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जानिए चुनावी राज्यों में मोदी-मोदी? कांग्रेस नेतृत्व और उनका एजेंडा कहां है?

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जानिए चुनावी राज्यों में मोदी-मोदी? कांग्रेस नेतृत्व और उनका एजेंडा कहां है?

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टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक:मो•9822550220

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नई दिल्ली। 2024 लोकसभा चुनाव की तारीख अभी नहीं आयी है, लेकिन कैंपेन शुरू हो चुके हैं. हफ्ते भर की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी राज्यों में 7 रैलियां कर चुके हैं, लेकिन राहुल गांधी का ज्यादा जोर छवि सुधार अभियान पर ही देखने को मिला है. कांग्रेस शासन वाले राज्यों को लेकर भी वैसा ही रवैया है.

कांग्रेस शासन वाले राज्यों में भी मोदी के मुकाबले राहुल गांधी की कम मौजूदगी हैरान करती है

चुनाव की तारीख अभी आयी तो नहीं है, लेकिन जल्दी ही आने वाली है. ऐसा संकेत हो चुका है. वैसे भी निर्धारित समय से पहले चुनाव आयोग को नये चुनाव करा कर नतीजे तो घोषित करने ही होंगे.

तारीख अपनी जगह है, और तैयारी अपनी जगह. चुनावी मशीन बन चुकी बीजेपी तो प्रचार में पहले से ही लगी हुई थी, अब तो उसका कैंपेन रफ्तार भरने लगा है. जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, दो राज्यों में कांग्रेस की सरकार है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में. राजस्थान में बीजेपी और तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति की सरकार है.

बीते हफ्ते भर की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी राज्यों में 7 रैलियां कर चुके हैं, लेकिन राहुल गांधी का ज्यादा जोर अभी तक अपने छवि सुधार अभियान पर ही देखने को मिल रहा है. कोई ये तो नहीं कह सकता कि राहुल गांधी ने चुनावी राज्यों में कदम तक नहीं रखे, लेकिन मोदी के मुकाबले राहुल गांधी की मौजूदगी न के बराबर नजर आ रही है।

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PM मोदी ने जबलपुरकी सभा में कहा कि ‘न खजाना लूटने दूंगा, न कांग्रेसियों को तिजोरी भरने दूंगा? इस पर जन समुदाय ने तालियों की थपथपाकर से भाजपा सरकार का जोरदार स्वागत किया।
कैंपेन के दौरान हर रैली में मोदी के निशाने पर कांग्रेस और पूरा विपक्ष नजर आता है, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ मोदी को टारगेट करते हैं. पीछे से सोशल मीडिया पर मुकाबले में राहुल गांधी को जननायक के तौर पर पेश किया जाता है – हाल फिलहाल तो बीजेपी और कांग्रेस के बीच पोस्टर वॉर भी चालू है, जिसका थीम रावण है. असल में बीजेपी की तरफ से एक पोस्टर जारी किया गया है जिसमें राहुल गांधी को रावण के रूप में दिखाया गया है. बीजेपी की तरफ से ये बदले की कार्रवाई भी लगती है, क्योंकि गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी की तुलना रावण से कर डाली थी. वैसे कांग्रेस की तरफ से महासचिव जयराम रमेश ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी है.

कैंपेन में चुनावी एजेंडे की बात करें तो भी वैसा ही हाल नजर आता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर जगह बीजेपी का एजेंडा पेश करते हुए समझा भी रहे हैं, राहुल गांधी और कांग्रेस उसके लिए सोशल मीडिया की मदद ले रही है.

एक तरफ बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी कैंपेन की अगुवाई कर रहे हैं, साथ में पार्टी के बाकी नेता भी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे मोर्चा संभाल रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेवा करते नजर आ रहे हैं, या ऐसे ही किसी और जगह.

राज्यों में चुनाव तो विधानसभा के लिए होने जा रहे हैं, लेकिन तैयारी सभी की आम चुनाव 2024 की है. कांग्रेस चाहती है कि अगले आम चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन INDIA खड़ा हो जाये ताकि प्रधानमंत्री मोदी को मैदान में चैलेंज किया जा सके. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की भी नजर आम चुनाव पर ही है.

बीजेपी जहां आम चुनाव के लिए विधानसभा चुनावों के पहले ही रिहर्सल शुरू कर चुकी है, कांग्रेस अभी तक लगता है एक्शन प्लान ही फाइनल नहीं कर पायी है. ये ठीक है INDIA गठबंधन में अभी सीटों के बंटवारे पर ही पेच फंसा हुआ है, लेकिन कांग्रेस अपने स्तर पर तो काम कर ही सकती है.

ऐसा तो है नहीं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कांग्रेस को यूपी, पश्चिम बंगाल और पंजाब की तरह दूसरे दलों की कृपा का इंतजार है. जहां कहीं भी वो मजबूत स्थिति में है या सीधे सीधे बीजेपी से टक्कर लेने की स्थिति में चुनाव प्रचार के कार्यक्रम फाइनल तो कर ही सकती है.

2 और 3 अक्टूबर को राहुल गांधी जब अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेवा कर प्रसाद ग्रहण कर रहे थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे थे. 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में चितौड़गढ़ का दौरा किया तो मध्य प्रदेश के ग्वालियर भी पहुंच गये और लोगों को समझाते रहे कि क्यों उनके लिए बीजेपी को वोट देना फायदेमंद हो सकता है, और कांग्रेस या किसी और दल के लिए नहीं. ऐसे ही 3 अक्टूबर को वो जगदलपुर, बस्तर में बीजेपी के लिए वोट तो मांगे ही, तेलंगाना के निजामाबाद भी चुनाव प्रचार करने पहुंच गये थे.

निश्चित तौर पर कनाडा के मुद्दे पर पंजाब में कोहराम मचा हुआ है. ये भी है कि पंजाब कांग्रेस के लिए बहुत ही संवेदनशील मामला है. ऑपरेशन ब्लूस्टार से लेकर सिख दंगों तक 1984 की घटनाओं को लेकर कांग्रेस हमेशा ही बचाव की मुद्रा में रही है – लेकिन चुनाव काल में जब सत्ता के लिए करो या मरो वाली स्थिति बनी हुई हो, अगर राहुल गांधी अपनी और कांग्रेस की छवि सुधारने में जुटे हों तो क्या समझा है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे मोर्चा संभाल रहे हैं, लेकिन राजस्थान को लगता है पूरी तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हवाले छोड़ दिया गया है.

हो सकता है कांग्रेस को लगता हो कि राजस्थान में लड़ाई मोदी बनाम गहलोत बन जाये तो ज्यादा फायदा हो सकता है. 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव की बात करें तो वो वसुंधरा राजे बनाम सचिन पायलट बन गया था. ये बात अलग है कि चुनाव नतीजे आने के बाद गहलोत फैल गये और मुख्यमंत्री बन कर ही माने. उससे पहले 2013 का चुनाव वसुंधरा बनाम गहलोत जरूर बना था, लेकिन बाजी बीजेपी के हाथ लगी थी.

विगत 2018 और 2013 की बात करें तो नेतृत्व राहुल गांधी ने अपने हाथ में रखा था, लेकिन इस बार सब कुछ अशोक गहलोत के हवाले है. ये फैसला कांग्रेस नेतृत्व का है या फिर अशोक गहलोत ने अघोषित नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा है, अंदर की बात है. देखने में आया है कि अशोक गहलोत अब तक 100 के आस पास सार्वजनिक सभाएं कर चुके हैं, जबकि राहुल गांधी की तीन ही रैली हो पायी है. हां, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की भी एक एक रैली हुई है. निजी तौर पर सचिन पायलट भी कुछ रैलियां कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश में प्रियंका गांधी कांग्रेस की जन आक्रोश रैली में जरूर हिस्सा ले रही हैं. मध्य प्रदेश के धार में 5 अक्टूबर को प्रियंका गांधी की रैली हुई थी. 4 अक्टूबर को मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ में थे.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली को काउंटर करने के लिए 5 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी जबलपुर पहुंचे थे, और उसी दिन राजस्थान के जोधपुर में भी रैली कर डाले थे.
कांग्रेस के प्रभाव वाले तीन राज्यों को लेकर राहुल गांधी का एक बयान काफी चर्चित हुआ था. राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस की जीत का दावा किया था, लेकिन राजस्थान में कांटे की लड़ाई बता डाली थी. अब इस बयान के पीछे राहुल गांधी की जो भी रणनीति हो, लेकिन ये चीज अशोक गहलोत की तो मुसीबत बढ़ाने वाली ही है.

राजस्थान को लेकर बीजेपी नेतृत्व भी कांग्रेस की तरह अंदरूनी कलह से परेशान है, लेकिन राहुल गांधी की तरह मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह ने मामला क्षेत्रीय नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा है. प्रधानमंत्री मोदी अपनी रैलियों के जरिये विधानसभा चुनाव के साथ साथ लोक सभा के लिए भी एजेंडा एक एक करके सेट करते जा रहे हैं.

तुष्टिकरण: राजस्थान में बीजेपी की परिवर्तन यात्राओं के समापन के मौके पर कानून व्यवस्था के बहाने बीजेपी के वोटर को सीधा संदेश दे डाला. त्योहारों का जिक्र और उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या को मोदी ने वैसे ही समझाया जैसे 2017 के यूपी चुनाव में श्मशान और कब्रिस्तान वाली बहस छेड़ी थी. कन्हैयालाल हत्याकांड की चर्चा कर मोदी ने कहा कि कांग्रेस के राज में राजस्थान में पहली बार आतंकी और तालिबानी हमले हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस हमेशा ही तुष्टिकरण की नीति को बढ़ावा देती है.

कानून-व्‍यवस्‍था: एक रैली में मोदी कह रहे थे, ‘जोधपुर में जब दंगे हो रहे थे… निर्दोष मारे जा रहे थे… तब यहां के मुख्यमंत्री क्या कर रहे थे? कांग्रेस की पहली और आखिरी नीति सिर्फ और सिर्फ तुष्टिकरण ही है… रामनवमी, परशुराम जयंती, हनुमान जयंती कोई भी ऐसा त्योहार नहीं है जब राजस्थान में पत्थरबाजी की घटनाएं ना हुई हों.’

भ्रष्‍टाचार: प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान की चर्चित लाल डायरी के बहाने राजस्थान में भ्रष्टाचार का जिक्र भी करते हैं और कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करते हैं. दूसरे राज्यों में भी ऐसा कोई न कोई मामला उठा ही लेते हैं – और एक बात याद दिलाना नहीं भूलते कि ‘मोदी की गारंटी मतलब काम पूरा होने की गारंटी’ होती है.

राष्‍ट्रवाद बनाम एंटी नेशनल: और अब तो ‘वैक्सीन वॉर’ के बहाने बीजेपी के राष्ट्रवाद का एजेंडा भी बढ़ाया जाने लगा है. जोधपुर की रैली में प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, ‘मैंने सुना है एक फिल्म आई है द वैक्सीन वॉर… भारत में कोविड से लड़ाई लड़ने के लिए हमारे देश के वैज्ञानिकों ने जो रात-दिन मेहनत की… अपने लैब में एक ऋषि की तरह साधना की… फिल्म में सभी बातों को दर्शाया गया है… मैं यह फिल्म बनाने वालों को बधाई देता हूं कि उन्होंने ये फिल्म बनाकर वैज्ञानिकों और विज्ञान को महत्व दिया.’

ये समझना तो मुश्किल नहीं लगता कि नयी फिल्म का जिक्र कर कांग्रेस और विपक्ष को वैसे ही टारगेट करने की कोशिश है जैसे फिल्म कश्मीर फाइल्स, CAA-NRC और ऐसे कई मुद्दों के जरिये बीजेपी नेतृत्व की तरफ से राजनीतिक विरोधियों को एंटीनेशनल बताने का सिलसिला चला आ रहा है.

पांच चुनावी राज्यों में सिर्फ तेलंगाना ही ऐसा है जहां मोदी-शाह और राहुल गांधी आमने सामने दो-दो हाथ करते देखे जा सकते हैं. तेलंगाना में नये सिरे से सत्ता पर काबिज होने की कोशिश चल रही है, जबकि शुरू से ही वहां केसीआर के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का दबदबा बरकरार है – और वो बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस के भी लगातार निशाने पर हैं.

जुलाई, 2023 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक तो सितंबर, 2023 में कांग्रेस की CWC की मीटिंग तेलंगाना में ही हुई थी, जाहिर है मकसद तो एक ही रहा होगा. केसीआर को टारगेट करने के मामले में मोदी और राहुल गांधी दोनों ही एक दूसरे पर हमला भी बोलते रहते हैं. जब मोदी ने केसीआर की पार्टी BRS को भारतीय रिश्तेदार समिति कह कर संबोधित किया, तो राहुल गांधी ने उसे बीजेपी रिश्तेदार समिति बता डाला.

महिला आरक्षण के ओबीसी का हिस्सा मांगने के साथ ही राहुल गांधी जातीय जनगणना की डिमांड के साथ केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, और कांग्रेस की तरफ से एक वादा भी किया जा रहा है – ‘देश में सरकार बनते ही सबसे पहले जातिगत जनगणना कराएगी कांग्रेस.’

ये तो ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस को भले ही थोड़ी बहुत फिक्र हो, लेकिन राहुल गांधी को विधानसभा चुनावों की कोई खास चिंता नहीं लगती. बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के कैंपेन में सब ठीक ठाक ही है, सिवा राहुल गांधी की मौजूदगी के

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