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मनोज जरांगे के नजदीक 50 हजार OBC जुटाएंगे ? छगन भुजबल, मराठा कोटा मांग पर महाराष्ट्र में गरमाई सियासत

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मनोज जरांगे के नजदीक 50 हजार OBC जुटाएंगे ? छगन भुजबल, मराठा कोटा मांग पर महाराष्ट्र में गरमाई सियासत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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मुंबई। महाराष्ट्र के मराठा आरक्षण मुद्दे पर तनाव बढ़ रहा है, सियासत तेज होने लगी है। अब महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल के संगठन अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद ने 17 नवंबर को जालना जिले में एक रैली का ऐलान किया है। यह रैली मनोज जरांगे के धरना स्थल से थोड़ा ही दूर है।
मराठा कोटा की मांग को लेकर जल रहा महाराष्ट्र
कई प्रदर्शन, धरना और रैलियों के संग भूख हड़ताल हुई है।

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महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गई है। दो गुट हो गए हैं, जो मराठा आरक्षण की मांग कर रहे हैं और दूसरा गुट वह है जो इसके खिलाफ है। मराठा कोटा का मांग को लेकर मनोज जरांगे भूख हड़ताल पर बैठे। तमाम उठा-पटक के बाद उन्होंने अल्टिमेटम देते हुए अपनी भूख हड़ताल खत्म की है। हालांकि मामला अभी भी गर्म है। इसी बीच अब महाराष्ट्र के मंत्री गगन भुजबल के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 17 नवंबर को जालना जिले के अंबाड में एक रैली के लिए ओबीसी समुदाय के 50,000 से अधिक लोगों को जुटाना चाहते हैं। इस रैली में सभी ओबीसी विधायकों को आमंत्रित किया जाएगा। अंबाड, मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जरांगे के उस मैदान से कुछ किलोमीटर दूर है, जहां से उन्होंने राजनेताओं पर दबाव बनाने और मराठा नेतृत्व को अपने समुदाय को आरक्षण का लाभ देने से दूर रखने के लिए ओबीसी को दोषी ठहराया था। मंत्री भुजबल की अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद, जो मराठा समुदाय के लिए व्यापक आरक्षण और कुनबी ओबीसी श्रेणी में इसे शामिल करने के विरोध में सबसे आगे है।

छगन भुजबल की परषिद अंतरवाली सारती से कुछ किलोमीटर दूर अंबाड में एक रैली की योजना बना रही है। अंतवाली सारती वही जगह है जहां मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जरांगे दो बार भूख हड़ताल पर बैठे थे।

‘ओबीसी के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं, चुप नहीं बैठूंगा’, मराठा कोटा को लेकर अपनी ही सरकार पर बरसे छगन भुजब, हिंगोली में भी रैली की तैयारी शुरु है।
पुलिस मुख्यालय ने अंबाड में रैली की घोषणा के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए मराठवाड़ा के सभी यूनिट कमांडरों के साथ एक वीडियो-कॉन्फ्रेंस की। 17 नवंबर की रैली के बाद एक और रैली की तैयारी है। यह दूसरा रैली 26 नवंबर को हिंगोली में आयोजित की जाएगी। छत्रपति संभाजीनगर में जरांगे ने कहा कि अगर सरकार आरक्षण की मराठा मांग को पूरा करने के लिए 24 दिसंबर की समय सीमा से चूक जाती है, तो वह उन राजनेताओं का नाम लेंगे, जिन्होंने पिछले 20 वर्षों से अपने लिए आरक्षण का लाभ उठाया, लेकिन समुदाय को इससे वंचित कर दिया।
एक प्रभावशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता और अजीत पवार की एनसीपी के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री भुजबल ने सोमवार को कहा था कि वह ओबीसी कोटा हिस्से में किसी भी मराठा अतिक्रमण की अनुमति नहीं देंगे और इस उद्देश्य के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ओबीसी समुदाय के लोगों से इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने की अपील की थी और आगे आकर उनका नेतृत्व करने का एलान किया है

महाराष्ट्र में 20 से ज्यादा ओबीसी संगठन
परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष बालासाहेब करदक ने कहा कि रैली की तैयारी शुरू हो गई है। संगठन की जालना इकाई रैली के आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन से अनिवार्य मंजूरी लेने की प्रक्रिया में थी। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में हमारे 20 से अधिक ओबीसी संगठन हैं। संगठन समुदाय के लोगों को रैली में भाग लेने के लिए संगठित करेंगे। मराठवाड़ा के जिलों में ऐसे संगठनों की बैठकें पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इस तरह की बैठकें जल्द ही राज्य के बाकी हिस्सों शुरु है।

करदक बोले- सियासी रैली नहीं
करदक ने कहा कि राज्य के सभी ओबीसी विधायकों और समुदाय के कार्यकर्ताओं को रैली के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘यह रैली राजनीतिक प्रकृति की नहीं है। इसका आयोजन ओबीसी समुदाय के लाभ के लिए किया जा रहा है। हम चाहेंगे कि विभिन्न राजनीतिक दलों के ओबीसी विधायक रैली में भाग लें, जो राज्य में समुदाय की ताकत का प्रदर्शन होगा।’

मराठा कोटा से ओबीसी कैसे होगा प्रभावित हो सकता है? बालासाहेब करदक नेकहा, ‘राज्य में ओबीसी समुदाय के लोगों को आशंका है कि अगर मराठों को (ओबीसी) श्रेणी में पूर्ण आरक्षण दिया जाता है, तो इसका उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार को मराठों को ओबीसी कोटे से अलग आरक्षण देना चाहिए। हम अपने समुदाय के लोगों को आरक्षण के मामले में पीड़ित नहीं होने देंगे।

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