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सुसनी साग के उपयोग से शिथिल नसों और शरीर की हड्डियों में चट्टान जैसी ताकत

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सुसनी साग के उपयोग से शिथिल नसों और शरीर की हड्डियों में चट्टान जैसी ताकत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

 

शिथिल पड़ी नसों में बिजली सी करंट दौड़ा देगा यह अंजान साग, हड्डियों में भरता है चट्टानी शक्ति, दिमाग भी होगा दमदार

साग तो आपने बहुत तरह के खाए होंगे लेकिन इस साग का जवाब नहीं. इस साग का नाम है सुसनी. इसे कहीं सुनसुनी साग भी कहा जाता है. रिसर्च में भी यह साबित हो चुका है कि इस साग से नसों में नई जान आ जाती है.

इस साग में बसता है सेहत का संसार का अथाह सागर

हममें से अधिकांश लोगों ने सुसनी के साग के बारे में नहीं सुना होगा लेकिन यह कमाल का साग है. इसके सेवन से शिथिल पड़ चुकी नसों में बिजली सी फुर्ति जगाई जा सकती है. इतना ही नहीं सुसनी के साग में ब्रेन से संबंधित कई बीमारियों को रोकने की क्षमता है. सुसनी का साग मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम भारत में बहुतायात में पाया जाता है. झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस साग से कई तरह की रेसिपी बनाई जाती है. सुसनी के साग को कुछ जगहों पर सुनसुनी साग भी कहा जाता है. इसका अंग्रेजी नाम वाटर क्लोवर या पेपरवर्ट कहा जाता है. सुसनी का साग हमेशा पानी में उगता है. सुसनी के साग का औषधि के रूप में सदियों से इस्तेमाल किया जाता है. सुसनी के साग में एंटी-इंफ्लामेटरी, डाययूरेटिक, डिप्यूरेटिव जैसे गुण पाए जाते हैं. इसका वैज्ञानिक नाम मार्सिलिया क्वाड्रिफोलिया है. आइए इसके फायदे के बारे में जानते हैं.

 

नसों से जहर को निकालता है

एनसीबीआई रिसर्च पेपर के मुताबिक सुसनी के साग की जब रासायनिक जांच की गई तो इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए गए. इसके साथ ही इसमें फेनोलिक कंपाउड, टेनिंस, सेपोनिंस, फ्लेवेनोएड्स, स्टेरोएड्स, टरपेनोएड्स, अल्कालोएड्स जैसे कंपाउड भी मिले. ये सारे तत्व शरीर को बीमारियों से महफूज रखने के लिए बेहद मददगार साबित हो सकते हैं. स्टडी के मुताबिक नसों में जब एक्सिटोटॉक्सिसिटी बढ़ती है या यूं कहें नसों में जब हानिकारक तत्व घुस जाते हैं तो इससे नसें डैमेज होने लगती है. इसके कारण नसों के मूवमेंट पर फर्क पड़ता है.

 

नसों के कमजोर होने से हम कोई भी काम सही से नहीं कर पाते. यहां तक ऐसी स्थिति में दिमाग भी सही से काम नहीं कर सकता. कमजोरी और थकान बेतहाशा बढ़ जाती है. छोटा सा काम करने पर मन बोझिल हो जाता है. स्टडी में पाया गया है कि सुसनी के साग में जो कंपाउड होता है वह इसे एक्सिटोटॉक्सिसिटी को रोक देता है जिसके कारण नसों में पहले जैसी जान आ जाती है और शरीर में फुर्ती आ जाती है.

 

हड्डियों के लिए दमदार साग

स्टडी में यह भी पाया कि सुसनी के साग में कैल्शियम को बढ़ाने की गजब की शक्ति है. यानी अगर आपको अपनी हड्डियों में चट्टानी ताकत लानी है तो सुसनी के साग का कुछ दिनों तक सेवन कीजिए. रिसर्च के मुताबिक सुसनी के साग के सेवन करने से बुढ़ापे में होने वाली बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम हो सकता है. इतना ही नहीं इसमें दिमाग में होने वाली बीमारी इडेमा को रोकने की भी क्षमता है. जानवरों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि सुसनी के साग के सेवन में दिमाग की कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी नहीं होती. यानी इससे मेमोरी पावर को बढ़ाया जा सकता है.

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