कोराडी की प्रस्तावित 2×660 MW परियोजना निर्माण को CM शिंदे की हरी झंडी
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
कोराडी। प्रलंवित 660×2 मेगावाट क्षमता की प्रस्तावित विधुत परियोजना के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में मंत्रीमंडल की सभा में निर्णय लिया गया है। इससे कोराडी-कामठी ग्रामीण नागरिकों में हर्ष व्याप्त है। ज्ञातव्य है कि इस प्रस्तावित विधुत परियोजना निर्माण होने से नागपुर विदर्भ विभाग में बिजली की लोडशेडिंग की समस्या हल होगी तथा प्रत्यक्ष में 3,000 हजार और अप्रत्यक्ष में 5,000 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकता है। कोराडी में क्रिटिकल 660×2 =13,20 मेगावाट पहले से संचालित है? और प्रस्तावित नये 1320 मेगावाट का निर्माण पुरा होने पर यहां 2,640 मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजना उपलब्ध हो जाएगी।
इस परियोजना निर्माण लागत खर्च कुल खर्च 1हजार,625 रुपए आंका गया है। जिसमे 80% यानी रुपए 8,500 विधुत महानिर्मिती की तरफ से तथा रुपए 2,125 विविध बैंको की
तरफ से चरण बद्ध तरीके से ऋण लेकर बतौर खर्च किया जाना है। आगामी 5 सालों मे परियोजना बनकर तैयार हो जाएगी। इस परियोजना निर्माण के लिए कोराडी परिक्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों और नगर पंचायत की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान, जिलाधीश एसडीएम और तहसीलदार, विमानपत्तनम, नैशनल हाईवे की तरफ से हरी झंडी पहले ही मिल चुकी है।
इस प्रस्तावित विधुत परियोजना निर्माण में रुकावटें डालने के लिए नागपुर के समाज सेवी विदर्भ कनेक्ट के सचिव दिनेश नायडू, महावितरण के पूर्व निदेशक अनिल पालमवार, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. यह याचिका शरद पवार ने दायर की थी. जिसमें प्रदूषण के कारण महानिर्ती के परली, कोराडी, चंद्रपुर और भुसावल में कुल 1,250 मेगावाट क्षमता वाली छह बिजली उत्पादन इकाइयां पहले ही बंद कर दी गई है और उनके स्थान पर कोराडी परियोजना में 660 मेगावाट की दो इकाइयां का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। याचिका दायर कर्ताओं के अनुसार यदि इस परियोजना का विस्तार किया गया तो मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि खतरे में पड़ जायेगी। परियोजना में राख निपटान एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। पूर्व में राख के कारण क्षेत्र के नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है। विदर्भ में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक है। यह 16 हजार 296 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है। विदर्भ की आवश्यकता केवल 2000 मेगावाट है। शेष बिजली राज्य के अन्य हिस्सों में वितरित की जाती है। इसलिए याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परियोजना विस्तार के फैसले को रद्द करने की मांग याचिका में की थी? याचिकाकर्ताओं में सलाहकार तुषार मंडलेकर, सलाहकार। मोहित खजांची ने कार्य का निरीक्षण किया। याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी पर निर्णय लेने के लिए 29 मई, 2023 को महानीर्ति के कोराडी परियोजना क्षेत्र में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक सार्वजनिक सुनवाई की गई थी।
महानिर्मिती की स्थाई कमेटी की माने तो कोराडी विधुत केंद्र परिसर में पावर प्लांट निर्माण की औपचारिकता पूर्ण कर ली गई है?अब रहा सवाल प्रदूषण नियंत्रण मे सरकारी यंत्रणा सक्षम है। प्रदूषण की रोकथाम के उपाय योजना कार्यान्वित है? प्रदूषण से खतरे की संभावनाए नगण्य साबित हो रही है। रहा सवाल नागपुर शहर मे निरंतर छोटे बडे लाखों वाहनों के साईलैंसरों से निकलने वाला खतरनाक कार्वनडाय-आक्साइड युक्त जहरीले धुंआ से नागपुर शहर वासियों के जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है?
पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा 14 सितम्बर 2006 को ही अधिसूचना जारी करते हुए सार्वजनिक सुनवाई वैध बतलाई गई थी। जनसुनवाई का समुचित प्रचार-प्रसार बराबर होने के कारण ग्रामीण नागरिक सुनवाई में खुलकर भाग लिया था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस अवसर पर कई लोगों को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर महानिरीति के दोषी अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की भी मांग की गयी थी। परंतु महानिर्मिती मुख्यालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य याचिका कर्ताओं की बाजू सुनने के पश्चात न्यायालय ने सकारात्मक एवं राष्ट्रीय हित में डिसीजन लेने की पहल शुरु कर दी है। महाराष्ट्र सरकार की तरफ से विधान सभा की आदर्श आचार संहिता लागू होने के पूर्व उक्त पावर प्लांट का भूमिपूजन बतौर शिलान्यास का इंतजार है।
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