स्वास्थ्य लाभ के लिए कीजिए श्रावण मास मे रूद्राभिषेक
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
नागपुर। श्रावण मास में रुद्राभिषेक स्वास्थ्य लाभ के लिए एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना गया है। यह भगवान शिव को प्रसन्न करने और रोगों से मुक्ति पाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।
श्रावण मास में रुद्राभिषेक के लाभ: रोगों से मुक्ति: रुद्राभिषेक विशेष रूप से रोगों को दूर करने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है।
मानसिक शांति: रुद्राभिषेक मानसिक तनाव, पुरानी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है और मानसिक संतुलन को बढ़ाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति:
यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
ग्रह दोषों से मुक्ति: रुद्राभिषेक कालसर्प दोष, पितृ दोष जैसे ग्रह दोषों को शांत करने में मदद करता है।
अन्य लाभ: रुद्राभिषेक से संतान प्राप्ति, शीघ्र विवाह, करियर में सफलता, धन वृद्धि, और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।
श्रावण मास में रुद्राभिषेक कैसे करें: सामग्री: शिवलिंग, जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, बेलपत्र, चंदन, धूप, दीप, फल, फूल, आदि।
विधि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शिवलिंग का अभिषेक करें।
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
आरती करें। विशेष: सावन के महीने में हर सोमवार को रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है।
आप अपनी सुविधानुसार किसी भी शुभ तिथि पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं।
यदि आप स्वयं रुद्राभिषेक नहीं कर सकते हैं, तो किसी पंडित से करवा सकते हैं।
निष्कर्ष: श्रावण मास में रुद्राभिषेक एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति के लिए किया जाता है। यह न केवल शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है।
इसके अलावा मंगलवार 22 जुलाई 2025 को सावन प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक विशेष फलदायी होगा। इसके अलावा 23 जुलाई बुधवार श्रावण शिवरात्रि, 29 जुलाई मंगलवार नाग पंचमी और 6 अगस्त बुधवार को श्रावण शुक्ल पक्ष प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक कराना सकारात्मक फलदेने वाला होगा।
सावन में भक्त शिवजी की आराधना में रमे रहते हैं। मंदिर हो या घर पंचाक्षरीय शिव महा मंत्र से गूंजता हृदय अनंत ऊर्जा का संचार करता रहता है। इस समय जल, दूध, घी, शहद, दही, बेलपत्र, मदार से रुद्राभिषेक की आध्यात्मिक क्रिया और शिव जी को प्रसन्न करने के अनुष्ठान से जीवन की समस्याओं का अंत होता है और नई दिशा मिलती है।
इससे तन, मन, आत्मा की शुद्धि होती है। मान्यता है कि रुद्राभिषेक से ग्रह दोष दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं। करियर में स्थिरता आती है, स्वास्थ्य लाभ मिलता है। जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। बहरहाल, आइए जानते हैं सावन 2025 में रुद्राभिषेक के लाभ
सावन में रुद्राभिषेक, ग्रह दोष करता है दूर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि आपके बनते काम बिगड़ रहे हैं या परेशानियां पीछा नहीं छोड़ रही हैं तो संभव है कि कुंडली में ग्रह दोष हो। ऐसे में सावन में रुद्राभिषेक से आपको राहत मिल सकती है। मान्यता है कि नियमानुसार सावन में रुद्राभिषेक कालसर्प दोष, पितृ दोष और या अन्य कोई ग्रह दोष हो, सभी से राहत मिलती है।
सावन में रुद्राभिषेक से मनोकामनाएं होती हैं पूरी
सावन में रुद्राभिषेक को मनोकामना पूर्ति का शक्तिशाली उपाय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग लंबे समय से नौकरी, विवाह, संतान या सफलता की इच्छा मन में रखे हुए हैं, रुद्राभिषेक से उनकी इच्छा पूरी हो सकती है। मन को शांति भी मिलती है।
रुद्राभिषेक से आर्थिक स्थिति होती है मजबूत
कई बार लोगों को मेहनत के अनुरूप फल नहीं मिल पाता है। इसमें सच्चे मन से रुद्राभिषेक तकदीर पलटने वाला हो सकता है। रुद्राभिषेक के दौरान मंत्रों के साथ शिवलिंग पर पंचामृत और जल चढ़ाने से मानसिक बाधाएं दूर होती है और यह प्रक्रिया सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इससे आर्थिक उन्नति होती है और करियर में सकारात्मकता आने लगती है।
रुद्राभिषेक से स्वास्थ्य लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राभिषेक मानसिक तनाव, पुरानी बीमारियां को दूर करने में अपना प्रभाव दिखाता है। क्योंकि इनका संबंध मन से भी होता है। रुद्राभिषेक के मंत्र मानसिक संतुलन को बढ़ाते हैं, ये किसी चिकित्सा से कम नहीं है, जो रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है।
नकारात्मक ऊर्जा का खत्म करता है प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कभी में जीवन में ऐसी घटनाएं घटती हैं जिसकी कोई वजह नहीं समझ आती, कोई तर्क भी काम नहीं करता है। ये किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है। ऐसे में सावन में शिव जी का रुद्राभिषेक घर और व्यक्ति दोनों की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती है और जीवन में सकारात्मकता लाती है।
सावन के पूरे महीने में रुद्राभिषेक किया जा सकता है। लेकिन सोमवार और विशेष दिनों में रुद्राभिषेक के विशेष फल होते हैं। विशेष तिथि पर रुद्राभिषेक के लिए किसी पुरोहित से विधि विधान से रुद्राभिषेक अनुष्ठान कराना चाहिए।
इसमें कई घंटे का समय लग सकता है, लेकिन ऐसा आपके लिए किसी कारण से संभव न हो तो सावन के सोमवार के दिन या सावन की विशेष तिथियों पर शिव मंदिर में या घर पर पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, चंदन, भस्म आदि से श्रद्धा और शुद्धता से रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते हुए या पंचाक्षरीय ऊँ नमः शिवाय मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र 1 या 11 माला जाप करते हुए भगवान का अभिषेक कर सकते हैं। साथ ही विधि विधान में कमी के लिए क्षमा प्रार्थना कर लेनी चाहिए।
शिव मंत्र लिखे कुर्ता, टी-शर्ट पहनना चाहिए यह समाचार भक्त शिरोमणी श्री श्री प्रेमानंद जी महाराज ने दी है.
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