Breaking News
Oplus_131072

श्रावण मास में कामिक एकादशी व्रत कथा का आलौकिक महत्व

Advertisements

श्रावण मास में कामिक एकादशी व्रत कथा का आलौकिक महत्व

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

Advertisements

 

नागपुर। सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार श्रावण मास मे एकादशी व्रत कथा पाठ से भगवान शिव और विष्णुजी की कृपा और मोक्ष प्राप्त होता है.सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, सुख, शांति, समाजिक प्रतिष्ठा और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन यदि पूरी श्रद्धा और विधि से पूजा की जाए, तो पाप नष्ट होते हैं, और जीवन में स्थिरता आती है।

सावन के महीने में दूसरे सोमवार को पड़ने वाली कामिका एकादशी का इस बार बहुत शुभ संयोग बना रही है। इस एकादशी का व्रत रखने से जातक भगवान विष्णु और शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। पद्मपुराण के अनुसार, इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और बेहद पुण्य फल मिलता है।

फॉलो करें

हिंदू धर्म में सावन में पड़ने वाली एकादशी का महत्व बेहद अधिक होता है। सावन के महीने में दूसरे सोमवार के दिन एकादशी पड़ रही है। यही कारण है इस दिन बेहद शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में इस कामिका एकादशी का व्रत करना बेहद फलदायी होने वाला है। इससे भगवान विष्णु और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होगी। सावन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत रखने के साथ-साथ इस दिन व्रत कथा का पाठ करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसा करने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और जीवन के दुखों से निजात मिलती है। पद्मपुराण में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठरजी को कामिका एकादशी व्रत की कथा सुनाई थी। आइए विस्तार से जानें

कामिका एकादशी व्रत कथा का आलौकिक महत्व

युधिष्ठिर ने सवाल किया- गोविन्द। वासुदेव। आपको नमस्कार है। श्रावण के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी आती है ? उसका वर्णन कीजिये।

भगवान कृष्ण ने कहा- राजन। सुनो, मैं तुम्हें एक पाप नाशक उपाख्यान कहकर सुनाता हूं, जिसे पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने नारदजी के पूछने पर कहा था।

नारदजी ने प्रश्न किया- भगवन ! कमलासन ! मैं आपसे यह सुनना चाहता हूं कि श्रावण के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है, उसका क्या नाम है, उसके कौन-से देवता हैं तथा उससे कौन-सा पुण्य प्राप्त होता है? प्रभो । यह सब बताइये ।

ब्रह्माजी ने कहा- नारद ! सुनो मैं सम्पूर्ण लोकों के हित की इच्छा से तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर देने जा रहा हूं। श्रावण मास में जो कृष्ण पक्ष की एकादशी आती है, उसे ‘कामिका’ कहा जाता है। इसका स्मरण मात्र करने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है। एकादशी के दिन मनुष्य श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भगवान का पूजन करना बहुत फलदायी होता है। भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से जो फल प्राप्त होता है, वह गढ़ा, काशी, नैमिषारण्य तथा पष्कर क्षेत्र में भी सिंह राशि के गुरुवार होने पर तथा व्यतीपात और दण्ड योग में गोदावरी नदी में स्नान से जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से भी प्राप्त होता है। जो मनुष्य इस तिथि पर समुद्र और वन सहित समूची पृथ्वी का दान करता है और कामिका एकादशी का व्रत रखता है, वे दोनों समान फल के भागी हो जाता है।

जो कोई व्यायीपात हुई गाय को अन्यान्य सामग्रियोंसहित दान करता है, उस मनुष्य को जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल ‘कामिका’ का व्रत करने वाले को मिलता है। नरश्रेष्ठ श्रावण मास में जो भगवान श्रीधर का पूजन करता है, उसके द्वारा गन्धवौं और नांगों सहित सम्पूर्ण देवताओं की पूजा हो जाती है। अतः पापभीरु मनुष्यों को यथाशक्ति पूरा प्रयत्न करके ‘कामिका’ के दिन श्रीहरि का पूजन करना अवश्य करना चाहिये। जो पाप रूपी पङ्क से भरे हुए संसार समुद्र में डूब रहे हैं, उनका उद्धार करने के लिए कामिका का व्रत सबसे उत्तम होता है। अध्यात्म विद्या परायण पुरुषों को जिस फल की प्राप्ति होती है; उससे बहुत अधिक फल ‘कामिका’ व्रत करने वालों को प्राप्त होता है। ‘कामिका’ का व्रत करने वाला मनुष्य यदि रात्रि में जागरण करता है, तो न कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है।

लाल मणि, मोती, वैदूर्य और मूंगे आदि से पूजित होकर भी विष्णुजी वैसे संतुष्ट नहीं होते हैं, जिस प्रकार तुलसी दल से पूजित होने पर प्रसन्न होते हैं। यदि किसी ने तुलसी की मंजरियों से श्री केशव का पूजन कर लिया, तो उसके जन्म भर के पाप निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं। जो दर्शन करने पर सारे पाप समुदाय का नाश कर देती हैं, स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बना देती हैं, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण कर देती हैं, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुंचाती हैं, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप लेकर जाती हैं और भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्ष रूपी फल प्रदान कराती हैं, उस तुलसी किया देवी को हमारा नमस्कार है। जो मनुष्य कामिका एकादशी के दिन रात के समय दीपदान करता है, उसके पुण्य की संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते हैं। एकादशी के दिन भगवान कृष्ण के सामने जिस भी मनुष्य का दीपक जलता है, उसके पितर स्वर्ग लोक में स्थित रहकर अमृत पान से तृप्त हो जाते हैं। घी या तिल के तेल से भगवान के सामने दीपक जलाकर मनुष्य देह त्यागने के बाद करोड़ों दीपकों से पूजित होते हुए स्वर्ग लोक में चला जाता है।

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

मां वैनगंगा परिक्रमा यात्रा से लौटे शिवशक्ति उपासक भक्तगण

मां वैनगंगा परिक्रमा यात्रा से लौटे शिवशक्ति उपासक भक्तगण टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220   सिवनी। …

चरित्रहीन पर स्त्रीगमन और पर पुरुष व्यभिचरिणी के यहां जलपान वर्जित

चरित्रहीन पर स्त्रीगमन और पर पुरुष व्यभिचरिणी के यहां जलपान वर्जित टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: संयुक्त …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *