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देश में जल्द कराई जाएगी जनगणना : जानिये इस बार क्या होगा खास

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देश में जल्द कराई जाएगी जनणना, जानिये इस बार क्या होगा खास

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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दिल्ली। सरकार ने दशकीय जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन जाति संबंधी कॉलम पर निर्णय नहीं हुआ है। कोविड-19 के कारण 2020 में स्थगित हुई जनगणना अब जल्द ही होगी। महिला आरक्षण अधिनियम का कार्यान्वयन भी जनगणना से जुड़ा है। यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना पोर्टल शामिल होगा।

सरकार ने शुरू की दशकीय जनगणना की तैयारी

जाति संबंधी कॉलम पर अभी कोई फैसला नहीं लिया

पहली बार होगी डिजिटल जनगणना, पोर्टल तैयार

सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। सरकार ने दशकीय जनगणना कराने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इस प्रक्रिया में जाति संबंधी ‘कॉलम’ शामिल करने पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। एक सूत्र ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि दशकीय जनगणना जल्द ही कराई जाएगी। भारत में 1881 से हर 10 वर्ष में जनगणना की जाती है।

इस दशक की जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल, 2020 को शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। पिछले वर्ष संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण अधिनियम का कार्यान्वयन भी दशकीय जनगणना से जुड़ा हुआ है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने संबंधी कानून इस अधिनियम के लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद लागू होगी।

जातिगत जनगणना को लेकर अभी फैसला नहीं

दशकीय जनगणना में जाति संबंधी कॉलम शामिल करने के बारे में पूछे जाने पर सूत्र ने कहा, “इस पर निर्णय होना अभी बाकी है।” राजनीतिक दल जाति जनगणना कराने की पुरजोर तरीके से मांग कर रहे हैं। नये आंकड़े नहीं होने के कारण सरकारी एजेंसियां अब भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नीतियां बना रही हैं और सब्सिडी आवंटित कर रही है।

जनगणना के तहत घरों को सूचीबद्ध करने का चरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक पूरे देश में किया जाना था, लेकिन कोविड-19 के प्रकोप के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि पूरी जनगणना और एनपीआर प्रक्रिया पर सरकार के 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है।

यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसके जरिए नागरिकों को स्वयं गणना करने का अवसर मिलेगा। इसके लिए जनगणना प्राधिकरण ने एक स्व-गणना पोर्टल तैयार किया है, जिसे अभी लॉन्च नहीं किया गया है। स्व-गणना के दौरान आधार या मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से एकत्र किया जाएगा।

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