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हाईकोर्ट ने कहा लाउडस्पीकर ‘धार्मिक स्थलों में प्रार्थना’ के लिए

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हाईकोर्ट ने कहा लाउडस्पीकर ‘धार्मिक स्थलों में प्रार्थना’ के लिए

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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इलाहाबाद। मस्जिद से अजान देने के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दिलाने की मांग याचिका में की गई थी. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने याचिका का विरोध किया.

‘पूजा स्थल प्रार्थना के लिए हैं..’ मस्जिद में लाउडस्पीकर पर HC ने फौसला सुनाया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धार्मिक स्थल में पूजा के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करना किसी का कानूनी अधिकार नहीं हो सकता है.

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि धार्मिक स्थल में पूजा के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करना किसी का कानूनी अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा है कि पूजा स्थल मुख्य रूप से ईश्वर की प्रार्थना के लिए होते हैं, इसलिए लाउडस्पीकरों के प्रयोग को अधिकार नहीं कहा जा सकता है. विशेषकर तब जब कि ऐसा प्रयोग आसपास रहने वालों के लिए परेशानी का कारण बनता हो. जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस डोनादी रमेश की डिवीजन बेंच ने पीलीभीत के मुख्तियार अहमद की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है.मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी.

याचिका में एक मस्जिद से अजान देने के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दिलाने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने याचिका का विरोध किया. सरकारी वकील ने कहा कि याचिका न तो मस्जिद का मुतवल्ली है और न ही मस्जिद उसकी है. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्थल ईश्वर की पूजा-अर्चना के लिए होते हैं इसलिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को अधिकार नहीं माना जा सकता है.

गौरतलब है कि मई 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि अब कानून में यह प्रावधान हो गया है कि मस्जिदों से लाउड स्पीकर बजाना मौलिक अधिकार नहीं है. इसलिए याचिका को राहत नहीं दी जा सकती है. इसी आधार पर इस मामले में भी अदालत ने याचिका को राहत देने से इंकार कर दिया.

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