी और एल्कोहल का अधिक सेवन होता है। इसके अलावा जिन्हें विजन संबंधी प्रॉब्लम्स होती हैं, उनकी आंखों पर अधिक जोर पड़ने पर फड़कने लगती हैं।
आंखों का फड़कना बेहद आम बात है और यह कभी भी शुरू हो सकता है और कुछ देर बाद खुद ही ठीक हो जाता है। हालांकि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो गंभीर बीमारी की चेतावनी हो सकती है।
आंखों का फड़कना कोई शगुन-अपशगुन का संकेत नहीं, बार-बार आंखें फड़कने की असली वजह हैं ये 3 गंभीर बीमारियां मुख्य कारण हैं।
भारत में शारीरिक अंगों के साथ होने वाली ज्यादातर छोटी-मोटी एक्टिविटी को अंधविश्वास से जोड़कर देखा जाता है। इन्हीं धारणाओं में आंख फड़कना भी शामिल है। ज्यादातर लोग इसे शुभ और अशुभ का कारण मानते हैं। आमतौर पर आंखों का फड़कना आम बात होती है और पलक की मांसपेशियों में ऐंठन के कारण किसी की भी आंख फड़कना शुरू हो सकती है। इस वजह से आंखों के फड़कना का असर ज्यादातर ऊपरी पलक पर होता है और कुछ मिनट या घंटे में अपने आप ही बंद हो जाती है। हालांकि अगर नीचे और ऊपर की दोनों पलके फड़कने लगे और ऐस हफ्तों या इससे ज्यादा समय तक बना रहे तो यह गंभीर बीमारी की चेतावनी भी हो सकती है।
आंखों के फड़कने को मेडिकल भाषा में ‘Myokymia’ कहा जाता है। जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं तो वो फड़कने लगती हैं। इसके कई आम कारण होते हैं। ज्यादातर मामलों में स्ट्रेस, आई स्ट्रेन, नींद की कमी और एल्कोहल का अधिक सेवन होता है। इसके अलावा जिन्हें विजन संबंधी प्रॉब्लम्स होती हैं, उनकी आंखों पर अधिक जोर पड़ने पर फड़कने लगती हैं।
इसके अलावा अधिक कैफीन वाले चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स और चॉकलेट भी इसकी वजह हो सकती है। हालांकि इन सभी कारणों से अगर आंख फड़क रही है तो वह एक-दो दिन में बंद हो जाती हैं। NIH की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई दिनों तक लगतार आंख फड़क रही है तो यह गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। मेडिकल में आंख फड़कने की तीन अलग-अलग स्थित बताई गई है, जिसे मायोकेमिया, ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेशियल स्पाज्म कहा जाता है।
इस स्थित में आंखों का फड़कना हल्का होता है। यह सबसे सामान्य कारण है, जोकि लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ है। यह कभी-कभार होता है और कुछ घंटों या फिर एक-दो दिन में अपने आप ही ठीक हो जाता है। यह स्ट्रेस, आंखों की थकावट, कैफीन का उच्च सेवन, नींद का पूरा न होना या फिर मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल से होता है।
इसे आंखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी माना जाता है। यह बीमारी तब होती है, जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जब अपनी पलकें झपकाता है तो उसे दर्द महसूस होता है। इसमें कई बार आंखों को खोलना मुश्किल हो जाता है, आंखों में सूजन रहती है और धुंधला दिखने लगता है। पलक के साथ आंखों के आसपास की मांसपेशियां भी फड़कने लगती हैं।
इस बीमारी में चेहरे का आधा हिस्सा सिकुड़ जाता है और इसका असर आंख पर भी पड़ता है। इस बीमारी की वजह से पहले आंखे फड़कती हैं और फिर गाल और मुंह की मांसपेशियां भी फड़कने लगती हैं। यह आमतौर पर किसी तरह के जलन और चेहरे की नसों के सिकुड़ने के कारण होता है। इस तरह का फड़कना लगातार बनी रहती है। इसमें बैन पल्सी, सर्विकल डिस्टोनिया, डिस्टोनिया, मल्टीपल सेलोरोसिस और पार्किन्सन जैसे विकार शामिल हैं।
अगर आपकी आंख फड़क रही है तो उसे आराम दें। लंबी वॉक पर जाएं, एक्सरसाइज करें। खुद को दोस्तों या परिवार के बीच व्यस्त करें और समय मिले तो आप अच्छी नींद लें। जिससे आंखों का फड़कना कम हो सकता है। इस दौरान मोबाइल या टीवी चलाने से बचें
अगर आपको आंख फड़कने की समस्या ज्यादा होती है तो अपनी डाइट से कैफीन वाले ड्रिंक्स और जंक फूड को कम करें। डेली डाइट में स्वस्थ हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें। साथ ही खूब सारा पानी पिएं, जिससे शरीर डीटॉक्स हो और उसे जरूरी पोषक तत्व मिलें।
अगर आपको लंबा समय कंप्यूटर के सामने बीतता है तो अपने डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेंट आई-ड्रॉप का इस्तेमाल करें। इसे दिन में 2-3 बार जरूर आंख में डालें। इससे आपकी आंखों में जरूरी नमी बनी रहेगी और ड्राई आई की समस्या दूर होगी।
आंखों का चेकअप जरुर कराएं
नियमित रूप से आंखों का चेकअप जरूर करवाना चाहिए, ताकि आंखें अगर कमजोर पड़ रही हैं तो उनका समय से इलाज किया जा सके। इससे आंखों पर कम दबाव पड़ेगा और वे बेहतर तरीके से काम कर सकेंगी।
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त लेख केवल सामान्य ज्ञान जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह का शगुन व अपशगुन नहीं अपितु अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने अनुभव कुशल डॉक्टर से संपर्क करें
विश्वभारत News Website