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संसदीय मर्यादाओं पर अतिक्रमण का मामला? TMC सांसद महुआ मोइत्रा की मुसीबत

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संसदीय मर्यादाओं पर अतिक्रमण का मामला? TMC सांसद महुआ मोइत्रा की मुसीबत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक की रिपोर्ट

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइटी) ने पुष्टि की है कि महुआ मोइत्रा की संसद की ईमेल आइडी दुबई से इस्तेमाल हो रही थी। हीरानंदानी सममूह के मालिक दर्शन हीरानंदानी ने भी आचार संहिता समिति को सौंपे शपथपत्र में कहा है कि अदाणी पर निशाना साधने के लिए उन्होंने महुआ मोइत्रा की ईमेल आइडी का उपयोग किया था। उन्होंने ऐसे प्रश्न तैयार किए जिन्हें वह संसद में उठा सकती थीं।
अवधेश कुमार। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े मामले से 18 वर्ष पूर्व की स्मृतियां फिर ताजी हो गईं हैं। 27 दिसंबर, 2005 को धन लेकर संसद में प्रश्न पूछने के आरोप में लोकसभा के 10 तथा राज्यसभा के एक सांसद को बर्खास्त कर दिया गया था। इनमें भाजपा के छह, बसपा के तीन तथा कांग्रेस और राजद के एक-एक सांसद शामिल थे। महुआ मोइत्रा के साथ क्या फिर इतिहास की पुनरावृत्ति होगी? इसका उत्तर अभी भविष्य के गर्त में है।
महुआ मोइत्रा बड़ी मुश्किल में फंस गईं, हीरानंदानी के आरोपों पर टालमटोल जवाब तो देखिए…
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर दर्शन हीरानंदानी ने संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने का आरोप लगाया है. महुआ ने उन आरोपों के जवाब बिंदुवार दिए हैं, जो काफी तकनीकी हैं. आइये देखते हैं कि क्यों में मुश्किल फंस गई हैं
यह किस्सा भारतीय राजनीति, कॉर्पोरेट जगत और कोर्ट का ऐसा कॉकटेल है जो पूरा देश जानना चाहता है. महुआ मोइत्रा पर लगे आरोप झूठे हैं या सही, इसी बात की मिस्‍ट्री महुआ की कहानी में थ्रिल पैदा करती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूंजीपति अडानी के संबंधों में घोटाला साबित करने की कोशिश महुआ मोइत्रा कर रही थीं, कहीं इतने बड़े लोगों को चैलेंज करने की सजा तो नहीं भुगत रही हैं मोइत्रा? हिंदुस्तान में एक कहावत है कि बिना आग धुआं नहीं दिखाई देता है. कुछ चीजें तो ऐसी रही ही होंगी जो महुआ को आज सफाई देनी पड़ रही है.
महात्मा गांधी इसलिए ही राजनीति में सादगी की बात करते थे. लुई वितां का बैग लेकर संसद में पहुंचने वाले के खिलाफ कोई सवाल उठाएगा तो संदेह के बादल तो बनेंगे ही. अब तक जो हीरानंदानी समूह कह रहा था कि इस मामले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है उसके सीईओ दर्शन हीरानंदानी खुद सरकारी गवाह बन गए हैं. हालांकि राजनीति में ऐसे आरोप लगते रहते हैं. तो इस तरह के आरोपों से घबराना कैसा? इससे बड़े आरोप लगने के बावजूद लोग साफ साफ बच निकले हैं. पर कुछ तथ्य ऐसे हैं जिनके चलते महुआ बुरी तरह फंस सकती हैं.
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हीरानंदानी समूह के सीईओ दर्शन हीरानंदानी ने अपने हलफनामे में कहा है कि उन्होंने अडानी ग्रुप के बारे में संसद में सवाल उठाने के लिए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के संसद के ऑफिशियल पोर्टल के लॉगिन का इस्तेमाल किया था. अपने हलफनामे में उन्होंने स्वीकार किया है कि सरकार के स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की कंपनी के एलएनजी टर्मिनल के बजाए ओडिशा में धामरा एलएनजी आयात सुविधा केंद्र को चुनने के बाद उन्होंने अडानी पर निशाना साधते हुए सवाल पूछने के लिए मोइत्रा के संसदीय लॉगिन का इस्तेमाल किया था.
दरअसल पासवर्ड और लॉगइन आईडी का यूज किसी और ने किया साबित हो जाता है तो यह मामला गंभीर हो जाएगा.और यह पता लगाना बहुत आसान भी है. पर इस मामले पर महुआ कोई जवाब देती नहीं दिख रही हैं. अपने ट्वीटर हैंडल पर वो निशिकांत दुबे द्वारा उनके आईपी एड्रेस की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए लेटर के जवाब में लिखती हैं कि सांसदों के सभी संसदीय कार्य पीए, सहायकों, प्रशिक्षुओं, बड़ी टीमों द्वारा किए जाते हैं. आदरणीय अश्विनी वैष्णव जी कृपया सीडीआर के साथ सभी सांसदों के स्थान और लॉगिन विवरण जारी करें. कृपया लॉगिन करने के लिए कर्मचारियों को दिए गए प्रशिक्षण की जानकारी है
रियल स्टेट कारोबारी हीरानंदानी ने अपने हलफनामें में यह भी दावा किया है कि टीएमसी सांसद ने महंगे लग्जरी आइटम, दिल्ली में उनके बंगले की मरम्मत, यात्रा खर्च, छुट्टियों के अलावा देश और दुनिया में अलग-अलग जगहों पर यात्राओं के लिए उनसे कई बार मदद ली है. जाहिर है कि उन्होंने बिना सबूत ये आरोप नहीं लगाएं होंगे. क्योंकि इस तरह के गंभीर आरोप अगर झूठे निकलते हैं उल्टे दर्शन फंस सकते हैं. अगर ये आरोप साबित होते हैं तो महुआ की मुश्किलें बढ़नी तय हैं. कोर्ट में इन खर्चों के रिसीट यह साबित करने के लिए काफी हो जाएंगे कि उन्होंने रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछे थे.
महुआ दर्शना हीरानंदानी के सारे आरोपों के जवाब फैक्ट्स के साथ देने की बजाय आरोप लगाने वाले की टेक्निकलटी पर जा रही हैं. जैसे दर्शन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं आरोप लगाने के लिए? आरोपों को उन्होंने खुद क्यों नहीं पढ़ा ? ट्वीट क्यों नहीं किया? उनकी कंपनी की ओर से ये बातें क्यों नही की गईं? दर्शन के आरोप कंपनी के लेटरहेड पर क्यों नहीं हैं? आरोप नोटरीकृत क्यों नहीं है? महुआ के ये सभी जवाब उनके समर्थन में कहीं से खड़ा नहीं होते. उनके इस तरह के तर्कों से लगता है कि उनके पास जवाब देने के लिए कुछ नहीं है. जरूरी नहीं है कि आरोप लगाने के लिए पीसी ही बुलाई जाए. और ये भी जरूर नहीं इस तरह के आरोप अपनी कंपनी के लेटरहेड पर ही लिखे जाएं.
महुआ अपने लिखे जवाब के पैराग्राफ 12 में दावा करती हैं कि दर्शन ने मेरी मांगें मान लीं, क्योंकि उसे डर था कि मैं नाराज न हो जाऊं. दर्शन और उनके पिता भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप के संचालक हैं. यूपी और गुजरात में उनकी हालिया परियोजनाओं का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री द्वारा किया गया है. दर्शन हाल ही में प्रधानमंत्री के साथ उनके व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में विदेश गए थे. ऐसे धनी, सफल व्यवसायी जिसकी हर मंत्री और पीएमओ तक सीधी पहुंच है, उसे पहली बार के विपक्षी सांसद द्वारा उसे उपहार देने और उसकी मांगों को मानने के लिए क्यों मजबूर किया जाएगा?
महुआ द्वारा दिया यह तर्क जितना उनको निर्दोष साबित करता है उतना ही दर्शन हीरानंदानी को भी. जिस शख्स के पास इतनी दौलत है, इतनी पहचान है , इतना बड़ा साम्राज्य है वह इस पचड़े में क्यों पड़ेगा. हीरानंदानी के पास इस पचड़े में पाने के लिए कुछ नहीं है , खोने के लिए बहुत बड़ा औद्योगिक साम्राज्य है. हां ये हो सकता है कि हीरानंदानी ने महुआ के साथ मिलकर कुछ गलत किया हो. और सही है कि हर गलत करने वाला दूसरों के इशारे पर नाचने को मजबूर होता है. और अगर हीरानंदानी ने कोई गलती है की है तो महुआ का भी फंसना तय है

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